Future DOCTOR in the making, Writer,Shayar

जब नये लोग मिल जाते हैँ,
तो पुराने थोड़ी ही ना याद आते हैँ।

हर साल आता है नया साल...
पर कुछ भी नया सा नहीं लाता नया साल।

कोई हमारा भी था...
"बस कल ही की बात है"

"दोस्ती से परिवार तक - 9" by Akash Saxena read free on Matrubharti
https://www.matrubharti.com/book/19902235/dosto-se-parivar-tak-9

"BOYS school WASHROOM - 12" by Akash Saxena read free on Matrubharti
https://www.matrubharti.com/book/19902234/boys-school-washroom-12

हो चांदनी जब तक रात,
देता है हर कोई साथ...
तुम मगर अंधेरों में,
ना छोड़ना मेरा हाथ...

-Akash Saxena

दिन मे उजाला चाहें जितना भी हो
इन टूटे दिलों का गम अक्सर
रात के अंधेरों मे ही दिखता है।

-Akash Saxena

आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया। 🙏🤗❣️

"दोस्ती से परिवार तक - 8" by Akash Saxena read free on Matrubharti
https://www.matrubharti.com/book/19901636/dosto-se-parivar-tak-8

"BOYS school WASHROOM - 11" by Akash Saxena read free on Matrubharti
https://www.matrubharti.com/book/19901637/boys-school-washroom-11