zinadgi khak na thi... khak udaate gujri....

दिलों की इमारतों में बंदगी का नामोंनिशान नही..
औऱ ईंटों के मन्दिर मस्ज़िदों में ख़ुदा ढूंढ़ते हैं लोग..

हमें पूछो क्या होता है..
बिना दिल के जिए जाना..
बहुत आयी गयी यादें..
मग़र इस बार तुम ही आना...

तुझे भुलाने की कोशिशें भले कितनी भी हो...
मग़र तुम याद बनकर आते रहना,
रुलाते रहना..

दूसरों के वास्ते तू सदैवे है जिया,
माँगा कुछ कभी नहीं तूने सिर्फ है दिया,
तेरे नाम की जोत ने सारा हर लिया तमस मेरा.
भोलेनाथ शंकरा..
हे शिवाय शंकरा..

Read More

पुरानी मंजिलों का शौक अब है किसको,
अब है नई मंजिले जिसका है दिल को अरमान..
बना लेना नई मंजिल तो है नहीं मुश्किल
मगर नए रास्ते बनाने में अभी कुछ दिन लगेंगे..

Read More

हां माना कि दिलों में बसी है बेबसी,
चलो ये भी माना कि अपनों से बेहतर है अजनबी..
यहाँ रास्ते दुस्वार हैं और मंजिले उस पार हैं..
फिर भी ऐ-ज़िन्दगी तुझे ज़ीने को दिल तैयार है..

Read More

कुछ भावनाएं जो लफ्जों में बयां नहीं हो सकती.
उन्हें कागजों में बिखेरने की कोशिश करती हूं.
वो उदासी जो मेरी हंसी से छलक जाती है..
उन्हें इन अल्फाजों में समेटने की कोशिश करती हूं..

Read More

चन्द दिनों में जो भूल जाये,
वो यादें ही क्या..
बार बार ना आये जिनमे ज़िक्र यार का,
वो बातें ही क्या...

तुम ज़िन्दगी में शामिल ना भी हो, तो क्या फर्क है..
इश्क़ बेपनाह तो था ही, अब बेपरवाह भी हो गया..

पिरोकर कुछ लफ्ज़ों में मन का शोर,
शायरी में अपनी ख़ामोशी लिखती हूँ..
कुछ अनकहे दर्द, कुछ अनदेखी खुशियां,
ख़्वाहिशें जो दिल में नाकाम रखती हूं..

Read More