Muhabbat krni h to kitabo se kro... bewfai bhi hui to kabil bna k chhodegi...#D

रिश्तों की धूप छांव से आजाद हो गए,,,
अब तो हमें भी सारे सबक याद आ गए,,,
मैं पर्वतों से लड़ता रहा, और चंद लोग,,,
गीली जमीं खोदकर, फरहाद हो गए...#D

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खुशी भी अक्सर रुला देती है मुझे,,,,
चंद गमो ने रुलाया तो मलाल क्या करना....#D

जरूरी कहा है इश्क़ में, बांहों के सहारे ही मिले,,,
किसी को जी भर के महसूस करना भी तो मुहब्बत है...#D

कुछ ख्वाब तुमने तोड़ दिए,,,
फिर वाकी मैंने देखने ही छोड़ दिए...#D

भरोसा तोड़ने वाले के लिए बस एक यही सजा काफ़ी है,,,
कि उसे जिंदगी भर की खामोशी, तोहफे में दे दी जाए...#D

तुम्हारी फिक्र के लिए, हमारा कोई रिश्ता हो,,,,

जरूरी तो नहीं....#D

सुना है वो रातों को जागता है, उससे कहना सोते हम भी नहीं,,,,
सुना है वो छुप छुप के रोता है, उससे कहना हंसते हम भी नहीं....#D

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आज फिर इस तन्हा रात में इंतजार है उसका,,,
जो कहा करता था, कि तुमसे बात न करूं तो नींद नहीं आती...#D

न जाने किस तरह का इश्क़ कर रहे है हम,,,
जिसके हो नहीं सकते, उसी के हो रहे है हम...#D

नदी के किनारों सी लिखी उसने तकदीर हमारी,,,
न कभी मिलना होगा, न जुदाई होगी हमारी...#D