My Historical Poem...!!!

हुस्न चाहें ताज का हो
या फिर मुमताज़ का हो

कुछ इमारते कयामत
तक खण्डहर नही होती

कशिश तो मोहब्बत की
हर एक दौरे में जवान होती

पर कोशिश शाहजहाँ की
ता-क़यामत तक जवाँ रहेंगीं

ताज़ जैसी आलीशान याद
बनाने पर भी हाथ काँटे गए

तौहीन शिल्पकारों की कला
कि या पागल शाहजहाँ की

बे-रहम मोहब्बत की दिवानगी
मुआवज़ा हाथों का तारीख़ बनी

अजूबे अजूबा या अजीब दासता
दोहराते आए हर एक हुक्मरान

शायद यही रही अफ़सानों की
कहानियों की हिन्दोस्तान की ज़मीन

अनगिनत देवी-देवताओं की
भिन्न-भिन्न विभिन्नताओ की ज़मीन

अनेकताओं में एकता की ज़मीन
विभिन्न त्योहारों व उल्लास की ज़मीन

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My Wonderful Poem...!!!

कितनी मुद्दतों के बाद मिले हैं ये नैना
पलके हैं कि झुकने का नाम नहीं लेती

युग बीत गया होठोपे हंसी को आते हुए
अब आज हंसी रुकनेका नाम नहीं लेती

दर्द की कर्राहट भी एक अजीब शेह हैं
जब हावी होती तो चैनपल भर नही देतीं

दर्द जिस्मानी हो या ज़ेहनी दर्द बस दर्द
होतीं प्रभुको याद करनेपे मजबूर करती

नास्तिक हो या आस्तिक दर्दके मारे बंदे
अर्चना-प्रार्थना रुकनेका नाम नही लेतीं

पर ग़ज़ब की महामारी हैं यह कोरोना भी
आज हर प्रभु दरबार खुलने का नाम...

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My Wonderful Poem...!!!

कितनी मुद्दतों के बाद मिले हैं ये नैना

पलके हैं कि झुकने का नाम नहीं लेती

युग बीत गया होठोपे हंसी को आते हुए

अब आज हंसी रुकनेका नाम नहीं लेती

दर्द की कर्राहट भी एक अजीब शेह हैं

जब हावी होती तो चैनपल भर नही देतीं

दर्द जिस्मानी हो या ज़ेहनी दर्द बस दर्द

होतीं प्रभुको याद करनेपे मजबूर करती

नास्तिक हो या आस्तिक दर्दके मारे बंदे

अर्चना-प्रार्थना रुकनेका नाम नही लेतीं

पर ग़ज़ब की महामारी हैं यह कोरोना भी

आज हर प्रभु दरबार खुलने का नाम...

✍️🥀🌹💐😇🙏😇💐🌹🥀✍️

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My Meaningful Poem...!!!

याददाश्त का कमजोर होना
अच्छी बात है जनाब,

बड़े बेचैन होते है वो लोग जिन्हें
हर बात याद रहती हैं

यादों के गुलदस्तों के हर फूल 💐
जरुरी नही की सुकून ही दे

कुछ यादें जब याद आतीं है दिल के
सुर्ख़ ज़ख़्म ताज़ा कर जाती हैं

अपनों के दरमियाँ फ़ासले बढ़ाती हैं
यादें अपनापन तक खा जाती हैं

तो कुछ यादें पुराने ज़ख़्म भूला कर
रिश्तों की दूरियों दूर कर जाती हैं

ग़रज़ कि यादें आबाद भी करतीं हैं तो
बर्बादी का सबब भी बेशक बनती हैं

बस यह हम पर निर्भर करता हैं कि हम
यादों के गुलदस्तों को कैसे संजोते हैं

दरअसल प्रभुजी को भी किसने देखा हैं
पर उनकी याद ही सुकून दे जातीं हैं


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My Wonderful Poem..!!!

💕हर शब को कुछ लिखूँ,
ये मुमकिन नहीं..!!

💕कभी-कभी अल्फ़ाज़ भी
तो सोया करते हैं...!!

🎈ग़ुब्बारे-से है ख़यालों के
हर एक गुल-दस्तें भी ..!!!

🛌 जनाब...!!!

🎈कभी तो ख़ुद ही चल
ज़हन में आ जाते है..!!

🏮तो कभी घड़ी की सुईऔ-से
एक दूजे से चिपक जाते है..!!

🗝 चाहके भी ये सोचकी
चाबीसे ना खुल पाते है..!!

❤️पर यह दिल भी तो पगला
दिवाना-सा बिना लिखे..!!

🥃नशाखोर यह दिल 💓 भी
आवारा सोने नही देता..!!

