Best Humour stories stories in hindi read and download free PDF

शादी और लॉकडाउन
by Swapnil Srivastava Ishhoo
  • 353

शादी और लॉकडाउन (पार्ट 1): परम की शादी हर नए जोड़े की तरह परम भी बहुत खुश था, आज उसकी शादी जो थी | कितनी सारी तैयारियां, कितने सारे ...

बेटे से हारा नहीं हूँ - एक व्यंग
by r k lal
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बेटे से हारा नहीं हूँ- एक व्यंग आर0 के0 लाल                 देशी कहावत है कि “बाप सबसे जीत सकता है लेकिन अपने बेटे से ही हार जाता है”। ...

दो बाल्टी पानी - 23
by Sarvesh Saxena
  • 358

गुप्ता जी ने पिंकी की ओर घूरकर देखा और बोले “ अरे पिंकिया का जरूरत थी ऐसी आंधी पानी में पानी भरने की वह भी अंधेरे में, अरे हमें ...

एक चूहे का जिहाद
by Atul Kumar Sharma ” Kumar ”
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बुधवार के दिन हृदय पर एक बोझ आ गया । रिद्धि सिद्धि के दाता गौरी पुत्र के खासमखास का मर्डर मेरे हाथों हो गया। जो में नही चाहता था ...

जो घर फूंके अपना - 53 - चले हमारे साथ! - अंतिम भाग
by Arunendra Nath Verma
  • 457

जो घर फूंके अपना 53 ----------चले हमारे साथ! पर अगले ही क्षण आई असली मुसीबत ! उस पार की तो छोडिये, इस पार ही, यानी रेस्तरां के दरवाज़े से, ...

दो बाल्टी पानी - 22
by Sarvesh Saxena
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गुप्ता जी और गुप्ताइन बड़े परेशान थे, कि पिंकी अब तक क्यूँ नहीं आई और मौसम उन्हें और डरा रहा था, गुप्ता जी आखिर पिंकी को ढूंढने घर से ...

जो घर फूंके अपना - 52 - चक्कर पर चक्कर, पेंच में पेंच
by Arunendra Nath Verma
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जो घर फूंके अपना 52 चक्कर पर चक्कर, पेंच में पेंच इस बार लक्षण अच्छे थे. प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में कोई फेर बदल नहीं हुआ. नियत दिन हमने पालम ...

जो घर फूंके अपना - 51 - फिर वही चक्कर
by Arunendra Nath Verma
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जो घर फूंके अपना 51 फिर वही चक्कर इसके बाद दो एक महीने बिना कुछ असामान्य घटना के बीत गए. पिताजी ने बताया तो था कि मुझसे मिलने किसी ...

सत्ते मास्साब
by राजेश ओझा
  • 802

सत्ते मास्साब जितने योग्य अध्यापक हैं उतने ही अच्छे विद्यार्थी भी थे..छात्र जीवन से प्रारंभ हुआ उनका प्रतिभा प्रदर्शन आज तक बिला नागा गतिमान है..आज भी कोई बात हो ...

समय यात्रा
by suraj sharma
  • 443

मै भविष्य से आया हूँ और आपको आने वाले १० सालो तक की सारी घटनाये बता सकता हूँ, २०३० तक दुनिया में क्या क्या होने वाला है वो सब ...

लॉकडाउन के पकौड़े
by Archana Anupriya
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             " लॉकडाउन के पकौड़े"बाहर बूँदाबादी हो रही थी।मौसम बड़ा ही सुहावना था।ठंडी हवा,हरियाली का नजारा और लॉकडाउन में घर बैठने की फुरसत - मैं बड़े आराम से अपनी सातवीं ...

जो घर फूंके अपना - 50 - ज़िंदगी भर नहीं भूलेगी वो
by Arunendra Nath Verma
  • 434

जो घर फूंके अपना 50 ज़िंदगी भर नहीं भूलेगी वो --- शाम को ठीक सात बजे मैं वोल्गा रेस्तरां में दाखिल हुआ तो एक नीची टेबुल के सामने सोफे ...

दो बाल्टी पानी - 21
by Sarvesh Saxena
  • 500

आँधी के साथ तेज बारिश शुरू हो चुकी थी पिंकी सड़क के उस पार वाले नल के पास नीम के पेड़ के नीचे खड़ी सुनील की राह देखते-देखते परेशान ...

जो घर फूंके अपना - 49 - और अब पुलिस पीछे पड़ गयी
by Arunendra Nath Verma
  • 333

जो घर फूंके अपना 49 और अब पुलिस पीछे पड़ गयी दिल्ली वापस पहुंचकर हैदराबाद की उड़ान वाले उस अप्रिय प्रसंग को भूलने की कोशिश कर ही रहा था ...

तोता उवाच:
by Annada patni
  • 772

तोता उवाच: अन्नदा पाटनी चिलचिलाती धूप, सुनसान सड़कें, किनारे पर खड़े इक्का दुक्का पेड़ जिन पर हरे पत्तों की दो चार डाल और बाक़ी ठूँठ । गरम हवा में ...

