કોઇ લેખક નથી , શોખ ખાતર લખુ છું ને આનંદમાં રહું છું...હા વાંચન કરવુ ગમે છે ને વાંચવાની ટેવ છે.દેખાવ કરતા આવળતું નથી.જે હોય તે મોઢા પર મુસ્કાન રાખી કહી દેવાની આદતછે.....

वक्त का हसीन नजराना था
मौसम कुछ शायराना था
बैठे थे हम भी बाजार में
लेकिन ख्वाबों को तो
उन्हीं का बहाना चाहिए था

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स्वर्गमें सब कुछ हैं,
लेकिन मौत नहीं है।

गीता में सब कुछ हैं,
लेकिन झूठ नहीं है।

दुनिया में सब कुछ हैं,
लेकिन किसी को सुकून नहीं
और
आज के इंसान में सब कुछ है,
लेकिन सब्र नहीं है।

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अजनबी अंजान सा है
पर कुछ अपनासा लगता है
ना जाने कौन है और
कहां से आया है
कुछ बोले बगैर ही
दिल के राज खोल देता है
कोई अंजाना है
जो अपना सा लगता है ।

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कीसी इनशान के चले जाने से
दुनिया खतम नहीं हो जाती
ओर अगर कोई चाहने वाले का
नाम का बाहना लेकर
अपनी जीदंगी दफा करता हे
तो वो अपने प्रेेम का ही नहीं बल्कि
उसका भी अपमान करता हे
जो चला गया हे

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तकदीर का खेल है यह जिंदगी
वरना इतनी तक़लीफे क्यों उठा लिया करते
वरना ही दामन अपने खुशियों को
ना लिखते कभी

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कभी मौका मिलेगा तो
जरूर से
ठहरना चाहेंगे तेरी बाहों में
और करेंगे वक्त से
एक गुजारिश की
कुछ पल वो
वहीं रुक जाए ।

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हा कुछ अलग से ही जज्बात है मेरे 
जमी पर रह कर भी  ख्वाब अलग है मेरे  ।
इन्सानियत की क्या बात करू में ।
जहा अपने ही पराये हो चले 
वहाँ अपनी क्या बात करु में ।
क्या करे यहाँ तो जमाना ही हमारी 
ख्वाहिशो के आगे झीद पर अडा है ।
कोई पूछे तो क्या कहूँ कोन हुं में ?
तकदीर से हारा हुआ एक ख्वाब  हूं में ।
चाहे रूठे ये जमाना सारा
इस दुनिया की चहल-पहल मे
अपने जज्बातो को कुचलना मुझे नहीं आता ।
हा कुछ अलग से ही जज्बात है मेरे।

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