Rohit... live in pune smart city...vivo pvt.ltd ...

तोड़ देगी अब वो दिल
और कह देगी मजबूर थे हम

बडे़ प्यार से हाथ मिलाया था उसने
फिर ये हाथ से अंघूटी निकली कैसे

आरजू सिर्फ तेरी है
तू चाहे फिर मिले या न मिले ....

तबियत पुछ कर आपने
मुसिबत ओर बढा दी है

ठोकर भी लगी उस पत्थर से
जिसे हम अपना खुदा मांनते थे ..

वरना स्भलना हम जानते थे ....

मोहब्बत का नुर पागलपन से है
समझदारियो से इश्क घटने लगता है ...

कीस कीस ख्याल को दिल से जुदा करू
मेरे हर ख्याल मे तुम हो ...

सिकायत सिर्फ दिल मेला करती है और कुछ नही ..