lover by nature, writer by mind, singer by heart, indian by soul. जै श्री राम

ये बारिशें भी अजीब होतीं हैं, दिल का जर्रा जर्रा भिगो जाती हैं...

पौधे लगाना भी हमारी ही जिम्मेदारी है लेकिन सरकार दिल खोलकर पौधे लगा रही है इसलिए अगर पौधे लगाना सरकार की जिम्मेदारी है तो उन्हें बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है इसलिए ज्यादा नहीं अपने आसपास के पौधों की देखभाल करें उनका बचाव करें हो सके तो नए पौधे भी लगाए क्योंकि एक औलाद को पाल पोस कर बड़ा करने के बाद औलाद भूल जाती है और साथ छोड़ देती है लेकिन पौधे बड़े होकर हमेशा हर तरह से साथ निभाते हैं अपने मृत्यु काल तक हमे प्राण वायु देकर |🙏

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Sarvesh Saxena लिखित कहानी "फिर मिलेंगे... कहानी - एक महामारी से लॉक डाउन तक - 11" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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असल मायने मे जिंदा वही है जो जिंदादिल है
#ज़िंदा

'जिंदगी' में चाहे जितने भी अच्छे काम कर लो,
'लेकिन' याद "तभी" आओगे जब दोबारा "जरूरत" होगी।

Thanks matrubharti.

I am the winner 🥇

तेरे शहर में न जाने कैसी खलिश थी इस बार।
न उसने मुझे रुकने दिया।
न उसने मुझे जाने दिया।।
रो नहीं पाया इस बार मैं जी भर उसके हाल पर
जब चला तो इस बार आसमां ही रो दिया।
सिसक पड़ा मैं आसमां के इस हाल पे।
अरसे बाद उसने मुझे अपना कह के भुला दिया।।

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तिनका हूँ तो क्या हुआ,
वजूद है मेरा भी,
उड़ उड़ कर हवा का
रुख तो बताता हूँ

आखिर कार देश से कुछ कचरा साफ हुआ