मैं, संध्या राठौर - इंजीनियर , एक माँ , बेटी , बहन , सखी -इतने सारे किरदार और इन सब के बीच एक और किरदार -लेखिका ..... सपने देखने का शौक - कुछ पुरे हुए भी - कुछ नहीं भी। लेखन में रूचि बचपन से ही थी। उम्र के साथ साथ , ज़िन्दगी के बहुत सारे चेहरे देखे- कुछ अच्छे तो कुछ बुरे… बस जो कभी जुबां कह न पाई , कलम ने कह दिया - और बड़े ही पुरज़ोर ढंग से कहा। कवि ह्रदय था - काँच की तरह था - बड़े सारे दरक पड़े इसमें - फिर भी संजो के रखा। मेरी रचनाये, अपने समाज में इर्द गिर्द घट रही घटनाएँ का वर्णन मात्र है

चाय?
कितनी किस्में
जानती हूं मैं ?
सुनो-
मैंने पी है
लारी वाली
स्टेशन वाली चाय
भूटान जापान की
नमक और मक्खन
वाली चाय!

बड़े लोगो संग
पी है
काली चाय
लेमनग्रास वाली चाय
दार्जलिंग की खास
लाख रुपए में
बिकने वाली चाय

मगर सच कहूं
सिर्फ तेरी कड़क
दूध वाली चाय
में इश्क़ का नशा है

#मैं_ज़िन्दगी

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इस चाय
और चाय के कप को
भला किसने
बताया होगा
कि इश्क़ के मौसम
में भी पतझड़ हुआ करते है ??

बहरहाल
जो हो ...

...
मगर तो
इश्क़ से इश्क़ है!!

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चिड़ियों और
बुलबुलों की तादाद
मछलियों से
क्या ज्यादा होगी ?

यह तय करने के लिए
मैंने
चील और बगुलों की
गोष्ठी बुलाई है !!

#बसयूंहीं

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कितने झूठ
बोले है मैंने
ये कहकर
कि मैं कभी
झूठ नहीं बोलती !!

#मैं_ज़िन्दगी

तुम्हारी अधजली
सिगरेट के स्टब
सहेज के रखना चाहा था
हमेशा !

क्या... तुमने सोचा कभी,
लिपस्टिक के दाग लिए
मेरे चाय के कप
सहेजते कभी !

नहीं ना !!

हाहाहाहाहा ...

जानती थी !!
#मैं_ज़िन्दगी

@saanjh_savere

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तुम्हारा प्यार
अधूरा ही
अच्छा लगता है
क्यूंकि
लिख सकती हूं
अनगिनत कविता
कहानियां और किस्से
अलग अलग रंग
और मोड़ देकर

अनंत बार
उन्हीं पलों को
जी लेती हूं तुम्हें
नवालिकाओं में
मनचाहा मोड़ देकर
सुखद अंत दे
और तुम
हमेशा मेरे होते हो

अधूरा है
शायद इसलिए
पूरा है मेरा प्यार !

#मैं_ज़िन्दगी

@saanjh_savere

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पता है तुम्हारी bullet कितनी पसंद है मुझे
आज बरबस ही याद आए हो तुम ...
कैसे ?
खुद ही देख लो मेरा इश्क़ चाय और तुम्हारा बुलेट ....

ऐसे इश्क़ का तो
बस एक घूंट ही काफी है !!

@saanjh_savere(Twitter)

#मैं_ज़िन्दगी

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दूर रहकर ही करीब आने दो
पास रहकर तो रिश्तों में दरार आती है

#मैं_ज़िन्दगी

~संध्या राठौर

यादें यादें न हुई गोया प्याज़ हो गई 

परते खुलती गई ,आँखे जलती गई

#मैं_ज़िन्दगी
~संध्या राठौर