मैं श्रुतकीर्ति अग्रवाल, पटना, बिहार में रहती हूँ। शुरू से ही, कथा-कहानियों के माध्यम से पूरी दुनिया को और उससे भी बढ़कर इन्सान को जानने-समझने की बड़ी उत्सुकता रही जिसने पढ़ना सिखाया और कालांतर अपनी अनुभूतियों को कहानियों में ढालना भी। और अब, पाठकों द्वारा अपनी सोंच के प्रति सहमति से उत्साहित हूँ, अनुगृहित हूँ। तथा धन्यवाद देना चाहती हूँ मातृभारती को जिन्होनें मेरी कथाओं को आपतक पँहुचाया, श्रवण माध्यम में ढाला और शाॅर्ट फिल्म बनाने के लिये चुना। धन्यवाद

समन्दर के पानी में तरंगें उठी थीं
आसमानों को छूने पतंगें चली थीं
मेरा नाम आया लबों पर तुम्हारे
तो दिल में हजारों उमंगे उठी थीं

लो चूड़ी खनक गई ये पायल की छन-छन
दिलकश बयारें सुवासित है कन-कन
खुल न जाए कहीं ये भेद दिलों का
होठों की बातों और आँखों की अनबन

मौलिक एवं स्वरचित

श्रुत कीर्ति अग्रवाल
shrutipatna6@gmail.com

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-- श्रुत कीर्ति अग्रवाल

https://www.matrubharti.com/bites/111743080

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दिल से...

महक उठा साँसों से तेरी
ये सारा संसार हमारा
सीख लिया आँखों ने करना
हरदम इंतेजार तुम्हारा
कुछ न कहो फिर भी समझे है
धड़कन तेरी हर बात
परिपक्व हुआ है संग उमर के
साजन प्यार हमारा

ना वादे ना कसम वफा की
ना रंगारंग उपहार
आँखें पढ़ती हैं प्रीत की पाँती
मन के सभी विचार
और नहीं कुछ मागूँ प्रभु से
नित जब ध्यान लगाऊँ
बस जीना संग-संग में तुम्हारे
मेरे जीवन का सार

ना श्रृंगार जरूरी है अब
ना रास-रंग मनुहार
चाहे मुँह से कभी न बोलो
प्यार भरे उद्गार
साथ तुम्हारे होना ही अब
सबसे बड़ा सौभाग्य
तेरी चितवन से अँकुराया
है बगिया पे निखार

कई पड़ाव पार कर लिये
है संध्या झुक रही जमीं पर
परछाइयाँ हैं कद से लंबी
उम्र के हस्ताक्षर चेहरों पर
पर जीवन सरिता की कलकल
हरदम नई कुछ और मनोरम
सुरभित पवन नवी कोंपल से
बन मुस्कान सजी अधरों पर

मौलिक एवं स्वरचित

श्रुत कीर्ति अग्रवाल
shrutipatna6@gmail.com

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हिंद की सेना 

जिंदगी की हर नियामत छोड़ कर वतन चुना
ठुकरा दी जिसने दौलतें बस देश-ए-रतन चुना
जान की बाजी लगाई और खून के कतरे न गिने
नमन-नमन वीरों तुमने तो माँ-भारती हर जतन चुना

नमन मेरा ऐ वीर कि तुमने जीवन ही दाँव लगा दिया
पत्थर-काँटों से डर कैसा जब मौत गले से लगा लिया
वो शौर्य तेरा जाँबाजी तेरी वो आँखों में माँ की सूरत
कटा शीश पर गर्व नयन में हर पत्थर दिल को रूला दिया

गर्व तेरा कायम रखने की अब कसम नई पीढ़ियों पर है
तेरे रक्त की कीमत से  वतन तरक्की की सीढ़ियों पर है
सीमाएँ सुरक्षित, देश सुरक्षित, शहादतों की चर्चा हवाओं में
वंदन तुम्हारा, आँखें हुईं नम,यादें बिखरी इन वीथियों पर है

मौलिक एवं स्वरचित

श्रुत कीर्ति अग्रवाल
shrutipatna6@gmail.com

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