दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई,

जैसे एहसान उतारता है कोई,

दिल मे कुछ यूँ सँभालता हूँ

गम जैसे जेवर सँभालता है कोई,

आइना देख कर तसल्ली हुई हम

को कि इस घर में जानता है कोई

पेड़ पर पक गया है फल शायद

फिर से पत्थर उछालता है कोई

देर से गूँजते हैं सन्नाटे जैसे

हम को पुकारता है कोई।

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My Wonderful Poem..!!!


जरूरत है कुछ नए
नफरत करने वालों की

सभी पुरानेवाले तो
अब चाहने लगे है हमें

उल्फ़त की डगर ही
है कुछ एसी नफ़रतों के

सैलाब हो या ग़मों का
हो जज़ीरा राश़ आँतें हमें

परवाने मोहब्बत के ही
हर दौर में रोशनी बिखेरेंगे

हँस कर ऑसु खून के भी
पी लेंगे, उफ़ तक न देंगे हमें

ओढ़ कर चादर जुर्मोंकी
शिकन चेहरे पर न आने देंगे

मोहब्बत के मरीज़ों के हैं
यहीं फँसाने, रुसवा न करे हमें

प्रभुजी भी इम्तिहान लेते हैं
उन्हीं के जो पसंदीदा हो प्रभु को

वरना ख़ुदगर्ज़ियों की कमीं
नहीं गालिब जो ज़ख़्म ही देते हमें

✍️🥀🌿🌹🙏🙏🙏🌹🌿🥀✍️

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My New Poem ...!!!!

It only takes merely few

second to hurt someone

But sometimes it takes

years to heel up damage

All of that unspent love

gathers in the corners

of your dry & deep eyes

the lump in your throat

& in the hollow part of

your wide & broad chest

Sometimes our lives have

to be completely shaken

up changed & rearranged

I have never felt my home

since the day you left me

And over time, my pen

All of sudden stopped

bleeding but my heart

the hurtful heart didn't

How much empty of me

to be so full of you my

The Dearest Almighty ❤️

✍️🌲💔🌴🙏🙏🌴💔🌲✍️

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My Wonderful Poem…!!!


यारों तकलीफ ख़ुद ही कम हो गई

जब ख़ुद अपने से उम्मीद कम हो गई

दिल सुकून ओर ज़हन चैन पा गया

जब ख़्वाहिशोंकी पेशकश कम हो गई

मन बबाल-ओ-जंजाल से तनाव मुक्त

ओर जिस्मानी हरारत भी कम हो गई

बे-मायने ज़िम्मेदारीयों का बोझा दूर

हूआ रुँहानियत भी संजीदा-सी हो गई

वक़्त की दहलीज़ पर जीदगीं आसान

ओर प्रभु-परस्ती की तस्वीर साफ़ हो…

✍️🥀🌿🥀🌹🙏🌹🥀🌿🥀✍️

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My Meaningful Poem…!!!


यारों ऊँचा उठने के
लिए पंखों की ज़रूरत
केवल परिंदों को ही पड़ती है

पर इन्सान तो जितना
सरल विनम्रता से झुकता है
उतना ही अधिक ऊपर उठता है

स्तर फिर चाहे शब्दों
का हो या कि हरकतों का
जितना निम्न स्वर उतना उचा पद

दरख़्त भी तो जड़ों से ग़र
जूड़े न रहे तो तूफ़ान 🌪 से
पल भर में तहशत-नहशत होते है

कश्तियाँ भी पतवार के
सहारे ही मिलों के सफ़र तय
कर लेती पर वक़्त रहते न सँभलें तो…!!!

प्रभु की पसंदीदा अदा भी
शाश्वत-दंडवत्-प्रणाम ही तो है
जो सच्चे दिल से किया पाया प्रभु-शरण।


✍️🥀🌿🌹🙏🙏🙏🌹🌿🥀✍️

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❣️*खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं ।*
*जिसे भी देखो परेशान बहुत है *

*करीब से देखा तो निकला रेत का घर ।*
*मगर दूर से इसकी शान बहुत है ।।*

*कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं ।*
*मगर आज झूठ की पहचान बहुत है ।।*

*मुश्किल से मिलता है शहर में इन्सान।*
यूं तो कहने को आदमी बहुत हैं ❣️

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My Realistic Poem..!!!!

