zinadgi khak na thi... khak udaate gujri....

ख़ाली ख़ाली सी है रातें,
ख़ाली ख़ाली सा है मन..
कुछ सिमटे सिमटे से तुम मुझमे,
कुछ बिखरे बिखरे से हम..
साख साख से लिपटी लतिका से,
यूँ सांसो से जुड़े मुझमें तुम..
किसी मिट्टी में धूमिल होते,
सूखे सूखे से पात हम..
तेरी ही यादों में उलझे से,
कोई अनसुलझी सी बात हम
खाली खाली है ये राते,
कुछ खाली खाली सा है मन..

-Sarita Sharma

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कुछ मिट्टी तेरे आँगन की,
एक चाक मेरे घर का..
चल मिलकर बनाते हैं,
एक दिया प्रेम का,
फिर प्रेम प्रकाशित होगा जग में..
नभ में नई रोशनी बिखरेगी.
फिर सपनो की धरती पर,
वो नया आशियां बुनेगी..
हर मन होगा प्रकाशित,
घर आँगन होगी खुशहाली..
चलो मिलकर बनाये हम तुम..
ये दीवाली दिल-वाली...💞
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं..🙏

-Sarita Sharma

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अच्छे वक़्तों की तम्मना में रही उम्र-ए-रवां,
वक़्त ऐसा था के बस नाज़ उठाते गुजरी..
ज़िन्दगी ख़ाक ना थी, ख़ाक उड़ाते गुज़री..

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इन निग़ाहों को सिर्फ तेरी तलाश क्यों है,
जब मुमकिन नहीं तुझे पाना,
तो ये झूठी आस क्यों है..
ना रिश्ता कोई बाक़ी है जब दरम्यां हमारे,
फिर भी इस दिल में तेरा ही एहसास क्यों है..

-Sarita Sharma

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अब नहीं होता इंतज़ार क़यामत का रोज़ रोज़..
किसी रोज़ क़यामत को गले लगाने को जी चाहता है..
यूँ धुंआं बन हवाओं में उड़ जाने को जी चाहता है..

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शिव कैलाशों के वासी,
धौलीधारों के राजा..
शंकर संकट हरना..
तेरे कैलाशों का अंत ना पाया,
अंत बेअंत तेरी माया..
शंकर संकट हरना...
जय भोलेनाथ...🙏

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करवटें बदलते, तेरे इतंज़ार में गुज़री,
क्या कहें ज़िन्दगी किस हाल में गुज़री..
बेहिसाब कोशिशें रही तुझे भूलने की दिनभर,
फिर भी हर रात तेरे ही ख़्याल में गुज़री..

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Sarita Sharma लिखित कहानी "ज़िन्दगी सतरंग.. - 2" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19899443/jindagi-satrang-2

दिल भारी है आज
जी भर के रोने दो..
जागे हैं देर तक,
हमें कुछ देर सोने दो..
आधे अधूरे ख्वाब जो,
पूरे न हो सके..
एक बार फिर से नींद में,
वो ख्वाब बोने दो..

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मेरी बेबसी है तुम्हें मुझसे यूँ दूर जाते हुए देखना..
रिस्ते जो टूट चुके हों वो फिर कहां जुड़ते हैं, मेरे यार चाहने से..

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