उन सभी पाठको की मै आभारी हूँ ,जो मेरी इच्छा की अभिव्यक्ति मे अपना सहयोग दे रहे है. इच्छा की कहानी मात्र कोरी कल्पना नही , यह किसी के जीवन से प्रभावित है, आप के आपके आस -पास भी कई इच्छायें होंगी .ऐसी ही एक इच्छा को मैने मंच तक लाने का सामार्थ्यानुसार प्रयास किया है. इसकी अभिव्यक्ति ही उसकी विशेषता है. हिन्दी के प्रति मेरी आपार श्रद्धा है, इसमे की गई त्रुटियाँ क्षमा योग्य नही ऐसा मेरा दृष्टिकोण है. फिर भी इसमे अनेक तृटियों के बावजूद , भावनाओं के प्रदर्शन की मौलिकता बनी रहे इसका पूरा प्रयास किया है

"अतीत के गर्भ मे छुपे कुछ भाव ,वर्तमान मे भी मन के किसी कोने मे जिन्दा रहकर ,भविष्य को अपनी परछाँई से भयभीत करते हैं|"
#ज़िंदा

Read More

"भावुकता की परछाँई से खुद का परिचय देना , वास्तव मे भीरूता की निशानी है, या स्वयं को इतना महान समझना कि बस, हम ही ज्ञानी है |"
#वास्तविक

Read More

"लोग कहते है दुःख सुख की पहचान कराता है हमे मजबूत करता है यह सत्य भी है ,किन्तु दुःख एक अनचाहा भाव है | इसे वह भी आमन्त्रित नही करता जो इसके महत्व को समझता है |"

Read More

एक कोरे कागज पर रखा एक बिन्दू ,
आसीमित शब्दो को समेटे ,

बड़े चतुराई से खामोश बैठा है|
लिए असीमित पीड़ा, मौन रहने की विवसता मे |

असीमित अानन्द की अभिव्यक्ति है ,
जो हृदय को चीरकर निकला है ,

न जाने किसको खोजने | हजारो आँसुओ की बूंद को सुखाकर बना है मानो यह |

या मानो आशाओ के दीपक पर,
अश्रु की एक बूंद पड़ने से प्रकाश के ,
कण का छिटकना हो |

या फिर विवशता के कमरे की,
एक झिरी से झाँकती एक आँख हो |

अथवा संकेत दे रही हो अपने जीवित होने का,
प्रतीक्षा की औषधि से पोषित होते हुए |

ऐसा लगता है कि किसी को मिटाने का संदेश है यह ,
या फिर खुद की समाप्ति का आगज़|

Read More

सीधे रास्तो पर टेढी-मेढ़ी चलती जिंदगी ,
वक्त के पीछे चलती असहाय, बराबरी की शिकायत करते|

उदासीन , प्रभावहीन कभी रूक कर सुसताती , तो
कभी टाल मटोल करती , जिन्दगी जाने कितना पछताती,

कभी जोश मे भर खुद को ऊर्जावान बताती ,तो कभी हताश , निरास असफलता के किसी कोने मे बैठ खुद का ही मातम मनाती जाती |

कभी आसमान की ऊँचाईयो तक कल्पना की उड़ान भरती ,तो कभी बीज बन आशाओं के बगीचे मे विकास के सुगन्धित पुष्प चुनती |
#टेढ़ा -मेढ़ा

Read More

हे मन! मै उनकी शरण मे हूँ ,
जिन्होने अखण्ड ब्रम्हाण्ड की रचना करने वाले
भगवान श्री ब्रम्हा ,श्रृष्टि के समस्त कार्यो का वहन , नियंत्रण करने वाले श्री भगवान विष्णु एवं ,
असंतुलित अवस्था को प्राप्त होने पर विनाश कर पुनः
निर्माण के लिए प्रेरित करने वाले भगवान शंकर को बनाया है |

हे मन ! मै उनकी शरण मे हूँ जो सर्वव्यापी है , एकमात्र दृष्टा है , जो भावों से परे है , जिनका स्वभाव केवल करूणा है, जिनका न आदि है न अन्त जिन्हे जानने के लिए कोई मार्ग, कोई साधन पर्याप्त नही |

हे मन ! मै इनकी शरण मे हूँ जिन्हे करोड़ो वर्षो की तपस्या से भी नही जाना जा सकता और जो क्षणमात्र मे प्रकट हो जाते है | इनको जानना केवल इनकी कृपा है | जो परमब्रम्ह है , जिन्हे जानने के बाद कुछ भी जानना शेष नही रहता , ऐसा मैने परम्परागत ऋषि मुनियोंऔर विद्वानो द्वारा सुना है|

