श्रृंगार भावनांचा असतो कुठे विकाया.....

हुस्न -ए-चांदणी इस तरह न इशारा किया करो
लगता है आगोश मे ले लू कितना दूर तूम रहती हो

-शब्दांकूर

हुस्न-ए-मलिका, तेरा प्यार भी अनोखा था
तुकडे करके दिलके टांग दिया भरे बाजार मे

-शब्दांकूर

कभी नजर मे आया भी डूबते हुये मै
तू कोशीश न करना मुझे बचाने की

-शब्दांकूर

एक उम्मीद सी जग जाती है कमबख्त
जब दर्द मुझे होता है आंसू तेरे बहते है

-शब्दांकूर

अजबसी कस्मकश है जिंदगी
न पास आती है न दूर जाती है

-शब्दांकूर

Life is learning and De- learning process. who adopt it he wins

-शब्दांकूर

जिंदगी तेरे सवाल कितने परेशान करेंगे
कायर नही मै की जिने से हैरान करेंगे

-शब्दांकूर

ठंड की इस आगोश मे थोडी सासों मे गर्मी आती
समेट लेते बाहों मे, होठोसे होठोकी बात हो जाती

-शब्दांकूर

दिल की खिडकी खोलकर इतना तो पढ लेते
गर आप गरूर है हुस्न का, मै परवाना इश्क का

-शब्दांकूर

दो जिस्म न हो रेशम का भी अंतर
कभी आकर मुझसे मिलना इतना करीब से

-शब्दांकूर