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कुछ तुमको भी अज़ीज़ है अपने सभी उसूल...

कुछ हम भी इतेफाक़ से...ज़िद के मरीज है....®

सीख कर गया है वो मोहब्बत मुझसे...

अब जिससे भी करेगा बेमिसाल करेगा.....®

लिखा तुमने भी बेहद खूबसूरत था...

वो बात और है कि मेरी स्याही में इश्क़ मिला था...

ये नर्म मिजाज़ी है
कि गुल कुछ कहते नहीं....

वर्ना दिखलाईये
काँटों को मसल कर कभी....

आग़ाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता....

जब मेरी कहानी में तेरा नाम नहीं होता...

ताक की सिस्कियों से उतर याद के दालान मे आ...

भूले बिसरे हुए एे शख्स तू मेरे ध्यान मे अा....®️

तुझे चाहत है वफ़ा की तो मुझे गौर से पढ़...

वो किताबों में कहाँ जो लिखा है मुझ में है....®️

उसकी चीजों को चूम कर लोगो...

हमने बोझ कम कर लिया जुदाई का....®️

सुन लिया करो कभी...

कुछ न भी कहूं तो...®️

या खुदा उसे मनाने को...

आख़िरी फ़ोन कितनी बार करूँ....??