Hey, I am on Matrubharti!

आज है वहीं दिन, वही वार
अपनी डायरी में, तेरे लिए
दिल में उमड़ते,अनेक जज़्बातों में
भिगो छुपाकर रखा था
वो प्यारा सा लाल गुलाब।
सोचा था, देकर तुम्हें ये प्यार की निशानी
हाल ए दिल सुनाएंगे।
मेरी हया कहो या तेरी नासमझी
हम कह ना सके, तुम कभी समझ ना पाए
दिल में ही दफ़न हो गए, वो अनकहे जज़्बात
डायरी में हो कैद,सूख गया वो लाल गुलाब।।
सरोज ✍️

Read More

लिव-इन रिलेशनशिप (लेख)

अति स्वतंत्रता, विकृत मानसिकता व उच्छृंखला का घिनौना रूप लिव इन रिलेशनशिप है। हमारे युवा विदेशों का अनुसरण करते हुए यह भूल जाते हैं कि पाश्चात्य संस्कृति के लोग धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं। वह लोग जिन चीजों का त्याग करते हैं, हम उन्हीं चीजों को बिना सोचे समझे झपटने की कोशिश करते हैं। उदाहरणार्थ एकल परिवार , फास्ट फूड, छोटे कपड़े, प्लास्टिक आदि।
विवाह संस्था हमारे देश की पहचान है। यह कोई बंधन नहीं है अपितु समाज, परिजनों के आशीर्वाद से एक दूसरे के भावनाओं को समझ, प्यार विश्वास, त्याग समर्पण से परिपूर्ण बहुत ही प्यारा नाता है। यह केवल लड़का लड़की तक ही सीमित नहीं अपितु उनके परिवारों को भी आपस में जोड़ उनके प्रति भी जिम्मेदारी का एहसास कराता है।
इसके विपरीत लिव इन रिलेशनशिप में साथ रहकर भी लड़का-लड़की एक दूसरे से दिल से कभी जुड़ नहीं पाते और ना ही एक दूसरों की भावनाओं को समझ पाते क्योंकि उनका रिश्ता प्यार पर नहीं करार पर टिका है । यह एक उपभोक्तावादी संबंध है। जिसमें एक दूसरे को उपभोग की वस्तु समझा जाता है। जिसका आधार पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें है!अगर समझ ना आए तो छोड़ दे ।
यह विश्वास शायद ही इन दोनों के मध्य कभी पनप पाए। जिम्मेदारियों से भागने का दूसरा नाम लिव इन रिलेशनशिप है।
सरोज ✍️

Read More

गुस्से में कहीं गई सही बात भी अपना महत्व खो देती है। सरोज ✍️

तू लाख छुपाए चाहे,
पर छुपती कहां सच्चाई है
जागते हो तुम भी रात भर
मेरी यादों के हसीं साए में।
तेरी नींद से बोझिल ये पलकें
करती हैं तेरी- मेरी मुहब्बत के
हसीन अनकहे अफसाने बयां।
तेरी आंखों के ये गीले कोर
गवाह है कि रोएं हो तुम भी
रात भर हमारी याद में।।
सरोज ✍️

Read More

ये पागलपन नहीं तो और क्या है।
यहां कतरा कतरा जिंदगी घट रही है
वहां मेरी खुद के लिए ही मुहब्बत और बढ रही है।।

सरोज ✍️

Read More

कहते हैं वक्त हर दर्द की दवा है। जो हर घाव को भर देता है। पर अपना तजुर्बा यही कहता है कि कुछ घाव भरते नहीं, नासूर बन जाते हैं। और ये घाव या तो अपने देते हैं या आपकी ईमानदारी । सरोज ✍️

Read More

तेरे इश्क के लाल रंग में
डूबी हूं मैं इस कदर
जहां जहां तक जाती है नजरें,
आता है बस तू ही नज़र।
तू चाहे या ठुकराए
ये मलाल नहीं मुझको
इश्क में भी हो सौदेबाजी
ऐसा प्यार मंजूर नहीं मुझको।
सरोज ✍️

Read More

खुशियों की चाह नही बाकी
भटकती रूह मेरी फ़कत सुकूं की तलाश में।।
सरोज ✍️

अच्छे दोस्त पारस के समान होते हैं।
इनकी संगत में आपके अंदर छुपी प्रतिभा सोने के समान निखर उठती है।
सरोज ✍️

Read More