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लिखने का शौक हैं ,तो लिख भी लेते हैं,,बंद पडी़ किताबो से धूल हटा कर कभी कभी पड़ लेते हैं,,हमें नहीं पता की हमे क्या चाहिए,जो ईश़्वर दे दे वहीं कुबूल कर लेते हैं,,एक छोटी सी बस कोशिश हैं और जिन्दगी को अपनी आज़मा लेते हैं,,

हाय, दोस्तो मातृभारती पर मेरे द्वारा लिखी इस कहानी 'डर - भाग - 2' को पढ़ें 🙏
https://www.matrubharti.com/book/19868609/darr-2