अहं ब्रह्मास्मि...

जीवित कविता का में मृत किरदार बन गया,
जब तेरी रूह से बिछड़, कहीं धुंध मे खो गया.

तमन्नाओं का सैलाब टूटा और चाहत भी ना रही,
तेरे दर से ठोकर खा, अजनबी दुनियां में खो गया.

मुकद्दर मुझसे ऐसा नाराज़ हो जाएगा मालूम ना था,
तेरी पनाह को छोड़ में, अंधेरे की गहराई में खो गया.

अब तो इंतजार रहेगा ए मौत आंखे बिछाए पल पल,
तेरी आगोश मे मेरा सुकून, इस बात मे मै खो गया.

#मृत

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तुमसे है मेरी हिम्मत, तुम्हीं से है मेरा हौसला,
साथ ना छोड़ना जब तक है इस जग में घौसला.

#हिम्मत

જિદ્દી બાળક...Rohit... લિખિત વાર્તા "સૂર્યોદય - એક નવી શરૂઆત... - ભાગ :- ૧૨ " માતૃભારતી પર ફ્રી માં વાંચો
https://www.matrubharti.com/book/19889596/suryoday-ek-navi-sharuaat-12

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