busy in myself

गुलाब की चाहत।
सोचो गुलाब की चाहत क्या होगी ?
किसी के पैरों तले कुचला जाना होगी या,
किसी के होंठों से लग जाना होगी।

बोलो गुलाब की चाहत क्या होगी ?
गुलकंद में पीस जाना होगी या,
किसी के बालों में लग जाना होगी।

बताओ गुलाब की चाहत क्या होगी ?
सरेआम अपनी खुशबु से महेकना होगी या,
बैजान किसी किताब में मरजाना होंगी।
एक गुलाब की चाहत क्या होगी ?

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तुम्हारी आंखों की तोहीन है,
वो अगर जो शराब पीता है।

-Raje.

If you need something,
you need to become a something.

फूल खिले और महेके ना,
ये क्या बात हुई।
आप हमारी गली से गुजरो, और शोर ना हो
ये क्या बात हुई।
वो बता रहे हैं, हमसे मील ने आ रहे हैं।
और इस बात पर हम बेहके भी ना,
ये क्या बात हुई।

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don't waste time on me.
because you have something very important work do.

कहुं जो एक बात, ए दुनिया वालों
किसी के कान में बता न दोगे।
चलो छोड़ो ये सब झंझट,
हमें खुद मे ही गुनगुना लेने दो।

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"फरेब - 11" by Raje. read free on Matrubharti
https://www.matrubharti.com/book/19892943/fareb-11

it is not necessary to story ends with happy love and affection,
but it is necessary to story ends with satisfaction.

जाते हुए, महेमान ने पैसे धरे,
तो बच्चा आनाकानी पर उतर आया है।

ठुकरायी टोफी अजनबी से,
देखो अपनी मां की सीख पर उतर आया है।

पौधा बढ़ चला खजुर हो गया है,
बै-लगाम बहू को, उल्टे मुंह जवाब क्या दे दिया,
देखो सिपाही बेटा, हाथ में डंडा लिए हरामखोरी पर उतर आया है।

और देखो आज बेटा मां को पैसे दिखा रहा है।
आज फिर मां को महेमान बनाकर आनाकानी पर उतर आया है।

कहेता है, संभलकर रहीयो, बरना आश्रम भेज दूंगा।
अजनबी से दूर रहने की सीख पुरी करने पर उतर आया है।

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बसंत में ये पेड़ पीला क्यू पड़ रहा है ?
पतझड़ तो नहीं !
सबेरे ये दिल इतना बैचेन क्यू है ?
कहीं महेबुब की खबर तो नहीं !

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