राशिफ़ल(अंतिम भाग)
by किशनलाल शर्मा
  • 467

हम सोचते सोचते शाहगंज के चौराहे पर आ पहुँचे थे।चौराहे पर आकर लाइन लगाकर खड़े रिक्शो पर हमने नज़र डाली थी।हम आज ऐसे रिक्शे में बैठना चाहते थे।जिसको चलाने ...

राशिफ़ल - 1
by किशनलाल शर्मा
  • 649

अखबार आते ही रोज़ की तरह दिन भर का भविष्य जानने के लिए,पेज पलटा।राशिफ़ल वाले कालम में अपनी राशि पर नज़र पड़ते ही आंखे फ़टी सी रह गई।कंही गलती ...

जो घर फूंके अपना - 48 - जान बची तो लाखों पाए
by Arunendra Nath Verma
  • 411

जो घर फूंके अपना 48 जान बची तो लाखों पाए हम जल्दी ही भोपाल के ऊपर उड़ते हुए भोपाल कंट्रोल को अपनी पोजीशन रिपोर्ट देते लेकिन भोपाल के ठीक ...

चूरमा प्रसादी
by Kumar Gourav
  • 544

कल विवाह पंचमी पर संस्कृति बचाओ समिति द्वारा चौक पर हर साल की तरह इस बार भी जानकी विवाह का खेला हो रहा था । खालिद मियाँ विधायक के ...

बस नमक ज़्यादा हो गया - 4 - अंतिम भाग
by Pradeep Shrivastava
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  • 646

बस नमक ज़्यादा हो गया - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 4 सादगी से शादी करने के उसके लाख आग्रह के बावजूद उसके मां-बाप बड़े धूमधाम से शादी कराने के लिए ...

जो घर फूंके अपना - 47 - गरजत बरसत सावन आयो री !
by Arunendra Nath Verma
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जो घर फूंके अपना 47 गरजत बरसत सावन आयो री ! घड़ी की सेकेण्ड वाली सुई ने घूमकर इधर ठीक आठ बजाए और समय की अतीव पाबंदी के साथ, ...

दो बाल्टी पानी - 20
by Sarvesh Saxena
  • 609

उधर सुनील को होश आया तो सरला की जान मे जान आई, वो उसके माथे पे हाथ रखके बोली, "अब कैसा लग रहा है तुझे? तूने तो हमारा कलेजा ...

बस नमक ज़्यादा हो गया - 3
by Pradeep Shrivastava
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बस नमक ज़्यादा हो गया - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 3 थाने की हर महिला एम्प्लॉई को वह अपनी रखैल समझता था। सबको उसने कोई ना कोई नाम दे रखा ...

जो घर फूंके अपना - 46 - बड़ी कठिन थी डगर एयरपोर्ट की - 2
by Arunendra Nath Verma
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जो घर फूंके अपना 46 बड़ी कठिन थी डगर एयरपोर्ट की - 2 पता नहीं मेरा गिडगिडाना सुनकर उन्हें दया आ गई या उन्हें लगा कि वह दूधवाला हमें ...

लुप्त होता इंद्रधनुष
by Kailash Banwasi
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लुप्त होता इंद्रधनुष कैलाश बनवासी ...और सारी आठवीं कक्षा ठहाकों में जैसे नाचने लगी-हा-हा-हा! हो-हो-हो! ही-ही-ही...! मैं भीतर ही भीतर चोट खाए साँप की तिलमिलाहट से भर गया। मन ...

फर्जी फेसबुक अकाउंट
by Pragya Chandna
  • 553

आज लाॅकडाॅउन का पहला दिन है और मनीष घर पर सुबह से बोर हो रहा है। उसे समझ ही नहीं आ रहा कि वह क्या करें, पहले तो दिनभर ...

बस नमक ज़्यादा हो गया - 2
by Pradeep Shrivastava
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बस नमक ज़्यादा हो गया प्रदीप श्रीवास्तव भाग 2 ऑरिषा ने सोचा घर पर यह बात अम्मा को पापा बताएंगे तो अच्छा होगा। देखते हैं वह खुश होती हैं, ...

जो घर फूंके अपना - 45 - बड़ी कठिन थी डगर एयरपोर्ट की - 1
by Arunendra Nath Verma
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जो घर फूंके अपना 45 बड़ी कठिन थी डगर एयरपोर्ट की -1 स्थायी/ अस्थायी प्रोपोज़ल वाली दुर्घटना के बाद मैं कुछ दिनों तक प्रतीक्षा करता रहा कि भाई साहेब ...

बर्तन इफेक्ट ...(व्यंग्य)
by Sunil Jadhav
  • 1.1k

लेखक:-डॉ.सुनील गुलाबसिंग जाधव, नांदेड़, भारत मो.९४०५३८४६७२   सूर्य देवता की लोरी सुनकर बाबूराव बिस्तर पर घड़ी की तरह गोल घूमते हुए निंद्रा रस का पान करते सुहाने सपनों के ...

चतुर दर्जी
by राज बोहरे
  • 759

लोक कथा-                चतुर दर्जी                                 सत्यप्रकाश नाम का दर्जी कपड़े सीने में बड़ा माहिर था। वह नयी-नयी डिजायन के कपड़े सीता था। इस कारण उसके यहाँ ग्राहकों की ...