कल्पना की किताब पर ख़्यालों की क़लम से न जाने क्या क्या उकेरते रहते है, असलियत के धरातल पर आते ही किताब के सफ़्हे साफ पाते है। शायद कुछ पगले से है हम ।।

मुझे आज़माना छोड़ दो
तुम दिल दुखाना छोड़ दो

ये दूरी अच्छी नहीं जानाँ
तुम दूर जाना छोड़ दो
-------------
-सन्तोष दौनेरिया

Read More

रुख़ से नक़ाब हटा जानाँ
चेहरा जरा दिखा जानाँ

फ़ना होने की हसरत है
नज़रें जरा मिला जानाँ
----------------
-सन्तोष दौनेरिया

Read More

बात जब उनकी आती है, ज़बाँ मेरी ख़ामोश हो जाती है
ख़्वाब आँखों में आते हैं और नज़र मदहोश हो जाती है
------------------
-सन्तोष दौनेरिया



.

Read More

मेंहदी लगाने भर का ख़्याल उनको जो आया
खिल उठा रंग-ए-हिना हाथों में लगने से पहले
---------------------
-सन्तोष दौनेरिया



.

Read More

इस बज़्म में हैं सुख़नवर बहुत ही अच्छे
मगर आपकी तो कुछ अलग ही बात है

मैं आपकी क़लम की क्या तारीफ़ करूं
क़लम के हर लफ़्ज़ रूह-ए-कायनात हैं
---------------------
-सन्तोष दौनेरिया


(बज़्म - सभा, सुख़नवर - कवि, लफ़्ज़ - शब्द, रूह-ए-कायनात - संसार की आत्मा)




.

Read More

हसीं चेहरे पे कमाल आँखें
आपकी ये बेमिसाल आँखें

ख़ुदा बचाए मस्त आँखें से
करेंगी जीना मुहाल आँखें
---------------------
-सन्तोष दौनेरिया



.

Read More

इश्क़ क्या चीज है, यारा बता क्या कहें
हसीं बला कहें या ख़ूबसूरत ख़ता कहें

अपनी - अपनी सभी की समझ है यार
कुछ लोग अच्छा तो कुछ इसे बुरा कहें

सुन के अन सुना करते हैं दिल की बात
अब उनको बेवफ़ा कहें या बावफ़ा कहें

झूमते है हम उनकी नज़र से मय पीकर
इन आंखों को अच्छा कहें कि बुरा कहें

---------------------
-सन्तोष दौनेरिया



.

Read More

बात प्यार की
-------------

ये रुत हसीं ये दिल जवाँ,
कही भी बात प्यार की,
आपने सुनी नहीं मगर,
ये बात मेरे प्यार की।

रही बद-नशीबी बहुत,
जो सुनी नहीं मेरी सदा,
ये बात मेरे प्यार की।

बुझी बुझी सी हर गली,
बुझी है राह प्यार की,

आ भी जा इस तरफ़,
खिले कली बहार की।

कही थी बात प्यार की,
आपने सुनी नहीं मगर,
ये बात मेरे प्यार की।

चुप्पियों के लफ़्ज से,
कही थी बात प्यार की,
तुम्हें मगर फ़ु'र्सतें कहां,
सुनते जो बात प्यार की।

कही थी बात प्यार की,
सुनी नहीं मगर मेरी,
बात मेरे प्यार की।
---------------------
-सन्तोष दौनेरिया



.

Read More

शरद पूर्णिमा
----------------

रात आसमाँ का चाँद देखा तो मालूम हुआ
ज़मीन का चाँद तो कहीं ज़्यादा हसीन है

---------------------
-सन्तोष दौनेरिया


.

Read More

इत्तिफ़ाक़न ही एक इत्तिफ़ाक़ हो गया
इत्तिफ़ाक़ से वो मेरे नज़दीक आ गया
---------------------
-सन्तोष दौनेरिया