आओ सहृदय जननी राष्ट्रभाषा हिन्दी का सम्मान करें

प्रश्न -सैल्फी क्या है ?
उत्तर:अकेलेपन की वह अनुभूति जो अहसास कराए कि तुम्हारे साथ कोई नहीं है।



-हिन्दी जुड़वाँ

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मेरा धावक...

धैर्य (लघुकथा)
वो बार होर्न बजाते हुए, भला बुरा कहने लगा। अभी रेड लाइट ही थी..., फिर भी उसने अपना रिक्शा साइड में किया किन्तु एसी की गाड़ी में बैठा महाशय साइकिल रिक्शे वाले को डांट रहा था। गहरी सांस लेकर बोझा सिर पर उठाए खड़े व्यक्ति ने मुड़ कर कहा, बार बार होर्न मत बजाओ साहब ;आप एसी गाड़ी में बैठे हो, हम धूप में खड़े है आपसे ज्यादा जल्दी तो हमें हैं। थोड़ा धैर्य रखें। यह सुनकर अमीरजादा ने अपनी गाड़ी का सीसा ऊपर कर लिया

-हेतराम भार्गव हिन्दी जुड़वाँ

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उसने तो नहीं कहा (लघु कथा )

दिनोंदिन तापमान बढ़ता जा रहा था। सब के मुंह पर चिलचिलाती धूप और गर्मी की चर्चा थी। यही आज के समाचारों का बड़ा विषय रहा। हमेशा की तरह राजस्थान की सीमा पर प्रतिबद्ध छोटे भाई से
बात हुई।उसने बताया मृदा के कणों को बिखेरता समीर, झूलते झुक झुककर स्वागत करते पेड़,
दूर दूर दिखाई देता कहीं खग - मृग, जीवन मौन
किन्तु सूं - सूं सुनाई देता प्रकृति का गान..., सब
कुछ बहुत अच्छा अनुभव दे रहें हैं। उसने नहीं
कहा,बहुत गर्मी है। मुझे समझ आ गया है कि
ये तापमान श्रमिक, किसान, जवान
के लिए नहीं होता।
-हिंदी जुड़वाँ-

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कड़वा ही सही, सच कहता हूँ मैं।
थोड़ा सोचकर ज़बाब देता हूँ मैं।।




हिन्दी जुड़वाँ

लघुकथा: हिंदी जुड़वाँ रचित “अपना”
दिल्ली जाने वाली बस की प्रतीक्षा कर रहे थे। बस स्टैंड पर बहुत से पक्षी चहचहा रहे थे। किसी महोदय से पूछा दिल्ली वाली बस कब तक आ रही है उसने पीछे मुड़कर कहा, मुझे भी दिल्ली जाना है ,थोड़ी देर में बस आने वाली है। इतने में श्रीमान के कंधे पर किसी चिड़िया ने बीट कर दी। उसकी पत्नी ने भीड़ की शर्म न करते हुए कहा कि तुम्हें खड़ा होना नहीं आता, पास ही उनका पन्द्रह वर्षीय बेटा यह कहकर मुड़ गया, पापा आपको तो पीठ दिखाई नहीं देगी , क्या फर्क पड़ता है? मैं हैरान था, पत्नी और बेटे दोनों ने ही उस बीट को साफ करने की कोशिश नहीं की। धीरे धीरे बीट सूख चुकी थी। मेरा ध्यान उधर ही बार बार जा रहा था।बस आई और हम सब बस में बैठ गये। शाम तक दिल्ली पहुंचे। बस से उतरते हुए मैंने अपना सामान व्यतीत किया।वह महोदय भी अपने सामान को उतार रहे थे। उन का छोटा भाई उन्हें लेने आया हुआ था । उसने अपने बड़े भाई को देखकर प्रणाम किया और पीठ पर बीट देखते ही झड़काने लगा। मैं समझ गया था कि संसार में पत्नी और पुत्र से पहले अपना भाई होता है।
शिक्षा: सहृदय अपनापन

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नतमस्तक हूँ मैं,
कलम की तरह...,
नहीं समझेंगे मुझे
सिर उठा कर चलने वाले।
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-हेतराम भार्गव हिन्दी जुड़वाँ

अश्रुपूरित सहृदय श्रद्धांजलि लता मंगेशकर।
युग युग गाएगा भारत वर्ष आपके अमर स्वर।।
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अक्षर हूँ मैं तेरा।
तूं बता क्या मेरा।।
है या नहीं , बता।
तूं मुझे मत सता।।


हिन्दी जुड़वाँ

अनमोल रिश्ता.... भाई बहन का प्यार