My Meaningful Poem...!!!


यारों प्रभु है वो जानता है...
कब, किस को, क्या देना है...

मुक़द्दर लिखने वाले से...
शिकवा या गिला नही करते...

दी हैं जीदगीं उसने तो...
तो गिज़ा भी वही ज़रूर देगा...

एसे ही तो महज़ चंद बीज...
अनगिनत धान के धान नहीं देते...

प्राचीन-अर्वाचीन-समकालीन..
दौर कोई-सा भी हो अन्न वही देता

बारिश 🌧 धूप-छाँव रोशनी...
हर फसल की मावज़त वहीं करता

दरबार उसका चारों प्रहर सजता..
नादान बंदा बात इतनी न समजता

वह जानत है कि कीड़ी को कण...
हाथी मण लागें,ख़्याल वहीं रखता

✍️🥀🌹🌹🌹🙏🌹🌹🌹🥀✍️

Read More

My Wonderful Poem..!!


यारों यहाँ कोई सब कुछ खो
कर भी खुश रह पाता है

ओर कोई तो सब कुछ पा कर
भी हर वक़्त बस रोता है

जी हाँ नज़रें तो होती है सब की
अमूमन एक जैसी ही पर

देखने का नज़रिया ही सब का
अपना अलग-अलग होता है

एक बाज़ फ़लक से ज़मीन तक
देख शिकार कर लेता है

ओर नादान बंदा ज़मीन पर रह
कर भी रब से दूर होता है

कहने को प्रभु-आस्था के नाम पर
बड़े-बड़े व्याख्यान करता हैं

पर अति-सूक्ष्म कोरोना-संक्रमण
से प्रभु-आस्था ही खो देता हैं

प्रभु-लीला अपरम्पार यह जानत
तो है पर यक़ीन ही खो देवत हैं

पर होते कुछ बंदे एसे भी जो मौत
को भी मात दे कर घर लौटत हैं

✍️🥀🌹🌹🙏🙏🙏🌹🌹🥀✍️

Read More

My New Poem ... !!!!

ग़ैर के बारे में जो अफ़वाह उड़ा देते हैं

अपने दिल की हसरत का पता देते हैं

सच्चाई से ना उन्हें कोइ सरोकार है ना

अपनी खुदकी क़ाबिलियतका पता है

औरों के किरदार को तो बिना बात बूरा

केह कर अपनी छोटी सोचका पता देते

प्रभु जी भी कुछ हद तक तो ढील देते है

पर वक़त आने पे उन्हें सच्चाई बता देते

जान कर जो सच्चाई को सँभल जाते है

दरअसल वही प्रभु शरण भी पा लेते है।

✍️✍️🌹🌹🙏🌹🌹✍️✍️

Read More

My Comedy Poem...!!!


यारों कोरें काग़ज़ पर लिखीं
ग़ज़ल बकरी चबा गई

फिर चचाँ हुआ सारे शहर में
कि बक़री शेर खाँ गई

कला कारीगरीं लफ़्ज़ों कि
सारी बेवजह-सी हो गई

ग़ज़ल भी हाज़मे कि दिवारों से
टकरा के पिंगल-सी गई

शायद शायर भी बेचारा पागल
सोचा बात यें क्या हो गई

कुछ पल में शेर-ओ-कलामकी
मानों जैसे धज्जियाँ उड़ गई

✍️🥀😀😃😅😇😃😀😅🥀✍️

Read More

My Meaningful Poem..!!!


यारों मेरा जुर्म है तो क्या है
यह तों बता दो मुझे

अगर मासूम होना भी गुनाह
है तों सजा दो मुझे

शायराना अन्दाज़ ही अदा है
मेरी तों दाद दो मुझे

पाकीज़ा लफ़्ज़ोंमें कोई ख़ता
है तो बता दो मुझे

हल्के लहजे में राफ़ता रब से
होता है तों मान लो मुझे

बयान दिल से करता हूँ छुँए
दिलको तों क़बूल...!!!

✍️🥀🌹🌹🌹🙏🌹🌹🌹🥀✍️

Read More

My Wonderful Poem..!!


यारों चमन में कौन बबूलों
की डाल खींचत है

यहाँ जो भी आवत है फूलों
के ही गाल खींचत है

वक़्त चाहे अच्छा हो या बूरा
अपने ही टांग खींचत हैं

नादान मुसाफ़िर अनजान बन
जीवन व्यतीत कर देवत है

ग़मों का ढेर हो या हो ख़ुशियों
का अंबार, प्रभुजी देखत है

रस्म-ओ-रिवाजों के नाम बंदा
सिफँ प्रभुजी नमन करत है

पर चंगा-बंदा जो सच्चे दिल-से
मन-से प्रभु समक्ष झुकत है

जीते-जी तो इज़्ज़त पावत ही है
मर के भी मुक्ति पावत है

✍️🥀🌹🌹👍🏾🙏👍🏾🌹🌹🥀✍️

Read More

My Meaningful Poem..!!!


कौन कहता है कि...!!!

नेचर और सिग्नेचर
कभी नहीं बदलते....

बस एक चोट की जरूरत है..

अगर उंगली पर लगे
तो सिग्नेचर बदल जाता है..

और ...!!!

दिल पर लगे तो नेचर
तक बदल जाता है ..

ओर...!!!

चोट विवाह के बाद
ग़र लग जाएँ तो...

घर तो घर फ़र्निचर
नेचर व सिग्नेचर भी....


✍️🥀🌹🌹🌹🙏🌹🌹🌹🥀✍️

Read More

My Wonderful Poem...!!!

मनवा
बेपरवाह धड़क धड़क
सीने बीच ख़ूब तड़पत है आज

भाँग
मन भरन पी ली है आज
रंगों को रगो में बहने दो आज

आज
इतना जहर पिया पिला दो
कि सांस तक भी रुक जाए हमरी

सुना है
कि ग़र सांस रुक जाए तो
रूठे हुए पिया भी देखन आवत हैं

बैरन
मूवाँ बरसों का हो या चाहे
हो जन्मों का सब भूल जावत है

शय्या
यहीं एक एसी सजत है
कि रघुकुल याद आ जावत है

✍️🥀🌹🌹🌹❤️🌹🌹🌹🥀✍️

Read More

My Meaningful Poem..!!!


बोसा दे के एक हल्की
सी "आह" के बाद

वो बोली .. बस बाकी
सब निकाह के बाद

संस्कृति की चार दिवारें
धागे के बंधन बाद

पुस्तों की ख़ानदानी हया
सँवरती”हाँ”के बाद

दो नस्लों की मिलावट है
एक औलाद के बाद

वंशावली चलतीं आईं हैं
निकाह-रस्म के बाद

प्रभुजी बनाएँ हैं संरचना
जहाँ बनने के बाद

✍️🥀🌹🌹🌹🙏🌹🌹🌹🥀✍️

Read More