×

Hey, I am reading on Matrubharti!

इश्क को पाकर
बिलकिस बन गई
नूर फिजां में आया है
या रब ये तेरा करम है
मैंंने खुदा को पाया है...
दिव्या राकेश शर्मा।

Read More

शब्दों के खंजर से लगे निशान,
दिखते नहीं, पर दुखते बहुत है।

जब भी दिखता दर्द मेरे मौला
सूरत तेरी नजर आई मेरे मौला।

हर तरफ हैं बस धोखे दिखते
कैसी आग लगाई मेरे मौला।

हर शख्स सितमगर बन बैठा है
कैसी दुनिया बनाई मेरे मौला।

जान की कोई कीमत न है
टूकडों पर है लुटाई मेरे मौला

इश्क की बातें बीत चुकी है
रुत ये कैसी आई मेरे मौला।

रूह से बज्म लिख रहा हूँ
लहू से स्याही बनाई मेरे मौला।

खुद की इबादत करता इंसा
कहाँ है तेरी खुदाई मेरे मौला।

रिश्ते तो अब छूट गए है
कैसी दौलत कमाई मेरे मौला।

हर एक शख्स यहां तन्हा देखों
कैसी इमारत सजाई मेरे मौला।

दिव्या राकेश शर्मा।

Read More

स्थिर होना भी सकूं देता है
जैसे झील का ठहरा पानी
तरंगित होते है कुछ गीत भी इसमें
जिसे सुन सकता है बस स्थिर मन..

Read More

दिल के जज्बात को दिल में बसाये रखा है
हमनें चेहरे पर एक परदा गिराये रखा है।

वो चले आते है रूह मे मेरी खामोशी से
हमनें निगाहों को दरवाजे पर सजाये रखा है।

हो गया है चाहतो का शुरू सिलसिला देखो
तुमनें हमको क्यों सीने से लगाये रखा है।

छोड़ देते हो जमाने हमें रूलाने के लिए
बेमुरव्वत तुमने क्या तमाशा लगाये रखा है।

इश्क हम ऐसे ही नहीं करते हैं तुम से सनम
तेरी मासूम अदाओं ने दिवाना बनाए रखा है ।

दिव्या राकेश शर्मा

Read More

इश्क यूँ ही हमे प्यारा न होता
जो साथ उनका गवारा न होता
जो छोड़ देते साथ रहने की ख्वाहिश
वह सनम कभी हमारा न होता।

Read More

शोर सुनने की ख्वाहिश में
सुन नहीं पाते मन का कोलाहल...

इंसान ने झुकना सूरजमुखी से सिखा है।बस फर्क इतना है सूरजमुखी जीवन के लिए सूरज की ओर झुकती है और इंसान फायदे के लिए किसी ओर भी झुक जाता है।

Read More

मोहब्बत में मेरी कोई कमी तो न थी
फिर आँखों में क्यों यह नमी आ गई...