विज्ञान शिक्षक, सर्वोदय बाल विद्यालय जाफराबाद, दिल्ली-53 युवा स्वतंत्र रचनाकार

एक छोटी सी सबक़ आमोज़ कहानी- लॉक डाउन
"लॉकडाउन" by Siraj Ansari read free on Matrubharti
https://www.matrubharti.com/book/19881710/lockdown

दुर्बल को न सताइये
जाकी मोटी हाय
प्रलय बनके जाने कब
कोरोना आ जाय।
-आज का कबीर😜

आज का महिला दिवस इसलिए भी खास है क्योंकि शाहीनबाग की महिलाओं ने पूरे देश की महिलाओं को उनकी शक्ति का सही अर्थ समझाया है।
😘😘😘

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***पति बचाओ***
मेरे जीवन का कागज़, देखो रह गया कोरा
गेंहू सारे चूहे खा गए, बाकी रह गया बोरा।
गेंहू सारा चूहे खा गए बोरा रह गया बाकी
हाथ मे बेलन लेके देखो भौजी उधर से झांकी।
भौजी उधर से झांकी भईया हो गयी पेला पेली
भईया अपनी टांग पकड़ के खून से खेलें होली।
दीवाली में होली देख के शर्मा जी कुछ बोले
गुप्ता जी भी तब तक आ गए आते ही यूं बोले
देखो भाई बन्धु मिलकर यूनियन एक बनाओ
नाम रखो फिर उस यूनियन का "पति बचाओ"।
कब तक ज़ुल्म सहोगे भईया अब आवाज़ उठाओ
घर का दरवाज़ा बाद में, पहले कोर्ट खटखटाओ।
जनहित में ये काम करो तो आने वाली पीढ़ी
देंगी तुमको हुक्का पानी तम्बाकू और बीड़ी।।
-सिराज अंसारी

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ट्रम्प आएगा तो सभी गरीब छुपाए जाएंगे
छुपाने को सिर्फ SC/ST मुसलमान थोड़े है,
धन्धा चौपट होगा तो सभी बनाएंगे पंचर,
यहां सिर्फ मुल्लों की दुकान थोड़े है😜😜

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अर्ज़ किया है कि...
कोई और क्या कर सकेगा हमारी बेज़्ज़ती,
हम खुद ही अपनी पिक पर हाहाहा रियेक्ट कर देते हैं
🤣🤣🤣🤣

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वो साथ हो के भी साथ नहीं होता,
लेकिन साथ होता है, साथ न हो के भी।
#सिराज अंसारी

नफरत तो सियासत ने फैलाई है वरना हमलोग तो मंदिर का प्रसाद खाते थे मग़रिब की नमाज़ के बाद🤗🤗

इस उथल पुथल ने बच्चों को भी इतना हस्सास बना दिया है कि जो बच्चे गांधी, नेहरू अम्बेडकर और संविधान का नाम तक नहीं जानते थे आज वो उनके नाम के नारे लगा रहे हैं। जिस जामिया, JNU और AMU का नाम बच्चे ग्रेजुएशन तक नहीं जानते थे वो आज वहां जा कर स्टडी करने का सपना देख रहे हैं क्योंकि वहां से हक की आवाज़ उठती है। आवाज़ उठती है गरीबों की, मज़लूमों की, पीड़ितों की दलितों की और हर पीड़ित वर्ग की।
इस आंदोलन का सबसे बड़ा फायदा मुस्लिम कौम को होगा कि अब वो अपने बच्चे बच्चियों को आला तालीम से नहीं रोकेंगे। कबाब, टिक्के, बिरयानी, पंचर की दुकान खुद लगा लेंगे लेकिन अपने बच्चों को तालीम देंगे हर हाल में। और अब वो अपने बच्चों को गली-मोहल्ले और चौराहों की ज़ीनत नहीं बनने देंगे और न ही कमउम्र में उनसे पढ़ाई छोड़कर काम करने को कहेंगे।
यही इस आंदोलन का हासिल होगा मुस्लिम कौम के लिए😊👍👍
जय हिंद
(नोट- बच्चों की वर्डिंग्स में प्रॉब्लम हो सकती है लेकिन बच्चा समझकर माफ कर् दें और उनके मन की व्यथा और उनके भविष्य पर शांत मन से आत्ममंथन करें)

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जहां नफ़रतें हों...
मुहब्बत की गुंजाइश सबसे ज़्यादा वहीं होती है।
-सिराज अंसारी