Full story of my life...._ myself a half writer...

देखकर मेरी आंखो के अश्कों के धारे,
पूछते हैं मुझसे ये चांद और सितारे,
तुझ पे मरने वाले तेरी आंखो से रोने वाले,
आज कहां गए हैं वो हमदम तुम्हारे....

✍️S.k

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ये गरीबी भी कमबख्त अपनी औकात दिखा जाती हैं,
साहब.. ये "हुनर" और "होनहार" दोनों को खा जाती हैं..✍️

उजड़ा आशियां बनेगा फिर, कितनी मदारातों के बाद,
आकर ठहरे है इक अजनबी, गमों की कितनी रातों के बाद।

प्यास बुझेगी मेरी दिल की, अब कितनी बरसातों के बाद।।
मगर वो अजनबी ही है आज भी, कितनी मुलाकातों के बाद....

दिल को बड़ी शिफाकत से रखा था दुनिया से बचाकर मैंने,
मगर इश्क़ करने का जुर्म कर बैठे थे कितने एहतियातों के बाद..

आग दामन की बुझाने में मिट गई मेरी हाथों की लकीरें मगर,
मेरी किस्मत की लकीरें थी उनके हाथों में मेरे हाथों के बाद..

दर्द-ए-दिल में बस इक आरजू लिए जिए जा रहे हैं हम,
इक रोज़ लौटकर आयेगी खुशियां, गम-ए-हालातों के बाद..

कभी तो निकलेगा फलक पर, इक आफताब मेरे लिए भी,
यकीनन इक सुबह मेरी भी होगी, इन तमाम काली रातों के बाद..


#सत्येंद्र_ ✍️

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हालातों और मुश्किलों से बख़ूबी लड़ना सिखा रही थी,
"दोस्तों"आज एक जर्जर कस्ती तूफानों से टकरा रही थी..
✍️

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आज मैंने भी क्या गजब लिख दिया तेरी याद में,
तेरी ही सूरत नजर आ रही हैं मेरे हर अल्फ़ाज़ में..

✍️✍️

जिंदगी का सफर लंबा है तो क्या हुआ जो रास्ते में रात हुई,
मोहब्बत में हिज्र की मौत मरना भी कोई मोहब्बत की बात हुई...

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आंखे बन्द हो और दिल-दिल से रू-ब-रू हो ले,
इश्क वही सच्चा जो जिस्म से पहले रुह छू ले...

सारे शहर में बिना आग के धुआ ही धुआ था,
मै इश्क में कुछ इसी तरह बदनाम हुआ था...

✍️_सत्येंद्र

मोहब्बत में पूरी मेरी "सत्येंद्र"
बस इतनी सी इल्तिज़ा हो जाए,
हम इक दूजे को बाहों में भरे,
और हमे उम्र कैद की सजा हो जाए...
✍️✍️

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