kuchh na kuchh likhte rahna hi dimag ko fresh rakhta hai .

मैं श्रेष्ठ हुँ ये अभिमान है
मैं ही श्रेष्ठ हुँ ये अहंकार है...

इज़्ज़त इनसान की नहीं पैसे की होती है
पैसा ख़तम तो इज़्ज़त ख़तम.

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अब तो एक ही मकसद है ज़िन्दगी का
जब तक ज़िंदा हुँ अपनी असलियत दुनिया से
छुपा के रखना, और दुनिया से अलबिदा कहते वक़्त
सब को सच बता के जाना.😃😃🤔

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patanahin insan ko akal thokar khane ke
baad hi kyoun ata hay

waqt sab kuchh sikha deta hay
kisi ke sath jeena aur kisi ke baad jeena..

पूरी ज़िन्दगी इसी सोच मैं गुज़र जाती हे के
हम सही कब थे और गलत कब थे.

तुम भी गर्दन उठा कर जी सकते हो दुनिया मैं
बस एक दिन मोबाइल घर पे भूल आना. 😂😂

#ज्योतिष

ज्योतष से बढ़कर मनोचिकिस्तक कोई और नहीं होता
हमारी भविष्य जान ने की आतुरता को भांप लेते हैं
और हमको कुछ झूठी उमीदें दिखा ते हैं.

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#भार

पश्चाताप का बोझ मन को भारी कर देता है.

#भार

एक सादी सुदा लड़की की उपर मायका और ससुराल
के बीच सही ताल मेल का भार रहता हे.

#भार

माता पिता के कन्धों पर संतान की सही परवरिश
का भार रहता हे.