I am reading and writing on MB besides for Delhi Press English and Hindi magazines.

Did we ever realize ,
That what we today have ,
Is always more than we gave

March 3 वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ डे के अवसर पर -
हमारा वतन है जंगल ,
जंगल में ही हमारा मंगल ,
माना हम नहीं हैं इंसान ,
पर हम में भी है जान ,
फिर क्यों हरते हो हमारे प्राण ,
वन्य जीवन और सम्पदा जो अभी बचाओगे ,
तभी अपने बच्चों को खुश देख पाओगे

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कोई जरूरी नहीं कि बंद आँखें सो रही हों ,
कोई जरूरी नहीं कि खुली आँखें देख रही हों .

Enjoy the little things of the present ,
If you fail may have to repent ,
For missing joy of this moment ,
When you realise those little things ,
You will see that they were
By no means little happenings .

छोड़ कर हमारा दामन तुम कहाँ जाओगे ,
हसीं चेहरे बहुत मिल जायेंगे मगर ,
हमारे जैसा दिल कहाँ पाओगे

बंद आँखों में सपने संजोये हैं कितने ,
काश हमारी आँखों में तुम देख पाते ,
तो हमारे दर्द को समझ सकते

महान स्वतन्त्रता सेनानी वीर सावरकर के जन्म दिवस पर उनकी याद में उनकी एक पंक्ति


“ हे मातृभूमि , तुजसाठी मरण , ते जनन I , तुजविण जनन , ते मरण II “

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मिलता है जहाँ सागर से गगन ,
काश वहां होता अपना मिलन ,
छोड़ कर दुनिया की भीड़ ,
बसा लेते अपना अलग नीड़

Some things are always expensive catch ,
Like German machines and American dollars ,
But on this planet Indian wives have no match .

वक़्त को रुकना नहीं आता है
अच्छा या बुरा जैसा भी हो
वक़्त गुजर ही जाता है
बुरे वक़्त पे दिल न छोटा कीजिये
अँधेरी रात के बाद सवेरा होता है .

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