zinadgi khak na thi... khak udaate gujri....

बादल जब बरसते थे, तो आँगन में खुशी से नाचते,
तब क्या डर कपड़े गन्दे होने या भीग जाने का..
सर्दी भी लगती है , ये किसे पता था..
हां भीगने पर तबियत खराब तो तब भी होती थी..
पर माँ की गोद में सो जाने से सब ठीक हो जाता..
बचपन का वो लड़ झगड़ कर एक हो जाना..
यूँ रूठना मनाना फिर बेफ़िक्र हो जाना..
एक सिक्का हाथ में लेकर अमीरों सी खुशी,
तो केवल बचपन में थी..
सब पास होकर भी नाख़ुश से रहना तो अब सीखे है,
छोटी छोटी खुशियों में भी खिलखिलाकर हँसना,
तो केवल बचपन में था..
दिखावे की ज़िंदगी जीना तो अब सीखे है..

Read More

सीपियों की ओट में,
मोतियाँ हो जिस तरह..
मेरे मन में शंकरा,
तू बसा है उस तरह..
जय शिवाय शंकरा..
रुद्रदेव हे महेश्वराय..🙏

Read More

हां ये नहीं कहती कि ज़िन्दगी बेहतर नहीं,
पर तुम होते तो बेहतरीन होती ..
ये भी नहीं कहती कि हंसती नहीं अब..
पर तुम होते तो ज़िन्दगी हसीन होती..

Read More

कुछ ख़्वाब जो अब छोड़ दिये मैंने,
कुछ हकीकत को अपना लिया..
कुछ आदतें जो अब नहीं रही,
कुछ जरूरतें जो पूरा करती हूं..
कुछ मनमर्जियां जो अब नहीं करती,
कुछ ज़िम्मेदारियां जो निभाना सीख लिया..
कुछ अपनो की अपनी ना हो सकी,
तो कुछ गैरों को अपना लिया..
एक ज़िन्दगी जो जीनी छोड़ दी मैंने,
एक उम्र जिसे गुजार दिया..

Read More

हाय, मातृभारती पर मेरी कहानी 'ममता की छाँव - 2' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19877607/mamta-ki-chhav-2

-- Sarita Sharma

https://www.matrubharti.com/bites/111322651

हाय, मातृभारती पर मेरी कहानी 'ममता की छाँव - 2' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19877607/mamta-ki-chhav-2

कैसी कश्मकश है इश्क़ में भी दिलों की..
कोई इनकार के डर से ख़ामोश है..
तो कोई इज़हार के इंतजार में ख़ामोश है..

यूं जान जान कहकर, इश्क़ की नुमाइश ना कर..
बस इतना सा कह दे, मेरा सारा ज़हान तुम हो..

बातों में तो शायद झलक जाए इश्क़ पर..
जो इन ख़ामोशियों में इश्क़ है,
वो लफ़्ज़ों में कहां..

अब धुंधली पड़ चुकी है, तेरे ख्यालों की तस्वीरें..
इन तस्वीरो में फिर रंग भरने को जी चाहता है..
एक ज़िन्दगी जो तेरे साथ मुक़म्मल नहीं हो सकती..
फिर भी तेरे साथ जीने को जी चाहता है..

Read More