कल्पना की किताब पर ख़्यालों की क़लम से न जाने क्या क्या उकेरते रहते है, असलियत के धरातल पर आते ही किताब के सफ़्हे साफ पाते है। शायद कुछ पगले से है हम ।।

कमाल- excellent, बे-मिसाल- incomparable, जमाल- beauty, ग़ज़ाल- deer, मुहाल- difficult

(अश्क - tears, नहाना - bath, लरज़ते - waver, काँपते - shiver, ग़म - sorrow, आशना - acquainted, आसरा - shelter, ख़फ़ा - angry)

आज कल ये ग़ज़ब ही ज़माना आया है 'सन्तोष'
फ़क़त झूठ के पैकर में ही, सच्चाई ज़िंदा रहती है
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-सन्तोष दौनेरिया

(ग़ज़ब - अँधेर, फ़क़त - सिर्फ, पैकर - देह या शरीर)




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दिल की बात सुनो
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आओ ग़ज़ल एक सुहानी सुनो
मेरे दिल की सारी कहानी सुनो

साथ बैठो जरा पल दो पल को
फ़रियाद मेरी,दिलबरजानी सुनो

परियों से हसीं बस एक तुम हो
बाबत हुस्न के सच बयानी सुनो

एक राधा थी और एक थे मोहन
ये कहानी तुम मेरी ज़ुबानी सुनो
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-सन्तोष दौनेरिया

(बाबत - संबंध, बयानी - विवरण, ज़ुबानी - मुंह से उच्चारण, फ़रियाद - अपील, दिलबरजानी - प्रेमी)


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यूँ ही नहीं मैं लँगड़े पर फ़िदा हूं
देखो ये आम भी बेहद ख़ास है
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-सन्तोष दौनेरिया


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(मानिंद - समान या जैसे)

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शब-ओ-रोज़ - day and night,
ज़हर-ए-ग़म-ए-ज़ीस्त - poison of sorrow of life



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