मै भोपाल मध्यप्रदेश से ,मेरी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं..."वो नीम का पेड़" "हिन्दी और सिनेमा" एवं "हम तिरंगा लेकर आऐंगे."बाल कविता संग्रह

जिसे देते हुए
हाथ तेरे कभी न रुके...
वो छीन कर हक तेरा
देखना है आखिर
कब तलक मुस्कुराएगा...?

सीमा शिवहरे सुमन

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या खुदा ..!
मेरी खामोशियों को
सुनने वाला भी कोई
दुनिया में बनाया होता !
तो ये भी कोने में बैठी
आज बातें कर रही होती !!

सीमा शिवहरे सुमन

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एक कड़वा सच कई विरोधियों की..
एक मीठा झूंठ कई चापलूसों की...
कतारें हमारे पीछे लगाता आया है!
ऐ खुदा तेरी दुनिया में सच्चे इंसान
कहां खो गए ?


सीमा शिवहरे सुमन

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इतनी शिद्दत से
याद किया किसने ?
कि हिचकियां
बगावत पे
उतर आईं हैं!!

सीमा शिवहरे सुमन

टूटे ख्वाबों की बोरियां भर लो
सितारों में मिलेंगे ना जब
हम मिलकर के तब जोड़ लेंगे.,.

सीमा शिवहरे सुमन

हम भी
टूटी आस को
रख देंगे किसी ताक पर
कहते हैं एंटिक चीजें
लाखों की कीमत
रखती हैं।

सीमा शिवहरे सुमन

भुलाने की कोशिश में
ये क्या कर रहे हो ?
पहले तो कुछ कम ही था
अब ज्यादा
याद कर रहे हो...

सीमा शिवहरे सुमन

#गांधीगिरी


‌मैंने अपने एक रिलेटिव को शादी की सालगिरह के अवसर पर नाॅनवेज डिनर पर बुलाया। वो परिवार के चार सदस्यों सहित बीस रुपए के फूलों का बंच लेकर आईं। बड़ा ही अजीब लगा कि लखपति लोग भी इतने चिक्कट , कंजूस हो सकते हैं । फिर कुछ दिनों बाद उनकी बेटी की बर्थडे पार्टी में हमें बुलाया गया और हमारे अंदर गांधीगिरी का कीड़ा जाग उठा और उन्हें शर्मिंदा करने की मनसा लिए 1000 का ए.डी.का कंगन गिफ्ट में ले गए । कंगन बहुत पसंद आया और बदल कर साइज़ बड़ा लाने का भी आॅडर दिया गया जिसे बेटी की मम्मी ने अपने पहनने के लिए बदलवाया था। कुछ महीनों बाद फिर हमारे यहां बेटे के बर्थडे पर वो महान महिला बीस रूपए का खिलौना लेकर आईं ।


‌सीमा शिवहरे सुमन

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कोई न रखी
तुमसे मैंने आशा
जानती हूं
मुहब्बत सिर्फ देने का ही नाम तो है।

सीमा शिवहरे "सुमन"