संघर्षशील लेखक - अदम्य

अदम्य

-सिद्धार्थ रंजन श्रीवास्तव

लोग अक्सर पूछते है मुझसे,
लोगों की मदद करते हो? आखिर ऐसा क्या है फायदा?
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सच कहूँ? सुनना चाहोगे?
इंसानियत, प्यार और लोगों का अपनापन,
कभी सोचा ही नहीं इससे ज्यादा।।



"अदम्य"❤

-सिद्धार्थ रंजन श्रीवास्तव

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ऐ चाँद तूने खूब तड़पाया है, आज मेरे चाँद को..
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याद रख एक दिन तू भी तड़पेगा, अपनी चाँदनी से मिलने को।।



"अदम्य"❤

-सिद्धार्थ रंजन श्रीवास्तव

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मेरे दिल से निकल कर हर राहें तुझ तक ही पहुँचती हैं..
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मैं किसी और राह चल दूँ, ये मेरे रब को गवारा ना होगा।।




"अदम्य"❤

-सिद्धार्थ रंजन श्रीवास्तव

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वो ग़ुलाब अब भी मेरी किताब में पड़ा तेरा इंतजार करता है..
जिसे तूने प्यार से देते हुए कहा था, "हमेशा के लिए मेरे बनोगे क्या?"

-सिद्धार्थ रंजन श्रीवास्तव

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