एक लेखक बनने का सफर कैसा शुरू होता है, शायद ही कोई लेखक बता सकता है। कही कुछ चीजें हम रोजमर्रा की तौर पर महसूस करते है,कोई देखकर अनसुना कर देता है और कोई सोचता है काश यह हम बदल पाते। वो काश हम लेखक होते है। जिंदगी की भागदौड़ में मै एक introvert इंसान हु। किरदारों के साथ खेलना हर एक लेखक का पसंदीदा शौक होता है, मेरा भी है। जब भी जिंदगी में विपदा बढ़ जाती है तो भगवान को सब दोष देते है। कभी कभी मेरे किरदार भी मुझे ऐसे ही दोष देते है, नींद चुरा के। जब मै उनके लिए एक ideal भगवान नही हो पाती।

बाते? कहा से शरू करे?
दुनिया में भूख–प्यास के बाद आने वाली कोई चीज जो अपने दिन को पूरा करती है वो है बाते।
कोई बोल देता है, तो कोई सिर्फ सुन लेता है।
कोई मन भर के बोल देता है, कोई मन में ही बोल देता है।
किसी के बोले बिना काम नहीं जमता,
कोई बिना बोले ही पढ़ लिया जाता है।
किसी की बुराई हो या भलाई होती बाते ही है।
बाते लह्मे बना देती है, बाते दोनों में ना हो तो भी लम्हा बन जाता है, आँखे जो बोल रही होती है।
कभी छुपाई जाती है कभी किसी बेजान पन्नो पे लिख उसे सहेजी जाती है।
और भी कही मायने लेकर चलती है बाते।
हर एक के लिए अलग मकाम होती है बाते।

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सुकून भी कितना छोटा शब्द होता है।
सुरज के उगने से जितना सुकून नहीं मिलता वो सुकून सूरज के ढलते ही रजाई में मिल जाता है।
किसी जान पहचान वालो से यह कह, मैं ठीक हु की जगह अपनी पूरी जिंदगी एक अनजान के सामने खोल देने में कितना सुकून मिलता है।
जो कभी मुस्कुराता भी नहीं उसकी मुस्कान देख दिल को कितना सुकून मिलता है।
कोई बुजुर्ग सिर पर हाथ फेर दे तो कितना सुकून मिलता है।
ऐसे कही सुकून की मायने होते है, लोगो के जहन में लेकिन उसकी कोई खास परिभाषा नहीं होती।
पर इतने से ही मन भर जाता है की यह किसी का मोहताज़ नहीं होता।
एक आदमी के सर्वशक्तिमान होने के गर्व को चूर देने वाला शब्द होता सुकून।
और एक बात जो इसकी खास होती है,
जहा से हमे तलाश नही होती इसकी कही बार उसी के छाव में हमे यह मुस्कुराता हुआ मिल जाता है।
है ना! कितना छोटा शब्द सुकून?

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जब ख़्वाबों का पीछा करने का संघर्ष छीन लिया जाता है तो मनुष्य या तो नैराश्य से भर जाता है या औरों को कमतर साबित करके जीवन ऊर्जा पाता है।

-मधु चतुर्वेदी (धनिका)

-Rajshree

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लेखक एक अल्लहादायक सुबह, हाथ में चाय या कॉफी का मग, टेबल पर खुली पड़ी डायरी और उसमे हमारे उतरते हुए विचार।
वन सेकंड यह कोई आपकी कल्पना मात्र तो नही है ना ?
या लेखक के बारे में गलत धारणा, एक लेखक हर जगह लेखक होता है, उसका दिमाग कही भी किसी भी जगह चल सकता है। और हमेशा गलत जगह पर ही चलता है। जितने भी महान आइडिया राइटर की उपज होते है, वो ऐसी ही किसी जगह की देन होती है।

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सुख म्हणजे नक्की काय असतं?
जो क्षण मनाला हवाहवासा वाटला त्याच्या
गुंगीत पुढचा विचार न करता मनाला झालेला अपवाद म्हणजे सुख.
सरतेशेवटी सुख हा फक्त मनाला झालेला अपवादचं.
भोगता आला तर आनंद नाही तर दुःखच म्हणावं
लागेल.

-R.J. Artan

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If you love something, and you don't get it, leave it open to breathe for a while. If that thing comes back, it was yours. If it doesn't, it's never yours.

-R.J. Artan

एके दिवशी माझा श्वास बंद होईल.
नको विचार करूस की माझे प्रेम कमी होईल.
अंतर फक्त एवढे असेल,
आज मी तुझी आठवण काढत आहे,
उदया माझी आठवण तुला येईल.

-R.J. Artan

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God grant me the Serenity

to accept the things

I cannot change, the Courage

to change things I can

and Wisdom

to know the difference.

ठंडी की गुफाओ से उठने का मन नहीं करता फिर भी क्यों होती है सुबह?
चाय की सुड़किया लगाना चाहता है मन फिर भी क्यो दौड़ पर निकालता है वक्त?
आंखे चैन की नींद लेना चाहती है पर रूटीन्स जल्दी उठा ही देता है।
रूटिन करते करते कब जिन्दगी बोजर हो जाती है पता ही नहीं चलता।
कुछ नया- नया कब पुराना होकर हमे काटने लगता है, समझ नही आता।
जिम्मेदारीया बढ़ते- बढ़ते चक्र्व्युह बन जाती है और लोग कहते है, कम्फर्ट झोन से बाहर निकलो।
बहुत करता है मन, ऐसा कुछ करने का दिल कहा कर पता है।
अगर एक दिन भी रुटीन बिघड जाए तो कितना पचतावा होता है।
फिर जीने लगते है जिन्दगी, क्योकि मर नहीं सकते।
लोग कहते है हमारे जिन्दगी में मकसत ही नहीं बचा।
मैं सोचता हु, अगर हम जिन्दगी जी रहे ताकि मर नहीं सकते, तो क्यों न एक लम्बी साँस लेकर कुछ नया खोजा जाए।
शराब का गिलास आधा खाली नहीं आधा भरा देखा जाए।
चार दिवारियो से बाहर नहीं निकल सकते संतो की तरह क्या पता? दरवाजा खोल देने से ही सूरज की रौशनी पास आ जाए।
रोज वही से तो सूरज ऊपर उठता है, ऐसा भी कहेगा मन फिर तुम बोल देना पर आज तो में पहेला उठा हु न।

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जगात सर्वात खोडकर आणि निर्मल नात असत
बहीण- भावाचं.
ज्या गोष्टी आई बापाला आपल्या मुलाबद्दल माहीत नसतात त्या बहीण म्हणून माहीत असतात आणि तरीही त्या तोंडावर येत नाही असं असत बहीण-भावाचं नात.
कधी बाबा जास्तच बोलून गेले तर बहिणीचा हात भावाच्या पाठीवरून फिरतो असं असत बहीण-भावाचं नात
चुकीसाठी शिक्षा म्हणून आईचा मुली वर पडत असलेला मार भाऊ झेलुन घेतो असं असत बहीण-भावाचं नात
जसे जपले नाते मुक्ताई ज्ञानेश्वरांनी तसंच निर्मल आणि निश्चल असतं नातं बहीण-भावाचं .

आज त्याच भाऊ-बहिण्याचा नात्याला उजाळा देणारा दिवस म्हणजे भाऊबीज.

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