kuchh na kuchh likhte rahna hi dimag ko fresh rakhta hai .

#मारना

मारने के लिए औज़ार की ज़रूरत नहीं
अगर किसी के पास तीखा जुबान हो,
और सम्बेदनहीन भाबना हो तो आसानी से
किसी को भी गहरा जख्म दे सकता हे.

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#मारना


अपने भीतर छुपा अबगुण , इर्षा, खराप नियत
जैसी गंदी सोच रूपी असुर को मरना हे तो
भगवान की शरण मैं जाओ.


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#मारना

किसी की जान ले ना तो आसान है
किसी को ज़िन्दगी देना मुश्किल

#मारना

मारना, रक्षा करना सब उपर वाले के हात मैं.

#कर्मा

पिछला जनम, अगला जनम कुछ नहीं होता
जैसा कर्म इसी जनम मैं करोगे
उसका फल इसी जनम मैं ही भोग के जाना है.

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#कर्मा

समय के अनुसार सब को अपना अपना
कर्मा भोग ना होगा.

#उपहास


उपहास तो उपर वाले करते हैं कभी कभी
गम से निकाह करा के, खुशि से तलाक दिलवाकर..

कौन कहता हे फूल, पत्ते के जज्वात नहीं होते हैं
सुबह को उनके उपर गिरी ओस की बूँद को तो
हम आँशु कहते हैं.

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#उपहास

उपहास की कड़ी जहर को चुप चाप पी जाओ
तिरस्कार की हला हल बिष पान कर नीलकंठ बन जाओ
आज वक़्त उनका हे, बोल ने दो, सह जाओ
कल दौर तुम्हारा आएगा बस भगवान पे आस्था रख
कर्म भूमि मैं उतर जाओ.

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#उपहास

अपने प्यार को इतना सस्ता मत बनाओ
के सब मज़ाक उडाने लगे, प्यार करते हो
तो अंत तक निभा ने का भी सामर्थ्य रखो.

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