Hey, I am on Matrubharti!

तुम्हारा प्यार
गीली रेत पर लिखा नाम
लहर के एक झोंकें ने
मिटा दिया सब ,
साथ ही बह गए
प्रेम पत्र और डायरी के संकड़ो पन्ने
जो सबुत थे तुम्हारे प्यार के।
सागर के किनारे उठती
ऊँची ऊँची लहरों के
शोर में गुम हो गए तुम्हारे
वो प्यारे अल्फ़ाज़
जो कभी हमारे प्यार के साक्षी थे
चाँद- तारे भी अब नही देते
गवाही तुम्हारे प्यार की।
सुकून देने वाली हवाओं ने
अपना रुख बदल लिया है।
सुबह होते ही भेद तुम्हारे
सब खुल जाने हैं।
सूर्य के तेज में सब छिप जाने हैं।
बताओं तुम फिर कैसे साबित करोगें
अपनी मोहब्बत।
हम फिर से बिछड़ जाने वाले हैं।

-prema

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तर्पण पर तुम्हारी स्मृति शेष
***
तुम अब पास नही
शायद साथ रहते हो हर पल
तुम्हें देखे सालों बीत गए
तुम सी सूरत वाला 
अभी तक कोई दिखा नही
तुमने प्यारी सी सूरत पाई थी
हाँ कभी कभी नज़र
दीवार पर टँगी तुम्हारी तस्वीर 
पर चली जाती है
सूखे फूलों की
माला के बीच तुम्हें हमेशा
एक सी हँसी हँसते हुए देखती हूँ।
तीज़ -त्योहार,
तुम्हारे पसंद के पकवान
खीर पूरी
अपने तर्पण पर देख
तुम खुश होते होंगें।
कई मिलें तुम्हारे नाम वाले
जो तुम से एक दम अलग ही होंगे
क्योंकि तुम अनोखे थे
तुम्हारा नाम बादलों पर
कभी कभी लिखा दिखता है
जो अचानक हवा के झोंके से
मिट जाया करता है।
कितना पसंद था तुम्हें सोना
देख तर्पण तुम्हारा
याद आता है वो रूठ कर सो जाना
अब कई सालों हो गए
तुम्हे रूठे हुए
ये कौन सी नींद है तुम्हारी
जो कभी खुलती ही नही
इतना भी कोई भला सोता है।
तारों में चमकती तुम्हारी हँसी
चाँद में चमकता तुम्हारा चेहरा
बहुत सालों तक पुकारा तुम्हें
लेकिन अब लगता है
तुम कभी सुन भी सकोगे हमारी आवाज़
शायद तुम्हें वहीं अच्छा लगने लगा है।
यही मनोकामना है कि
तुम जहाँ रहो वहाँ
खुश रहो।

-prema

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अबकी बार सावन में आना,
गीली घास पर बैठेंगे दोंनो साथ ।
सुनेंगे कोयल की वो मीठी आवाज़ ,
जिसे सुनकर तुम रोमांचित हो उठते हो मुझे सुनने को।
गीली हवा में मिट्टी की सुंगन्ध,
तुम्हें मेरे स्पर्श को याद दिलाती होगी।
फूलों की खुशबू तुम कहाँ भूल पाते होंगे,
जिससे सदा सुगन्धित रहते थे केश मेरे।
गर्म चाय की पियाली वाले हाथों से,
वो छू लेना मेरे रुख़सरों को
तुम्हें बेचैन तो करता होगा मुझ से मिलने को।
अबकी बार सावन में आना ,
बैठेंगें दोनो साथ,
दरमियान सारे विद्वेष, सन्देह मिट जायें,
और हम फिर से हो जाएं एक।
*******प्रेमा--------

-prema

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चाँद ने कब
किससे
पूरी मोहब्बत की है।
चाँदनी उसकी,
आसमान उसका ,
तारों की चमक उसकी,
हमने तो पलभर देखने की
क़ीमत भी सारी रात
जाग कर अदा की है।

-prema

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नींद तुम
आती नही पास मेरे,
बैचेनी में सुकून देने।
तुम भी,
खूब बदला लेती हो
उसका जो
वैवक़्त कभी
मैं सो जाया करती थी।

