इस जगत के सफर पर निकले हम एक राही है

अधूरी कहानियों के अधूरे किस्से
कुछ खुशियां, अधिक गम
ही आये
हमारे हिस्से।

-नन्दलाल सुथार "राही"

Read More

जयशंकर प्रसाद

कल होगा क्या ये खबर नहीं,
तू आज भला क्यों रोता है,
कल की दुविधा में तुम मानव
वर्तमान भी तू क्यों खोता है।

-नन्दलाल सुथार"राही"

Read More

कई बार ये मेरा मन
क्यूँ उलझ-उलझ जाता है
कोई बात जो 'हो' जाती है
फिर उसमें खो जाता है।

-नन्दलाल सुथार"राही"

अटल

osho

राष्ट्र कवि