रत्ना पांडे, खंडवा (मध्य प्रदेश) की रहने वाली हैं तथा इस समय वडोदरा (गुजरात) में रह रही हैं। देश के विभिन्न कोनों से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र और पत्रिकाओं में इनकी 450 से अधिक कविताएं, लघु कथाएं तथा कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं। इनकी रचनाएँ मुख्यतः पारिवारिक संबंधों, नारी, देश-भक्ति तथा सामाजिक घटनाओं पर केंद्रित रहती हैं।

आप सभी को मजदूर दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। इस अवसर पर लिखी मेरी रचना श्रमिक पढ़िए:-

आप सभी को विश्व पुस्तक दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। इस अवसर पर पढ़िए मेरी रचना ज्ञान का भंडार -

पढ़िए मेरी रचना प्रकृति के सैनिकों का है वह सेनापति:-

मेरी रचना "रोको नफ़रत की आँधी" पढ़िए:-

अलग अलग रंग हैं, फिर भी एक नज़र आएं हम,
गगन के जैसा इंद्रधनुष, धरती पर भी बनाएं हम,
होली की लपटों में, भस्म करें मन के विकारों को,
इस पर्व की गरिमा को, मिलकर और बढ़ाएं हम ।।

-Ratna Pandey

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नोएडा में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्र शक्ति शिरोमणि पुरस्कार लेते हुए मेरा वीडियो देखिए

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मेरी कहानी "ख़ुद को हम सक्षम कर लें" इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ें -
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मेरी रचना जवाब दो पढ़िए

सुर साम्राज्ञी भारत रत्न लता मंगेशकर जी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।

तिरंगा ओढ़ कर चल दीं वह किसी और ठिकाने,
याद आते रहेंगे सदियों तक उनके गाए हुए गाने,
ढोलक, वीणा, तबला और हारमोनियम सब रुक गए,
बीत गए वह ज़माने, सूने हो गए संगीत के ठिकाने ।।

रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)

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आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।