Best Novel Episodes stories in hindi read and download free PDF

मैं तो ओढ चुनरिया - 27
by Sneh Goswami
  • 105

  मैं तो ओढ चुनरिया अध्याय – सत्ताइस   मामा का पागलपन थमने का नाम ही नहीं ले रहा था । हर रोज वे अपने पागलपन में किसी को ...

रेज़्यूमे वाली शादी - भाग 7
by Daanu
  • 138

"अब मैं चलती हूँ, आज के लिए काफी हो गया", यह कहकर अवनी वहाँ से उठकर चली गई और निलय उस टेबल पर बैठकर बिना कुछ कहे, बस उसके ...

नैनं छिन्दति शस्त्राणि - 5
by Pranava Bharti
  • 129

5- “चाय बनाऊँ न मैडम?” “मैडम ! चाय” बना लूँ, पीएंगे न ?” युवक को समिधा से दोबारा पूछना पड़ा था ---समिधा उसकी बात सुन ही नहीं पाई थी, ...

एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 19
by ARUANDHATEE GARG मीठी
  • 252

तीनों ही ऑडिटोरियम के अंदर आए । आरव दरवाज़े की ओर ही देख रहा था । जब उसने तीनों को आते देखा तो फटाक से उनके सामने हाज़िर हो ...

संस्कृत वांग्मय में धनुर्विज्ञान
by Dr Mrs Lalit Kishori Sharma
  • 81

संस्कृत वांग्मय में उच्च कोटि के आध्यात्मिक ज्ञान के साथ ही उच्चतम विज्ञान के भी दर्शन होते हैं अति प्राचीन काल से शारीरिक शिक्षा का चरमोत्कर्ष धनुर्वेद विज्ञान में ...

हाँ, मैं भागी हुई स्त्री हूँ - (भाग पन्द्रह) - अंतिम भाग
by Dr Ranjana Jaiswal
  • 315

(भाग पन्द्रह) आँख के ऑपरेशन के लिए चेन्नई जाना चाहती थी। दो साल पहले एक आँख का ऑपरेशन कराया था, उस पर भी झिल्ली आ गयी है । दूसरी ...

टापुओं पर पिकनिक - 27
by Prabodh Kumar Govil
  • 309

आर्यन की ड्यूटी यहां लगी, बाक़ी लोगों को बाद में बताने के लिए कहा गया। हां, सिद्धांत को भी वेटिंग में रोक लिया गया।असल में ये इंफॉर्मेशन उनके पुराने स्कूल ...

दैहिक चाहत - 20 - अंतिम भाग
by Ramnarayan Sungariya
  • 411

उपन्‍यास भाग—२०   दैहिक चाहत –२०                                               ...

हिंदी कविता में जनचेतना
by Dr Mrs Lalit Kishori Sharma
  • 117

काव्य मानव चेतना की एक स्वत: संभूत प्रवृत्ति है जिसका संबंध चेतना के अंतरंग से है। साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं अपितु वह समाज का सृष्टा निर्माता और ...

एक थी...आरजू - 4
by Satyam Mishra
  • 282

                 उस दिन सारा टाइम आरजू शहजाद की बाइक पर उसके गले में अपनी बाहों का फंदा डाले घूमती फिरती रही। सबसे पहले ...

ये उन दिनों की बात है - 28
by Misha
  • 372

पहली बार मैं किसी लड़के की मोटरसाइकिल पर बैठी थी और वो लड़का कोई और नहीं बल्कि सागर था, "मेरा सागर" जिसे मैं बहुत ज्यादा चाहती थी | फिर ...

इश्क़ है तुमसे ही - 16
by Jaimini Brahmbhatt
  • 522

......१ साल बाद...,रात का वक्त - जैसलमेर का महल ,शीवांगी  कुुुसन से बात कर रही थी।शीवांगी?:-शाबाश.! कुशन अब हमारे पास सारे सबूत है।कुुुशन?:-जी कुँवरिसा.!आपकी वजह से।शीवांगी?:-नही,कुुुसन आपकी भी मेहनत है, ...

नैनं छिन्दति शस्त्राणि - 4
by Pranava Bharti
  • 222

4— गुजरात की सीमा पार करने के कुछ समय बाद से सपाट इलाका शुरू हो गया जिसमें दूर-दर तक वनस्पति जैसी कोई चीज़ नज़र नहीं आ रही थी।आँखों के ...

सपनो के महल - 1 - सृष्टि और आरव की दोस्ती
by Umang Chauhan
  • 414

गुजरात के अहमदाबाद में सृष्टि नाम की एक लड़की रहती है। उसका इस दुनिया में कोई नहीं है। सृष्टि बचपन से ही बहुत होशियार और समझदार थी।    सृष्टि ...