हंसते हर चेहरे के पीछे
जानें कितने ऑसु छिपें है

सैलाब ग़मों का सीनें में
पर मुश्कुराहट चेहरे पे है

ऑसू को पीना भी आर्ट
जो सब के बस में नहीं हैं

भँवर की डगर पर तूटती
कश्ती 🛶 को सँभालें है

जवा मर्द 🏃‍♂️ जो दर्द को
बर्दाश्त कर के जी लेते हैं

प्रभु भी उन्हीं के इम्तिहान
सख़्त-ओ-संगीन लेते है

अलगाव की बात है कि
वहीं मोक्ष-मुक्ति पाते हैं

संतों की जीदगीं ग़र देखो
तो जानों कि मर्म क्या है

जीवनरुपी सफ़र 🛳 का
वरना जानवर भी जी लेते हैं

✍️🥀🌹🌹🌹🙏🌹🌹🌹🥀✍️

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My Painful Poem..!!!


कितना महफूज हूँ
मैं कोने में

कोई अड़चन नहीं है
यहाँ रोने में

बहूत तड़पा है दिल
दिलेर होने में

क्या कुछ नहीं सहा
दाग़ धोने में

लोक-डाउन बिताया
सारा नौकरी में

राश फ़िर भी न आया
अंतर कलह में

किरदार साफ़ होना भी
सज़ा ज़माने में

ईमानदारी बेवक़ूफ़ी है
आज के दौर में

निवृत्ति वय मर्यादा भी
तकलीफ सर्विस में

अपने भी तब्दील हूएँ
हालात से ग़ैरों में

प्रभु की लीला अजीब
खड़े हैं कठघरे में

✍️🥀🌹🙏🙏🙏🌹🥀✍️

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My Comedy Poem..!!!

😂😜 U N C L E 😜😂
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उम्र 50 पार है लेकिन
शक्ल हमारी 30 के जैसी।
मुझको uncle कहने वालो,
तुम्हारी ऐसी की तैसी।।।
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बेटी के कॉलेज गया तो,
टीचर देख मुझे मुस्कुराई।।।
बोली क्या मेनटेनड हो मिस्टर??
पापा हो,पर लगते हो भाई।।।
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क्या बतलाऊँ उसने फिर,
बातें की मुझ से कैसी कैसी।।
मुझको uncle कहने वालों,
तुम्हारी ऐसी की तैसी।।।।
.
पडोसन बोली, सेकंड हैंड हो,
लेकिन फ़्रेश के भाव बिकोगे।
बस थोड़े से बटन खोल लो,
फिर अजय देवगन से दिखोगे।।
.
बीवी सोच रही है शौहर,
मेरा कितना अच्छा है जी
पढ़ती नहीं गुलज़ार साहेब को,
दिल तो आख़िर बच्चा है जी।।।
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नीयत मेरी साफ़ है यारों,,,
नही हरकतें ऐसी वैसी।
मुझको uncle कहने वालों,
तुम्हारी ऐसी की तैसी।।।।
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कितनी जंग लड़ी और जीती,
इन गुज़रे सालों में।।।
दो-एक झुर्रियाँ गालों में हैं,
और थोडी सफ़ेदी बालों में ।।।।
.
इरादे मगर मज़बूत हैं अब भी,
उमंग भी सॉलिड पहले जैसी।
मुझको uncle कहने वालों,
तुम्हारी ऐसी की तैसी।।।।
.
जीने का जज़्बा क़ायम हो तो,
उम्र की गिनती फिर फ़िज़ूल है।
अपने शौक़ को ज़िंदा रखो,
जीने का बस यही उसूल है।।।
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ज़िंदादिली का नाम है जीवन,
परिस्थितियाँ हों चाहे जैसी।।।
मुझको uncle कहने वालों,
तुम्हारी ऐसी की तैसी.
........
मेरे सभी 35+ वर्षीय दोस्तों को समर्पित

✍️🥀🌹🌹😄🧐😜🌹🌹🥀✍️

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My Wonderful Poem...!!!

मेरे लफ़्ज़ों की कारीगरी थी
जो हर बात कह गया हूँ मैं...

वरना यह कौन जानता है कि
कितना कुछ सह गया हूँ मैं..

हालात-ओ-वाक्यात सबके
लफ़्ज़ों से बयान कर गया हूँ में...

बातों-बातों में ही कितने दिलों
की दर्द-भरी बातें कह गया हूँ में..

हल्के फूलके लहजे में ही सही
संगीन ग़मों को फ़िरो दिया हूँ में..

बंदगी तो जानता नही पर रब से
सब को वाबसता कर दिया हूँ में ..

इन्तज़ार मेरी ग़ज़लों-शायरी का
करने पे आमादा लोगोंको करता हूँ में..

हुनर-ओ-फ़न तो जानता नही पर
प्रभु से मिलन करने पे मजबूर करता...!

✍️🥀🌹🌹✅🙏✅🌹🌹🥀✍️

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