साहित्य समाज का आईना है। कल भी था, आज भी है और कल भी रहेगा....

घड़ी की सुईयों को कदम-दर-कदम चलना सिखाते- सिखाते मैंने ध्यान ही नहीं दिया कि कब चंद्रमा अपने रथ की बागडोर सूरज के हाथों में थमा गया। पहले तो उस उजाले में फर्क ही नहीं कर पाई पर जब गर्माहट महसूस हुई तो एहसास हुआ कि दिन काफ़ी चढ़ आया है।

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आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में 🙏

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मेरा एकलौता रिश्ता, मेरी मम्मा....... निःशक्त बेड पर पड़ी थीं। आक्सीजन मास्क के अंदर से आती उनकी गर्म मगर धीमी सांसों की भाप मुझे यहाँ से भी दिख रही थी।

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देखो बारिश हो रही है 😃.... It's raining ☔

कभी प्यासे को वाॅटर पिलाया नहीं,


अब क्वार्टर पिलाने से क्या फ़ायदा.... 🤪🤪

#भारत_में_चुनाव

गुलाब का फूल बाग में खिल रहा है,

कमल का फूल तालाब में तैर रहा है,

जैस्मीन का फूल चमन में महक रहा है

और

अप्रैल का फूल ये चुटकुला पढ़ रहा है 😂😂

#मूर्ख_दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🥳 😇 🎃 😜

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मेरी मय्यत पे कोई रोया है,




इसलिये जल गया कफ़न मेरा......

मय्यत = अर्थी

आपकी तारीफ से लेखन की ऊर्जा मिलती है 🙏

बहुत - बहुत शुक्रिया बंधु 🙏

पलट कर बेड पर देखा। मम्मा वहाँ नहीं थी पर सामने खिड़की से सूरज कमरे में घुसने की कोशिश कर रहा था। मैंने घड़ी को घूरा, उसने तुरंत बताया...... बारह बजकर चालीस मिनट।

आज अनाहिता की ज़िन्दगी का एक बहुत ख़ास दिन है। आज वो अपनी मम्मा के साथ "घर" जाने वाली है। क्या अनाहिता का ये ख़ास दिन वाकई ख़ास बन पाया.....!!!

जानने के लिए पढे़ं हमारा ब्लॉग "नया जन्म - भाग 9"

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कौन समझाये बेशउरों को, अक्स पानी में तर नहीं होता


दर्द बढ़कर दवा तो होता है, ऐब बढ़कर हुनर नहीं होता....

- अज्ञात

बेशऊर = बेसहूर
अक्स = परछाईं
तर = गीला
ऐब = कमी

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