....

तूने अच्छा ही किया...मुझे गलत समझकर.....

मैं भी थक गया था.......

ख़ुद को साबित कर कर के......®️

अंधे निकालते हैं नुक्स मेरे क़िरदार में.....

बहरों को शिकायत है गलत बोलता हूंँ मैं........®️

તું મને થોડો તો ઇગ્નોર કર....

હું તને ઓળખવાની જ ના પાડી દઈશ......®️

क्यूँ इतने अनमने से हो....

लगता है खुद से नाराज हो....

પથ્થર ની કિંમત ત્યારે જ સમજાય.....


જ્યારે રાત્રે રસ્તા પર તમને ચાર કૂતરા ઘેરી લે......

The Boss Supremacy.....®️

हम जो मुस्कुरा दे...

तो खामोशियाँ भी कहती हैं...

माशाल्लाह....

जुबान कड़वी दिल साफ़ है....


कौन कब बदला सबका हिसाब है.....

औकात नहीं थी ज़माने में जो मेरी कीमत लगा सके
..


कम्बख़्त इश्क में क्या गिरे... मुफ्त में नीलाम हो गये.....

दिल जीतने के लिए साजिशों की ज़रुरत नहीं पड़ती....

लिबास कितना भी कीमती
क्यों ना हो....

घटिया किरदार
को नहीं बदल सकता....