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हर बार जब टूटी हूँ मैं, मेरा कुछ हिस्सा छूट जाता है।
पर,हर टूटा हिस्सा मुजसे कुछ कहें जाता है।
-𝓟𝓾𝓷𝓲𝓽𝓪

वादे का हिसाब करना है।
मेरे कुछ ज्यादा है।
हिसाब बराबर करना हो तो चले आना।
-𝓟𝓾𝓷𝓲𝓽𝓪

तेरे खुदा की खुदाई क्या खुब दीखती है।
मौत मैंने मांगी थी, मर कोई और गया।
-𝓟𝓾𝓷𝓲𝓽𝓪

तू अपना घर भूल भी जाये, तो मेरे पास चले आना।
में अपने अंदर तुझे बसाने, पूरा शहर लिए फिरती हूँ।
-𝓟𝓾𝓷𝓲𝓽𝓪

उम्मीदें ख्वाब है जो चैन से सोने नही देते।
कुछ पुराने जख्म है, जो खुल के रोने नही देते।
-𝓟𝓾𝓷𝓲𝓽𝓪

उतर जाओ आँखों से तुम मेरे दिल के अंदर तक।
जैसे नदी उतरती है, पहाड़ से समंदर तक।
-𝓟𝓾𝓷𝓲𝓽𝓪

तुम्हे पा कर खोना था।
मेरे साथ यही हादसा भी होना था।
-𝓟𝓾𝓷𝓲𝓽𝓪

मेरे शब्द देखो ना, हर दफा तुमसे मिलने की
आरज़ू रखते है।
समजाइये इन्हें अब मुमकिन नही, जिस तरह मुझे समझाया था।
-𝓟𝓾𝓷𝓲𝓽𝓪

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तुम और में इतनें बुरे थे भी नहीं।
जितना हमारे अलग होने की खबर ने बना दिया।
-𝓟𝓾𝓷𝓲𝓽𝓪