Hey, I am Ritu worked as a RJ in All India Radio and interested in story writing and poetry so i uses Matrubharti app

जिन्दगी, रिश्ते, मोहब्बत, आरजू, ख्वाब,
फल तो ज़हरीले हैं, लेकिन जायका लाजवाब है।

वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है रितु...
उसे चुपके चुपके  तस्सली से पढ़ा करो
यूं ही बेसबब ना फिरा करो ।
मुझे इस्तेहार सी लगती है ये मुहोबत की कहानियां
जो कहा नहीं वो सुना करो जो सुना नहीं वो कहा  करो ।।

तुम्हे जिसने दिल से भुला दिया उस भूलने की दुआ करो
वो अब किसी और  का हो चुका इस बात से ना कोई गिला करो।।
वो वक़्त की खूबसूरत यादें जो अभी भी है  तुम्हारी और हमेशा रहेगी ये सोचकर ही तुम अपने दिल को तसल्ली दिया करो ।।
जो तुम्हारे नसीब में ही नहीं तो फिर क्या ग़म शायद इस खुदा ने कुछ और अच्छा लिखा है
ये सोचकर ही थोड़ा खुश हो लिया करो ।।

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सबका बस एक ही सवाल ये वर्ष आपका कैसा रहा ...
क्या बताएं उन्हें की हर वर्ष जैसा ही रहा बस एक बात जो सबसे अच्छी हुई की इसी वर्ष ख़ुदा ने मुझे अपने matrubharti के रूप में एक नए परिवार से आप सबसे मिलवाया जिससे मेरा ये वर्ष यादगार रह गया .....आप सबका दिल से शुक्रिया मुझे इतना प्यार, इतना अपनापन देने के लिए ..... happy new year to all my Matrubharti members
जवाब पूछने आए मुझसे खुद से भी एक सवाल कर ही लो
आसान रहा है कोनसा साल एक बार इसपर भी गौर कर ही लो
कुछ नए किस्से रहे ,कुछ नए ज़िन्दगी के हिस्से बने ,कुछ भलाई करके चले गए कुछ अधूरे ज़िन्दगी के हिस्से रहे

पर ये तो होना ही था ना किसी को खोना तो किसी को पाना ही था,जो आएगा वो एक दिन जरूर जाएगा ये ही तो समय का अफसाना था


सफ़र न कल रुका था ना आगे रुकेगा सबको चलना यूहीं है बस कोशिश यहीं की जब भी कुछ नया देखने को मिले तो घबराए नहीं क्यूंकि इस वर्ष हमने और कुछ सीखा ना सीखा बस दो चीज़े जरूर सीख ली एक ये की परेशानियां कभी भी आ सकती है बस जरूरत है हमे तैयार रहने की ओर दूसरी ये की इंसान कितना भी बड़ा और हवा में क्यों ना उड़ने लग जाए पर उससे भी बड़ा एक ओर बैठा है जो कब किस तरह से घरों में बेडिया लगा दे समझना मुश्किल है । तो बस हस्ते रहिए मुस्कुराते रहिए बीते समय को अलविदा और आने वाले साल का दिल खोल कर स्वागत करे 🙏💐💐💐💐

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किसी के घर जाओ तो अपनी आंखो को इतना काबू में रखो कि उसके "सत्कार" के अलावा उसकी "कमियां"ना दिखे और जब उसके घर से निकलो तो अपनी "जुबान"काबू में रखो ताकि उसके घर की "लाज" और "इज्ज़त" दोनों सलामत रहे..... रितु की कलम से✍️

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शायद जाते जाते इतनी रंगीन हुई है ये बताने, की चाहे पूरे दिन कितनी भी चुभी हूं लेकिन चुभती नहीं तो इस वक़्त का मोल समझ कैसे आता जो अभी मैं देख पा रही हूं आपकी आंखो में #रंगीन ढलती शाम .....रितु की कलम से✍️

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कुछ खामोशियां सिर्फ इसलिए चूपि साधे हुए है
की सही वक़्त आने के इंतज़ार को अपने मन में बांधे हुए है !!
बस हर पल को समेटे हुए है आंखो में इतनी गहनता से
जैसे कोई कसीदे के धागे बांधे हुए हैं
कुछ खामोशियां चूपि साधे हुए हैं!!
हर एक शब्द को संजोया हुआ है ऐसे ,
जैसे कोई भईयों में उधारी डाले हुए है
कुछ खामोशियां चुपि साधे हुए है

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दोस्तो ज़िन्दगी के सफ़र मे रितु शर्मा द्वारा लिखित उपन्यास का पहला भाग मातृभारती पर जरूर पढ़े और अपनी प्रतिक्रिया मुझ तक जरूर पहुंचाएं आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार रहेगा🙏🙏
https://www.matrubharti.com/book/19896506/jindagi-ke-safar-me-1

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ये जुल्फ़े तेरे चहरे की पहरेदारी बड़ी संजीदगी से करती है रितु .......
जब जब चहरे के दीदार के लिए झुकते है पूरे चहरे को अपने आगोश में ले लेती है !.... ✍️
#चौकसी

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जब आपकी सुबह घड़ी की अलार्म से नहीं बल्कि पंछियों के मधुर संगीत से होती  हो
जब आपकी आंखे  सोशल मीडिया के संदेशों से नहीं बल्कि सुरज की पहली किरण से होती हो और आपका दिन  मोबाइल पर अंगुलियों के घर्षण से नहीं बल्कि दीन दुखियों के सेवामे गुजरता हो और आपकी शाम किसी फाइव स्टार के होटल  की मशीन वाले  कॉफी से नहीं बल्कि चूल्हे की  अदरक वाली चाय से होती हो ओर जिसकी रात ए.सी. लगे आलीशान कमरे के अंदर नहीं बल्कि चांद की चांदनी से रोशन तारो कि चादर ओढ़कर होती हो तो यकीं मानिए आपने ज़िन्दगी और प्रकृति दोनो की खूबसूरती को जिया है  ..... रितु की कलम से ✍️

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