Any time, any person, equation will be change.

બંગાળ માટે સિદ્ધાંતવાદ ને ખીતી પર ટીંગાળો તો સારું છે,
શાંતિપ્રિય ધર્મ માટે ગાંધી વાદ મુકો તો સારું છે,
ખબર છે ધીરજ ના ફળ મીઠા હોય પણ બંગાળ ને કશ્મીર બનતા રોકો તોય સારું છે,
છે દવા હિંસા ની બહુ ધારદાર થોડા સૂકા વાંહે લીલું બળશે તોય સારું છે,
હશે જો એક ચિંગારી મનમાં તો ઉડાવી દો બંગાળ માં મ્યાન ને તોય સારું છે,
કરેલ કામ ને એકવાર બંગાળ માં ૨૦૦૨ જેવું કરી દો તોય સારું છે,

Read More

આભ અકબંધ કરી સબંધ નીચે બરાબર કર્યો,છેલ્લે ઉપર ના હિસાબ માં સરવાળો સુન્ય કર્યો.

सप्तरंगी मेघधनुश की तरह हर रंग लिपटा जाए ।
प्यार ही हे मेघधनुश जिसका आरम्भ-अंत अनंत हे ॥

यूँही हम जकड़े हुए थे मन से ।
दिल ने दरवाज़े खोल दिए ॥

यूँही बेपरवाह बन गये थे गुस्ताखी से ।
अपने पन का जो बोज समज बेठे थे ॥

हर लम्हा निकलता हे किसी बहाने से ।
चहेरा हे जो मुस्कान देता हे हर लम्हे पे ॥

~प्रक्रुती की ख़ुश्बू

Read More

कुछ नही बस । बस वहासे बातें बतानेकी सुरुआत हे ॥
कुछ नही बस । वहासे ज़िंदगी का रास्ता मोड़ लेता हे ॥
कुछ नही बस । वहा ही ज़िंदगी की सुरुआत ओर ख़त्म ॥
कुछ नही बस । वही हे जो दिलो में घाव भर जाते हे ॥
कुछ नही बस । वही हे जो घाव पे मरहम भी दे जाता हे ॥

Read More

मन निराश हे फिर भी दिल खुश हे।
वक्त का आलम देखो दोनो अपनेपन में मस्त हे॥

~प्रक्रुती की ख़ुश्बू

हमें सरल प्रहलाद समजकर
सतत तर्जना जो देते हैं ।
नित्य हमारी
मृदु रुजता पर
हंस हंस कर
जो रस लेते हैं ।

खंम्भे से फट पड़े
नृसिह से अब,
महदैत्य चीत्कार करेगा ॥

Read More

रखी थी हमने दोर कच्चे धागे की रिस्ते में ।
उसने गाँठ एसी लगायी हमें क्या पता ॥

वोतो रिस्ता हम यूँही निभाते रहे ।
उसने रिस्ता-ए-महोबत बना दिया ॥

~ प्रक्रुती की ख़ुश्बू

Read More

पड़छाई से गुमराह मत होना ।
वो आसमाँन छूने की तयारीमें हो
ओर हम फ़ुरसत में बेठा समजे ॥