lover by nature, writer by mind, singer by heart, indian by soul. जै श्री राम

Sarvesh Saxena लिखित उपन्यास "दो बाल्टी पानी" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/novels/13080/do-balti-pani-by-sarvesh-saxena

पहले तो ये गली मोहल्ले ही...
साजिशें करते थे...
अपनी मोहब्बत पे...
लेकिन अब तो...
इस चाइना को भी...
हमारी मोहब्बत...
रास नहीं आई....
मैं घंटों खड़ा रहता हूं...
अपनी बालकनी में...
तुम्हारे दीदार के लिए....
कुछ घड़ियों के लिए ही सही...
आ जाया करो....
अरे हम तो पहले से ही...
तुम्हारी नजरों में लॉक डाउन थे ...
लेकिन तुम नजरों के सामने रहो...
तो हम अपनी जिंदगी ही...
लॉक डाउन कर दें...
माना कि कुछ दूर...
जरूरी है रहना..
पर दूर से ही सही..
मुस्करा दिया करो...
कुछ घड़ियों के लिए ही सही...
बालकनी में आ जाया करो...
यूँ तो माहौल जहरीला है....
इस कदर...
पर अब हवाएं...
पहले से ज्यादा खुशनुमा हैं...
कल फिर आऊँगा मैं...
तुम्हारे लिए...
आ जाना...
ये लॉक डाउन का बहाना....
अच्छा नहीं...
#lockdown
#socialdistance

सर्वेश सक्सेना

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रक्षा करो प्रभु 🙏

कोई लम्हा, कोई पल...
तुम्हारी खबर नहीं लाता,
मैं ढूंढता रहता हूं अक्सर,
यादों की धुन्ध में तुम्हें,
पर हाथ सिर्फ,
खाली पन ही आता..,
काश कोई पता दे दे तुम्हारा,
तो मिल लूँ तुमसे...
जबकि मालूम है,
तुम्हारे जहां से कोई,
लौटकर नहीं आता....

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हे मानव! उदय कर अपने संस्कारों का...
देर नहीं लगती जब प्रकृति विनाश करती है..
तू क्षमा प्रार्थी तो नहीं, पर सुधर जा...
कहीँ अस्त ना हो जाए सूर्य तेरे प्राणों का...

#उदय

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कितनी सीढ़ियों, कितने तहखानो में उतरना पड़ता है..
जब कभी खुद से मुलाकात करना पड़ता है...

अजीब है....
ये मौसम भी इस कदर बेरुखी दिखा रहा है,
ना चाहते भी तुम्हारी याद दिला रहा है |

मुझे जन्मदिन की शुभकामनाएं देने के लिए आप सभी लोगों का हृदय से धन्यवाद

आप सभी लेखकों और पाठकों को होली की हार्दिक शुभकामनायें...