अपनी ही तलाश में आजकल...

सच है कि गुजरा हुआ
वक्त दुबारा नहीं आता,
फिर भी नये जमाने का
ये चलन मुझे पसंद नहीं आता....

सैकड़ों Forwarded messages and photos से बेहतर हैं दो शब्द प्यार के,आभार के अपने हाथ से लिखे हुए,बोले हुए....
सभी को धनतेरस के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ...,
25/10/19

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"साहित्य-सेवा"

अगर लिखना ना आ सके
तो कोई शर्म की बात नहीं,
लेकिन किसी के लिखे को
अपना दिखा कर मत लूटो वाहवाही...,
नहीं जानते नाम लेखक का
तो अज्ञात ही लिख दो,
पर किसी के लिखे के नीचे
अपना नाम मत दो...
इतनी गरिमा उस लेखक की
और अपनी रख लो..
बहुत है तुम्हारी इतनी
साहित्य-सेवा भी..,

प्रांजल,
24/10/19,
4.25P

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