संगठन मंत्री अखण्ड पत्रकार वेलफेयर एसोसियेशन उत्तर प्रदेश एवं संपादक सावन साहिल मासिक पत्रिका, न्यूज सावन साहिल वेव पोर्टल व लाइव टीवी चैनल |

निकली हूँ घर से कहीं जाना है , नही दर पता है न ठिकाना है ||

-Ruchi Dixit

जिसमे भय स्थित हो वह निर्भय कैसे हो सकता , जीवन केवल उसका एक छल, कैसे किसका बल हो सकता |

-Ruchi Dixit

जो स्वंय के प्रति ईमानदार नही वह जीवन मे किसी के प्रति ईमानदार नही | स्वंय का स्वंय मे ही मूल्यांकन करे |

-Ruchi Dixit

Read More

जो पहले से ही जा चुका , उसके होने का भ्रम और रोकने का प्रयास केवल जख्म कुरेदने के अतिरिक्त कुछ नही, उन जख्मो को प्रकृति पर छोड़ना ही बेहतर |
साकारात्मता की पहल |
-Ruchi Dixit

Read More

मै जानती थोड़ा कठिन पर न असंभव बात है, कर रही तुझको स्वतंत्र मै अपने हर विचार से | न रही तेरी वजह तो वजह न चाहिए, जा तू पा ले रंग जीवन मे तुझे जो चाहिये |
मन रहा किसका सगा , विश्वास दे हरदम ठगा , यह सत्य अब स्वीकार कर चल रही एक राह पर |

-Ruchi Dixit

Read More

नाता तो केवल तुमसे था, है अब , बाकी सारे स्वारथ से भरे , भरी लालसा उनमे , तोड़ रही वह सब , छोड़ रही वह सब नाते ,जो वक्त आने पर रंग बदले , जो वक्त आने पर संग बदले , अच्छा है तुम दिखते जो नही , जो दिखते दुःख का कारण है , फिर लौट रही हूँ भावो मे , जीवन भर जो संबध रचे , बस उनको अब बिसरा देना , बिसरा कर जो आगे हैं बढ़े |

-Ruchi Dixit

Read More

हूँ एक प्रयास के पथ पर,
हूँ एक विचार के रथ पर ,थोड़ा सा घोड़ा निर्बल है , चलकर आया है एक दिशा , सुस्ता के उठेगा फिर से , विश्वास भर रही हूँ अब | मोड़ रही हूँ उसको , पथ जोड़ रही हूँ उसको |....

-Ruchi Dixit

Read More

कविता नही तू कर्म है मनभावना का मर्म है ,
दे सके पहचान जो तू ले सके पहचान वो |...

-Ruchi Dixit

जाने तुझे कैसे कोई माने तुझे कैसे कोई , दुत्कार सब लाचार है , मुर्दों का यह संसार है , जिन्दा बचे दो चार है सपनो का यह संसार है | जागा नही सब सो रहे ,भागा नही खो रहे , सब लिप्त व्यभिचार है , हर ओर अंधकार है |

-Ruchi Dixit

Read More

तू जो भी है संकेत दे ! सानिध्य दे या मेट दे !!
आया हुआ तू देह मे छाया हुआ तू गेह मे , तू क्यों कहे है वासना मै कर रही हूँ वासना , आसक्ति न छलदम्भ है , यह प्रेम क्या पाखण्ड है ? पहले भी था तू अब ही क्या ? जो दिख रहा वह सब ही क्या ? आने मे थी न शर्त तो जाने की कर्ता शर्त क्यों ? भूला है अपनी भावना , पाने को पावन , पावना | तू प्रेम का आधार था मनभावना का सार था | क्या है तू अब यह जान ले क्या था उसे पहचान ले |

-Ruchi Dixit

Read More