-prema

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गुस्सा
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बेरोजगारी के आलम
और महामारी काल में
अगर कोई
पूछ लें आप कैसे हो
तो गुस्सा आ जाता है।
कोई अनजान अगर
प्रवेश करना चाहे
मेरे अतीत में
तो गुस्सा आ जाता है।
बिना जाने कोई
मेरे भविष्य का
कर दे निर्णय
तो गुस्सा आ जाता है।
बुद्धिजीवियों की तंग और सँकरी
गलियों से निकलते विचारों का लेखा जोखा
अगर मेरे प्रश्न का उत्तर बन जाये तो
गुस्सा आ जाता है।
कोई अवसरवादी बूढ़ा गिद्ध बुद्धजीवी
अगर मेरे भाग्य और भविष्य पर
अफ़सोस ज़ाहिर करें
तो गुस्सा आ जाता है।
सड़क पर तेज हॉर्न बजाती
आती जाती हज़ारों गाड़ियों,
टोलियां में खेलते बच्चों
का शोर,
एकांत में बैठा
सारंगी बजाता
कोई बूढ़ा,
और खुल जाए अवसाद तनावग्रस्त
में अधखुली पलकें,
तो गुस्सा आ जाता है।
अपने हिस्से का थोड़ा सा स्पेस,
थोड़ी सी स्वच्छ हवा,
थोड़े से स्वंत्रत विचार,
बस यही तो चाह है
मैंने हमेशा से ।
###प्रेमा ##

-prema

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खूबसूरत लगने लगता है
इश्क़ में पड़ा हुआ आदमी,
हँसते हुए,
गाते हुए
रोते हुए,
संघर्ष करते हुए
क्योंकि उसके अंदर का
वो आदमी मर जाता हैं
जो
ईर्ष्या ,
द्वेष,
हिंसा से बना था।

-prema

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तुम रूठोगे तो रूठ जाना
मैं ही मनाऊंगी इस बार
तुम्हें तुम्हारी ही गलती पर।
नही रूकूंगी अब
डिनर के लिए देर रात तक
जब भूख लगेगी खा लूँगी।
नही करुँगी इंतज़ार रात को
नींद आएगी तो सो जाऊँगी
दरवाजा खुला छोड़ कर
तुम आ जाना आराम से
बिना मेरे स्वगात के।
नही खोजूंगी तुम्हें तुम्हारे ही रूम में ,
रहना अपने लैपटॉप
और मोबाइल के साथ बिजी,
जिन्हें छूना सख़्त मना है ,
जिसमें तुम्हारी एक दुनिया
और भी चलती है।
नही करूँगी अब कोई बेहस
जिसमें हमेशा तुम ही विजेता रहे हो।
नही समझना
तुम्हारी हर तेज और धीमी
आवाज़ का संदर्भ
स्पष्ट बोलना अब मुझे।
रूठ कर नही जाऊंगी
इस बार मां घर,
कुछ सोचा है मैंने
इस बार अपने लिए।
तुम जाओ तो चले जाना
कृष्ण और बुद्ध की तरह
मैं नही आऊँगी पीछे,
अपने प्यार का हक़ जताने
@@प्रेमा@@

-prema

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रुकना जरूरी है
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सड़क पर तेज दौड़ती अनगिनत गाड़ियां
रेड लाइट होने पर रुकती हैं।
रुकना जरूरी है थोड़ा सांस लेने और
दूसरे को रास्ता देने के लिए।
कितनो को रास्ता दिया जिंदगी में
हम में से ये कितने सोच पाते हैं।
हज़ारों मीलों का सफ़र
कुछ घण्टो में तय हो सकता है
लेकिन ट्रैफ़िक में कौन जा सकता है
रुक कर कौन जिंदगी को जिया करता है।
ट्रैफिक में रुक कर देखने का अपना मज़ा है
बड़ी भीड़ होती है यहां
सबको आगे निकलना है
लेकिन अपनी गाड़ियों के साथ
गाड़ी को छोड़
कौन आगे बढ़ सकता है भला।
बहुत लोग मिलते है अलग अलग सोच के
लेकिन यहां सबका मसला एक है
ट्रैफिक से मुक्त होने का।
कौन रुकना चाहता है ट्रैफिक में
सबको जाना है अपनी अपनी जगह।
पर जो होशियारी से निकल गया
उसका क्या कहना
और क्यों हो हमारा उसके लिए रोना।
लेकिन बाकी जो बचे हैं
इसलिए रुकना जरूरी है
देखने के लिए कितनी चिन्ता तनाव आक्रोश
और अवसाद ,सब एक साथ मिल जाते हैं यहाँ।

@@@प्रेमा@@@@

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लाल गुलाब
@@@@@
किसी प्रेमी का पहला
प्रेम प्रस्ताव हो तुम
काली स्याही से लिपटे
बंद लिफाफे में
प्यार का पहला
अल्फाज़ हो तुम।
तुम्हारी खुशबु से महक जाया करता था
उसका रोम रोम ,
उसके चेहरे की लालिमा
और केश का सृंगार
हो तुम।

-prema

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