हाँ, मैं भागी हुई स्त्री हूँ - (भाग चौदह)
by Dr Ranjana Jaiswal
  • 327

(भाग चौदह) कभी -कभी बहुत गुस्सा आता है अपने छोटे बेटे आयुष पर। वह मुझसे इतना अकड़ा हुआ क्यों रहता है?इतने घमंड, उपहास, उपेक्षा से बात करता है कि ...

टापुओं पर पिकनिक - 26
by Prabodh Kumar Govil
  • 753

आर्यन और आगोश में बहस छिड़ गई।दोनों ही शराब पी रहे थे।आगोश बुरी तरह पीने लगा था। वह अब ब्रांड, स्वाद, तासीर, असर कुछ नहीं देखता था। अब वो ...

मिड डे मील - 7
by Swatigrover
  • 297

7   क्लॉस में बच्चों को देख केशव खुश हों रहा था। उसने पूरी क्लॉस को देखा और चुपचाप एक कोने में बैठ गया। तभी मास्टरजी आये और केशव ...

एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 18
by ARUANDHATEE GARG मीठी
  • 423

शाम को सभी दोस्त अपने फेवरेट रेस्टोरेंट में डिनर करते है , जहां सभी रेहान को भी बुला लेते हैं और आज की अंशिका की बातों को याद कर ...

त्रिधा - 13
by Ayushi Singh
  • 432

शाम को त्रिधा बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपने हॉस्टल के लिए लौट रही थी कि तभी उसने कुछ ऐसा देखा जिसे देखकर वह हैरान रह गई। दरअसल त्रिधा ने ...

एक वरदान - संभोग - 04
by Satish Thakur
  • 1.6k

एक वरदान – संभोग 04 संभोग एक आनंद दायक क्रिया है संपूर्ण संसार का सार या कहें की मानव जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार अगर कुछ है तो वो ...

नियति ...can’t change by anybody - 3
by PRATIK PATHAK
  • 627

अमित को उसकी सहायक मिल चुकी थी जिसकी वजह से एक तीर  से तीन शिकार हुए थे उसके कॉलेज की नौकरी बच गई और उसको अपना रिसर्च में कुछ ...

दैहिक चाहत - 19
by Ramnarayan Sungariya
  • 747

उपन्‍यास भाग—१९ दैहिक चाहत –१९                                                 ...

स्टेट बंक ऑफ़ इंडिया socialem(the socialization) - 9
by Nirav Vanshavalya
  • 249

 उसका यह सौभाग्य था कि उसे ब्रिटिश ध्वज की छाया मिल रही थी.  इंडोनेशिया का लोकतंत्र  ब्रिटिश एंपायर की निगरानी में चल रहा   है.  बेशक यहां लोकतंत्र तो है मगर आज ...

श्री सूर्यकांत त्रिपाठी निराला व्यक्तित्व और कृतित्व
by Dr Mrs Lalit Kishori Sharma
  • 225

व्यक्तित्व और कृतित्व के धनी श्री सूर्य कांत त्रिपाठी निराला अपने नाम के सदृश ही हिंदी साहित्य में भी निराला स्थान बनाए हुए हैं। किसी भी कवि के कृतित्व ...

वो अनकही बातें - 17
by RACHNA ROY
  • 702

हम दोनों वापस जाएंगे। और अब आगे।।फिर आ गया वो दिन जिसका इंतजार समीर को था।उसने नर्स को बोल दिया था कि फुलों की लड़ियों से सजा दे शालू ...

हाँ, मैं भागी हुई स्त्री हूँ - (भाग तेरह)
by Dr Ranjana Jaiswal
  • 450

(भाग तेरह) छोटा बेटा आयुष न तो खुद फोन करता है, न मेरे किसी मैसेज का जवाब देता है। बड़ा बेटा आदेश कहता है कि वह आपसे बात नहीं ...

टापुओं पर पिकनिक - 25
by Prabodh Kumar Govil
  • 924

- बेवकूफ़! अक्ल है कि नहीं तुझ में?आगोश ने कुछ हंसते हुए कहा। पर वो कुछ न बोली। उसी तरह चुपचाप अपने काम में लगी रही।असल में घर की ...

इश्क़ है तुमसे ही - 15
by Jaimini Brahmbhatt
  • 495

(शीवांगी राजस्थान आ गई है वो रुद्राक्ष को मिलने बुलाती है।अब आगे....)सुबह होते ही रुद्राक्ष उठ रात बारे में सोच खुश हो जाता है ।तभी उसके फोन में शीवांगी ...

टेढी पगडंडियाँ - 7
by Sneh Goswami
  • 360

  7   समाज में लङकी होकर जीना बहुत मुश्किल है । यह बात जो जीव लङकी बन कर पैदा होता है , वही समझ सकता है । घर ...

मैं तो ओढ चुनरिया - 26
by Sneh Goswami
  • 423

  मैं तो ओढ चुनरिया अध्याय 26   उम्मीद तो यह थी कि रात को दिये इंजैक्शन से भरपूर नींद लेने के बाद मामाजी एकदम तरोताजा होकर उठेंगे और ...