हे मन! अब तू संशय का त्याग कर ,
स्वयं की उत्पत्ति का उद्देश्य समझ इस क्षणभंगुर शरीर को इसी ब्रम्ह की सत्ता मे स्वयं को समर्पित कर दे , क्योकि अन्य विकल्प तेरे पास शेष नही , इस शरीर के मोह को त्यागने के प्रयास मे सफल होना ही , ध्यान और साधना है|

श्री गुरूवे नमः 🙏नमः शिवाय 🙏, नमो भगवते वासुदेवाय 🙏अओम् परमात्मने नम:🙏
#झेन

Read More

"प्रश्नो से कभी घबराना नही चाहिए ,प्रश्न हमे मजबूत और ऊर्जावान करते है| यह दिमाग के लिए ऐसा ही है,
जैसा पौधो मे पानी डालना|"

जीवन का एक छोटा सा अनुभव

Read More

"अानन्द और सुख मनुष्य दोनो को समान समझता है |
किन्तु दोनो अलग है , सुख से आनन्द नही प्राप्त किया जा सकता किन्तु आनन्द से सुख पाया जा सकता है|
जो केवल ध्यान द्वारा ही सम्भव है, ऐसी ज्ञानीजनो का कहना है|"

#झेन =ध्यान

Read More

"महकी है घर की बगीया ,
फूलों के खिल जाने से |

घर का आंगन है चहका ,
बिटिया के घर मे आने से |

मन उत्साही नन्हे कदमो पर ,
ढेरो ख़्वाब सँजोने से |

दुबक रहा घर का सन्नाटा ,
बिटिया के हँसने रोने से |
#उत्साही

Read More

बिना स्वयं के विकास के ही हम शिक्षित हो रहे है आज के परिवेश मे शिक्षा क्या है? मूल मे जाकर देखा जाये तो केवल बाहरी चीजो पर शोध , उन शोधो द्वारा निर्माण, उसी निर्माण को समझ फिर उसी पर शोध फिर कोई नई चीज समझ आती है अविष्कार सम्बोधन मे यह निरन्तरता बनी रहती है | हम केमिकल की शोध दिन-रात कर रहे है शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ,और उसके साकारात्मक और नाकारात्मक परिणाम के बीच अपना सारा जीवन समाप्त कर देते है | जिस शरीर के लिए यह परपंच है उस शरीर को कौन समझ सका है ? विज्ञान का कहना हम समझ चुके है, इसी के आधार पर खोज की जा रही है , मै कहती हूँ यदि आप जान गये है तो ,दवाइयाँ बनाने के पश्चात जानवरो पर इसका इस्तेमाल क्यों करते है सीधा मनुष्यो को क्यो नही दे दी जाती ,यही बात विज्ञान की पोल खोल रहा है |शरीर क्या है , शरीर कैसे काम करता है ,इसे कौन चलाता है , और आखीर मे यह शरीर निष्क्रिय प्राणहीन क्यों हो जाता है | कभी इस पर विज्ञान ने शोध नही किया , कभी इसको शिक्षा का माध्यम नही बनाया गया | विज्ञान की तो क्षुद्रता उसे ऐसा करने से रोकती है , विज्ञान स्वयं मे अपूर्ण है वह ज्ञान की बराबरी कैसे कर सकता है | विज्ञान केवल वि पर चलता है अर्थात विषय ज्ञान जबकि ज्ञान असीमित, अनन्त,उन्नत स्वयं मे पूर्ण है खैर, हम तो यहाँ शिक्षा की बात करने चले थे , आज की शिक्षा प्रणाली केवल विषयो का ज्ञान दे रहा है , और विषयो का ज्ञान हमे विषयों की तरफ ही ले जा रहा है , जो असहनशीलता, मानसिक कमजोरी जो शारीरिक पतन का भी कारण बनती जा रही है | हमारी पीढ़ी शिक्षित तो हो रही है किन्तु स्वयं से अपरचित ज्ञान से दूर यह मानव मात्र के विनाश का सूचक है यदि हम अभी से सचेत न हुए तो वह दिन दूर नही की इस धरती पर मानवी आकृति मे भावहीन केवल मशीन ही रह जायेगी जो पशु ,पक्षियों, जीव , जन्तुओं से बद्तर होगी , इसका कारण उनमे आनन्द ही समाप्त हो जायेगा | इसकी भयावहता की हम मात्र कल्पना ही कर सकते है | समय रहते यदि हमे स्वयं को इस स्थिति से बचाना है तो हमे पुरातन शिक्षा प्रणाली को वर्तमान शिक्षा प्रणाली मे स्थान देना होगा , नई शोध, नये अविष्कार के साथ अध्यात्मिक उन्नति ही हमारी पीढ़ी को इस स्थिति मे पहुँचने से बचा सकती है |

Read More