Hey, I am on Matrubharti!

कुछ लोग बड़े शातिर खिलाड़ी होते हैं
साहब......
लोगों के दिलों से
शह और मात का खेल खेला करते हैं।

कैद है मेरा प्यार तेरी
कसमों की बंदिशों में
रूके हुए हैं मेरे पाँव तेरे
आँसुओं की जंजीरों में
ठहरे हुए हैं मेरे जज्बात
इन अल्फ़ाज़ों के दायरे में
दफन है मेरी मोहब्बत
तुझसे किये उस वादे में
मजबूर है...हम बहुत मजबूर
कि कह भी नहीं सकते
कि तुम और सिर्फ तुम ही हो
मेरे दिल की गहराइयों में

✍🏻शिल्पी सक्सेना

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बस....तुम नहीं हो

कुछ भी तो बिखरा हुआ नहीं है
बहुत करीने से सजी है ज़िन्दगी मेरी
एक कोना खाली है और
बस....तुम नहीं हो।

मुस्कुराती हैं सुबहें, गुनगुनाती है रातें
गुमसुम सी हैं शामें और,
बस....तुम नहीं हो।

मचला है मन, महकी हैं सांसें
गुमसुम सी है धड़कनें और
बस....तुम नहीं हो।

बिखरे हैं रंग, फैली है खुशी
गुमसुम सी है हँसी और
बस....तुम नहीं हो।

बरसी है बारिश, भीगा है मन
गुमसुम से हैं हम....
बस....तुम नहीं हो।

©️®️
✍🏻शिल्पी सक्सेना

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*कपड़े से छाना हुआ पानी*
*स्वास्थ्य को ठीक रखता हैं।*
*और...*
*विवेक से छानी हुई वाणी*
*सबंध को ठीक रखती हैं॥*
*शब्दो को कोई भी स्पर्श नही कर सकता..*_
_*....पर....*_
_*शब्द सभी को स्पर्श कर जाते है*
*🌹सुप्रभात🌹*

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इश्क

धड़कनों में धड़कता हूँ,
साँसों में महकता हूँ,
आँखों में बसकर,
सपनों में दिखता हूँ
मुस्कान में खिलता हूँ,
आँसुओं में बहता हूँ,
सिसकियों में रह कर,
तन्हाईयों में सिसकता हूँ,
हाँ...हाँ इश्क हूँ मैं जो,
खुशी में पलता हूँ और दर्द में ढलता हूँ।

✍🏻शिल्पी सक्सेना

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बारिश में भीगी हुई
दिसम्बर की ये सर्द सुबह
तुम्हारी बातें तुम्हारी यादें
तुम्हारा ग़म
और उसमें भीगे हुए हम

शिल्पी सक्सेना

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