😇 शायद यही एक शायर की
✍️क़लम की क़िस्मत हैं..!!


✍️🥀👣❤️🥃🥃🥃❤️👣🥀✍️

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My Meaningful Poem ....!!!

आसमाँ में मत ढूंढ़

अपने सपनों को ...

सपनों के लिए तो

जमीं जरुरी है ...

सबकुछ मिल जाये

तो दुनिया में क्या मजा ...

जीने के लिए एक

कमी भी जरुरी है...

यदि सपने को सच करना

है तो रास्ते बदलो ....

अपने निजी ख़्याल बदलों ...

अपने पुख़्ता सिद्धांत नहीं ....

क्योंकि पेड़ हमेशा सिर्फ़

पत्तियाँ बदलते हैं,

शाखें या जड़ें नहीं ...!!!!!

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My Diwali Eventual Poem..!!!


*लोगो ने खरीदा सोना*
*मैने एक 'सुई' खरीद ली*

*सपनों को बुन सकूं*
*उतनी 'डोर’ खरीद ली*

*सबने बदले नोट अपने*
*मैंने अपनी ख्वाहिशे बदल ली*

*'शौक- ए- जिन्दगी' कम करके*
*'सुकून-ए-जिन्दगी' खरीद ली...*

*इस पावन अवसर पर
दिल से एक ही प्रार्थना है..*

*धन बरसे या न बरसे..*
*पर कोई गरीब..*
*दो रोटी के लिए न तरसे..*

*🙏ROOH-The Spiritual Power की
ओर से तह दिल से सभी को
दीपावली की शुभकामनाएँ 🙏🏻*

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My Meaningful Poem..!!!

यारों कुछ इस तरह से
हमारी बातें कम-सी हो गई

“कैसे हो” से शुरू हुई
ओर “ठीक हूँ” पर ख़त्म हो गई

खुलुसियत दिल की जो
हाथ मिलाने में थी ख़्वाब-सी हो गई

दूरबीन-सी दूरी जिस्मों की
ओर लफ़्ज़ों में तो ख़लिश-सी हो गई

शक़-ओ-सूब़ा छींक खाने पे
ओर खाँसी से तों दुश्मनी-सी हों गई

माशाअल्लाह चेहरों पे नक़ाब
की पाबंदी ओर दूरी मजबूरी हो गई

छूता-अछूत बीमारी सुनते थे कभी
आजकल यही लाचारी सरेआम हो गई

सेनीटाईज़ जैसे नाम अस्पतालों में
ही सुनते थे आज वही दिनचर्या हो गई

प्रभु ही जानें कब ख़त्म होगी सज़ा
कोरोनाकी, जो बर्दाश्त से बाहर हो गई

✍️🥀🌹🌹🙏🙏🙏🌹🌹🥀✍️

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My Meaningful Poem..!!!


यारों पगला दिल ये अपना है
जिस में आज भी बचपना ही हैं

ना है कोई बनावट ना मिलावट
जैसा हैं वैसा ही बस इसे दिखना हैं

जैसा हैं भीतर वैसा ही बाहर भी
ना लोभ ना द्वेष ना मिथ्याभिमान हैं

मासुम बच्चे-सा इस पल रुठना
ग़र दिल से कोई मनाएँ तो मान जाना

पर होती हैं जब भी दिमाग में हरारत
तो हम भी करने लग ही जातें हैं शरारत

हसरतें सिलवटें करवटें न ही मुखौटे
साफ़ दिल साफ़ चेहरा साफ़ ज़बान

शायद इसीलिए प्रभुजी पर ही होती
ख़त्म हर शायरी हमारी,ख़त्म हर क्लाम़

✍️🥀🌹🌹✅🙏✅🌹🌹🥀✍️

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My Wonderful Poem...!!!


प्रभुजी आपके दिदार का
मुन्तज़िर मेरा किरदार हैं

आपके हर हुक्म को बजा
लाने का ही में तलबगार हूँ

आपके सम्मुख शानसे पेश
आने जैसा ईमानदार ही बनूँ

आपको मुज़ अदना-सी हस्ती
भाए, उस मक़ामका वफ़ादार हूँ

आप ही आप में खो जाऊँ बस
यही तमन्ना का परहेज़गार हूँ

आप ही से वाबस्ता हो मेराज
आप ही से बना में शानदार हूँ

आप ही ने दी रवानी मेरी क़लम
को आप ही का में ज़िक्र-कार हूँ

आप आप आप बस आप ही आप
नज़र हर-सूँ आए इतना वफ़ादार हूँ

आप ही की तवज्जो में बसा रहूँ हर
पल मेरी ज़िंदगी का बस यही मक़सद।

✍️🥀🌹🌹🙏🙏🙏🌹🌹🌹🥀✍️

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