मैं एक प्राइमरी अध्यापिका हूं l मैं दिल्ली में रहती हूंl शुरू से ही पढ़ने, पढ़ाने में मेरी रूचि रही है l अपने मन के भावों को कविता, कहानी का रूप देने का यह मेरा छोटा सा प्रयास हैl आप सभी मेरी रचनाओं को पढ़ मेरा मार्गदर्शन करें, जिससे मेरी लेखनी को सही दिशा मिल सकेl

जिंदगी की तपती रेत पर
कुछ बूंदे तेरे प्यार की बरस जाए
भीगकर उसमें, हां मेरी रूह को करार आए।।
सरोज ✍️

-Saroj Prajapati

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दिन भर की थकान
रात के आगोश में जाते ही मिट जाती हैं
वह रात ही तो है
जो मां की तरह भरकर
अपने अंक में
मीठी नींद सुलाती है।

-Saroj Prajapati

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कविता#नवरात्रि
मैंने श्रद्धा की जोत जलाई
तेरे द्वारे पर मैं चली आई
अब तो दर्श दिखा दे अंबे मां।
हम तेरे बालक भोले भाले
भक्ति भाव से तुझे पुकारे
अब तो झलक दिखा दे अंबे मां।
दुख दरिद्रता ने मुझे घेरा
तुझ बिन कौन हरे दुख मेरा
अब तो बेड़ा पार लगा दे अंबे मां।
सरोज ✍️

-Saroj Prajapati

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कविता# नवरात्रि
जलाकर मन में विश्वास का दीया
बांधकर तुझ संग आस्था की डोर
चली आई तेरे चरणों में, मैं अंबे मां
अब चाहे तू ठुकरा या गले लगा
सौंप दी तेरे हाथों में जीवन डोर
तुझ बिन नहीं कोई सहारा मेरा और
मोह माया में जकड़ा चंचल मन
कस्तूरी मृग सा भटके चारों ओर
दर-दर भटकूं ना मिली शांति किसी ठौर
डाल दया दृष्टि हे मां अब इस ओर
तुझ बिन नहीं कोई सहारा मेरा और।।
सरोज ✍️

-Saroj Prajapati

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कविता #नवरात्रि
नवरात्रि में मां की महिमा बरसे जमकर

रोशनी से जगमग चमके माता का भवन

माता की कृपा से दमके ऐसे सारा नगर

मानो सितारे उतर आए आज जमीन पर

स्वागत में मां के आज नाचेंगे सारी रात

तो आओ सारे मिलकर, गरबा खेलेंगे जमकर

ढोली ढोल पर दे तू ऐसी थाप, मां की

धुन में मस्त मगन होकर नाचे हर भक्त आज।

-Saroj Prajapati

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प्रेम,स्नेह और विश्वास से, बंधी रिश्तो की डोर
नहीं टूटती, चाहे कोई कितना भी लगा ले जोर।

-Saroj Prajapati

इतनी सी अरदास#नवरात्रि
(कविता)

हे मां इस नवरात्रि ,है मेरी इतनी सी अरदास
दे अपने भक्तों को सद्बुद्धि और दे सद्ज्ञान
ना मारे वो अजन्मी बच्चियों को गर्भ में
ना छीने उनसे जन्म से पहले, जीने का अधिकार।

हे मां इस नवरात्रि, है मेरी इतनी सी अरदास
ना रहे कोई भूखा प्यासा, ना हो कहीं अंधकार
जैसे रोशनी में नहाते शहर, महल, अट्टालिकाएं
वैसे ही गरीबों के झोपड़े और जीवन में फैले प्रकाश।

हे मां इस नवरात्रि, है मेरी इतनी सी अरदास
हर नारी बन जाए तेरी प्रतिमूर्ति
बनकर काली करें दुष्कर्मियों राक्षसों का संहार
इस नवरात्रि मांगे तुझसे हम सब ये वरदान।।
सरोज ✍️

-Saroj Prajapati

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माता का भजन(गीत)#नवरात्रि
मेरे घर पधारी आज , पधारी आज माता रानी 2
मेरी पूरी हो गई सब आस, पधारी आज माता रानी
गाओ सखियों गाओ मंगलगान, मेरे घर आई आज माता रानी। 2

चौकी लगाओ, उसे फूलों से सजाओ 2
करो सब मिल महामाई का गुणगान, पधारी आज माता रानी
गाओ सखियों गाओ मंगलगान ,मेरे घर आई आज माता रानी । 2

ढोलक बजाओ, मंजीरे बजाओ ,2
झूम झूम नाचो गाओ सब आज, आई नवरात्रि की बेला सुहानी
गाओ सखियों गाओ मंगलगान, मेरे घर आई आज माता रानी 2

सुंदर सा पलना मंगाओ, उसे हीरे मोती झालर से सजाओ2
उस पर झूला झूलेगी मेरी माता रानी, पधारी आज माता रानी
गाओ सखियों गाओ मंगलगान, मेरे घर आई आज माता रानी। 2
सरोज ✍️

-Saroj Prajapati

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वो सोच कर खुश हैं कि हम उनसे डरते हैं
नहीं जनाब, हम तो बस
रिश्तों का लिहाज करते हैं।
सरोज ✍️

-Saroj Prajapati

#मानसिक
दूर रहने से आ ना जाए रिश्तो में दरार

जीवन को कहीं खोखला ना कर दे

अकेलेपन रूपी मानसिक अवसाद, इसलिए

जरूरी है होती रहे अपनों से मुलाकात।

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