My Meaningful Poem...!!!

मोह-माया उसूलों की दहलीज़
पार करे उससे पहले सँभल जा

क्रोध अच्छे-बूरेकी दहलीज़को
पार करे उससे पहले सँभल जा

धन-लालसा हक़ की दहलीज़
पार करे उससे पहले सँभल जा

मनोकामना संयम की दहलीज़
पार करे उससे पहले सँभल जा

नादानियाँ इज़्ज़त की दहलीज़
पार करे उससे पहले सँभल जा

बद-गुमानी अपनों की दहलीज़
पार करे उससे पहले सँभल जा

प्रभुजी जिंदगी दिए हैं ख़ुशनुमा
तरीक़े से व्यतीत करने के लिए

आमाल से बुराई की दहलीज़
पार करे उससे पहले सँभल जा

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My Meaningful Poem..!!!

जी हाँ अजीब-सी बुलंद शख़्सियत हैं
फ़ानी-इन्सानी पुतलों-सा बशर यारों

माना बदलाव ही प्रकृति का नियम है
मगर बदलाव ही कितने भोग लेते रहे

सदियों से ही सिलसिले चलते आ रहे
दाग़ दामनों के हर दौर में बंदे धोते रहे

धूल तो चिपकी रही अपने ही चेहरों पर
पर आईने ही सिर्फ़ बंदे साफ़ करते रहें

सिर्फ़ दिखावे की बलि पर संस्कृतियाँ
हर दौर में यूँ जालसाज़ी पर चडती रही

अस्मिता ख़ानदानों की भी पारंपरिक
रूढ़िवादी-रिवाजों में यूँ कुचलतीं रही

दूरदर्शी द्रष्टि-हीनता के अभाव पर ही
जूठी वास्तविकताएँ आकार लेती रही

परस्पर सौहार्द प्रेम-ग्लानि आत्मीयता
था ग़ेहना कभी, ख़्वाब-सी बनती रही

छल-कपटपूर्ण स्वार्थ-पूर्ण भावनाओं
का चलन सरेआम प्रमाण बनता रहा

अब तो सिर्फ़ प्रभु ही मसीहा आनेवाली
पुस्त-व-नस्लों का,सच्चाई मिटती रहीं

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My Wonderful Poem...!!!

यारों जिसने सारा जहाँ बनाया
क्या नही वह जानता तूँ जो सोचता है

जिसने चाँद तारे सूरज को चमकाया
क्या नही वह जानता तूँ जो सोचता है

जिसने फूलो को ख़ुशबूदार बनाया
क्या नही वह जानता तूँ जो सोचता है

जिसने परिंदों को परवाज़-ए-उड़ान दी
क्या नही वह जानता तूँ जो सोचता है

जिसने भँवरों को भी तड़पना शिखाया
क्या नही वह जानता तूँ जो सोचता है

जिसने ख़्यालको ज़हनों में पयदा किया
क्या नही वह जानता तूँ जो सोचता है

तेरी सोच-फ़हम-ओ-गुमान से परे हैं
हस्ती उस जगत पालनहार प्रभुजी की

सौ ग़र पाना चाहता है बंदा-परवरी उस
रब की तो सच्चे दिल से प्रभु का हो जा

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My Characteristic Poem..!!


किरदार ही कुछ ऐसा है
कि लोग मुरीद हो जाते है...

जबरदस्ती हम दिलों पर
कब्ज़ा कभी नही करते हैं...

लफ़्ज़-ओ-अल्फ़ाज़ो से ही
हम ख़्यालों के ताने बुनते है....

नमाज़ियों-सी तों इबादतें
हम कभी नहीं कर सकते है...

पर बातों बातों में ही प्रभु से
लोगों का नाता जोड़ देते हैं...

गुजरती शामोंका तो पता नहीं
पर सुबहा हर बंदेकी सँवार देते हैं ...

दिल से साफ़ ओर मन के सच्चे
नियत-ओ-निती से पहचान देते हैं...

प्रभु-परस्ती ही मक़सद ज़िंदगी का
सबक़ बस यही हर वक़्त देते रहते हैं..!!


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My Wonderful Poem..!!!


सजदा क्या हमने छोड़ा वह
हमें काफ़िर-सा समझ बैठे

साथ उम्र-भर का देना था,
पर मुसाफ़िर ही समझ बैठे

उलझनें तों राहतें होती हैं
मोहब्बत की राहों में यारों

ग़मों के सैलाब को ही वह
नादान साहिल समझ बैठे

फ़ासले-मरहले भी मसले है
दो पल की दूरी भी मजबूरी

इब्तिदा-ए-इश्क़ में ही जानें
वह क्या-क्या रुसवा कर बैठे

हस्ती तो हसीन थी इश्क़ की
अमानत जानकी फ़िदा कर बैठे

और भी जानें क्या-क्या तमन्ना
जानें क्या-क्या आरज़ू कर बैठे

हक़-तलबियों की मस्ककत थी
संजीदा पर नफ़्स क़ुर्बान कर बैठे

रब से सब बे-सबबों-बे-ख़्याली
में माँगते माँगते फ़क़ीर-से बन बैठे

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My Imagination Poem..!!!

You are my poem

That which sometimes
rains

sometimes smiles radiant with sun,

others soaks with the
colour

and...!!!

the silence of the sunset.

You are my poem

And...!!!

poem that I always write,

that I always read,

that I always kiss,

that is always full of love

You are my poem

That leads to Spirituality

That gives meaning of life

That reminds ur duty
towards Almighty

You are my poem

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