तुम भी उलझने पैदा करती हो
ना करीब रहती हो , ना दूर रहती हो और खुद को एक बहाना बताकर बस बार बार बस मै मजबूर हूं यही बात तुम कहती हो।

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मैं इतना लापरवाह क्यों हुआ?
की तेरी यादे मेरे जहन में अब भी बाकी है


#लापरवाह

मैं लापरवाह बहुत हूं इसलिए
अपने ख्यालों में तुम्हे आने देता हूं
#लापरवाह

ज्यादा शब्द मुझे आते नहीं है
इसलिए मौन से संबंध है मेरा पुराना

तुम्हारी तलब भी चाय की चुस्की की तरह बढ़ती जाती है।

एक बार आपने पूछा था कि मुखौटा क्या है ? आज बहुत साधारण शब्दों में को लोग आत्महत्या कर लेते है या करने की कोशिश करते है उनके दो चेहरे होते है बाहर से चेहरे पर हर दम खुश नजर आते है परन्तु भीतर बहुत खामोश , कहीं गुम , कुछ उदास , कुछ उलझे हुए , कुछ सहमे हुए , घबराए से , लाखो राज छिपाए हुए , बहुत से लोगो से अनजान बनकर रहते है वो जिनका किसी को कुछ नहीं पता ना पहले ओर ना ही बाद में बस अपने पीछे हजारों सवाल छोड़ जाते है ओर दुनिया को यह बता जाते है कि आपने अभी पूरी तैयारी नहीं को है।

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अभी अभी एक बात हुई
मैं दरवाजे पर जैसे ही आया
मेरी जिंदगी से मुलाकात हुई
लेकिन उन्होंने देखा नहीं मेरी
बस नजरे 2 से 4 हुई।

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आज मैने जिंदगी को कह दिया तुम रूठ जाओ
फिर पता है तुम्हे क्या हुआ ?
जिंदगी रूठ गई
इसलिए आज जिंदगी अंदर कैद है
और मै बाहर

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