मेरा नाम सीमा बत्रा है। मुझे कहानियाँ, उपन्यास पढने और लिखने का शौक है।बचपन से ही किस्से कहानियाँ कहने का शौक रहा है। तुरंत छोटी छोटी कहानियाँ बना कर सुनाने का हुनर मेरे छोटे भाई ने पहचाना और उसने हमेशा लिखने के लिए प्रेरित किया। भाई से मिले प्रोत्साहन से ही मैं पिछले 4 सालों से निरंतर लिख रही हूँ। 2-3 किताबों के साथ कुछ पत्रिकाओं में कहानियाँ छप चुकी हैं.....ये सब भाई की वजह से ही संभव हुआ है....

#Azadi ..... अपनी सोच से

आजादी सब को प्यारी है। सब को किसी न किसी से आजादी चाहिए किसी को जीने की आजादी तो किसी को घूमने की।। क्या हमें वाकई आजादी ही चाहिए? या फिर हम अपनी मर्जी से बिना किसी जिम्मेदारी को निभाने के भार से आजादी चाहते हैं? हमारी युवा पीढी को माँ बाप का सही राह दिखाना जेल सरीखा लगने लगा है। बच्चे ये तो जताते हैं कि उन्हें पैदा करके और पढा लिखा कर उनके पैरेंटस ने कोई एहसान नही किया है ये उनका कर्तव्य है! पर ये भूल जाते हैं कि अधिकारो के प्रति तुम सजग हो तो पहले अपनी जिम्मेदारी निभाना सीखिए.... बस रट लगा रखी है कि हमें आजादी चाहिए....
मैं पूछती हूँ किस बात की आजादी की दरकार है हमारे युवाओं को?
लिव-इन में रहने देने की आजादी या बुरी सोहबत में रहने की आजादी? नशा करने की आजादी या रेप करने की आजादी? बहुत हुआ ये आजादी का खेल.....
आजादी सच में चाहिए तो पहले अपनी गंदी आदतो को सुधारो.... आजादी लो अपने आप को सबसे अलग समझने वाली सोच से।
आजादी के नारे लगाना आसान है। हमारे देश में कुछ नही हो सकता कहना आसान है पर इस देश में तुम्हें इतनी आजादी है कि तुम खुले आम सिस्टम को गालियाँ दे कर रातों रात फेमस हो जाते हो और खुले आम घूमते हो.... अपने अड़ोसी पड़ोसी देशो में घूम कर आओ बच्चों तब तुम्हें पता चलेगा कि तुम कितने आजाद हो यहाँ...... !! मुझे भी आजादी पसंद है पर अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों से नही। मैं आजाद हूँ अपनी बात को कहने के लिए। अपनी सोच को सब के सामने रखने के लिए..... बस इतना ही 🙏🙏
#azaadi #

Read More