Hey, I am on Matrubharti!

आईने का जीना भी लाजवाब है
जिसमें स्वागत सभी का है पर संग्रह किसी
का नहीं.....

जिंदगी ने हमें वह बनाया
जो हम रहे नहीं....
आज हम वह है,
जो हम थे नहीं....

खुद को कभी महसूस
कर लिया करो...
कुछ रौनकें केवल खुद
से होती है....

जिंदगी चलती जा रही है राहों से होकर बेखबर,
सफर तय कर रहे हैं मंजिलों से अनजान होकर।
अब तो आरजू है कुछ करने की ख्वाहिश,shubh!
जिन्हें पाने की दुआ कर रहे हैं दामन फैलाकर.....

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तुम्हें याद करने की फुर्सत ना होगी ,
हमें भूल जाने की आदत नहीं होगी।
तुम ही को मुबारक तुम्हारी यह आदत,
हमें आपसे कोई शिकायत न होगी।।

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चोट का गहरा होना लाज़मी था ...
वार अपनो का
ही था...