Best Social Stories stories in hindi read and download free PDF

अपने-अपने कारागृह - 3
by Sudha Adesh

 अपने-अपने कारागृह-2अजय का देवघर स्थानांतरण हुआ तो अजय ने अपने मां -पापा को बाबा बैजनाथ के दर्शन के लिए बुला लिया । बुलाया तो अजय ने उसके मम्मी- डैडी ...

आपकी आराधना - 8
by Pushpendra Kumar Patel

                           भाग - 08    " दुश्मन ही तो है, इस लड़की ने न जाने आप दोनो पर क्या जादू कर दिया है, आप ये तक भूल गये कि ...

जी उठा तुलसी का पौधा
by Sunita Maheshwari

जी उठा तुलसी का पौधा “बन्नो तेरी अँखियाँ सुरमे दानी, बन्नो तेरा टीका लाख का रे......” | शुभदा बड़ी तन्मयता से गाते हुए, गहने पहन कर शीशे में देख ...

इतना बड़ा सच(भाग 3)
by किशनलाल शर्मा
  • 99

पिछली बार पंकज आया तब राम बाबू बोले थे,"बहु को भी सा"थ ले जा।"".   अभी मैं होस्टल मे रहता हूँ।मकान मिलने पर ले जाऊंगा"आज पंजज ने मकान मिलने ...

30 शेड्स ऑफ बेला - 30 - अंतिम भाग
by Jayanti Ranganathan
  • 81

30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Day 30 by Sudarshana Dwivedi सुदर्शना द्विवेदी एक थी बेला " मैं मर जाऊंगा, भूख से जान निकल ...

बात बस इतनी सी थी - 25
by Dr kavita Tyagi
  • 246

बात बस इतनी सी थी 25. इसी तरह चैन और सुकून से मेरे दो सप्ताह बीत गये । दो सप्ताह बीतने के बाद रविवार के दिन माता जी ने ...

सुलझे...अनसुलझे - 1
by Pragati Gupta
  • 171

सुलझे….अनसुलझे!!! (भूमिका) ------------------------ जब किसी अपरिचित की पीड़ा अन्तःस्थल पर अनवरत दस्तकें देने लगती हैं, तब उसकी कही-अनकही पीड़ा हमको उसके बारे में बहुत कुछ सोचने और जानने के ...

लहराता चाँद - 12
by Lata Tejeswar renuka
  • 72

लहराता चाँद लता तेजेश्वर 'रेणुका' 12 संजय जब घर पहुँचा अवन्तिका टेबल पर बैठकर पढ़ रही थी। अनन्या उससे होमवर्क करवा रही थी। अवन्तिका बीच-बीच में अनन्या को सवाल ...

उलझन - 15
by Amita Dubey
  • 450

उलझन डॉ. अमिता दुबे पन्द्रह रविवार को सुबह दस बजे अंशिका सोमू के मम्मी-पापा के साथ कलिका के यहाँ आ गयी। वह सोमू के साथ खड़े होकर लाॅन में ...

डॉग शो
by Deepak sharma
  • 117

डॉग शो चन्द्ररूपिणी को उसके माता-पिता के साथ उसके नाना हमारे घर लाए थे| सन् १९६८ में| हमारी छत के एकल कमरे में उन्हें ठहराने| हमारे दादा और उसके ...

गूगल बॉय - 19 - अंतिम भाग
by Madhukant
  • 159

गूगल बॉय (रक्तदान जागृति का किशोर उपन्यास) मधुकांत खण्ड - 19 पहले तो गूगल घर में बने बाँके बिहारी मन्दिर में जाकर कभी-कभी वन्दना करता था। विशेषकर तब जब ...

BOYS school WASHROOM - 6
by Akash Saxena
  • 96

तभी पीछे से यश की पैंट खींचकर विहान यश से पूछता है'क्या हुआ भैया किसे ढूंढ रहे हो आप'... यश एक गहरी सांस लेता है और यश को गोद ...

जिंदगी मेरे घर आना - 22
by Rashmi Ravija
  • 471

जिंदगी मेरे घर आना भाग- २२ शरद उसे देखते ही एकदम अटेंशन की मुद्रा में खड़ा हो गया और झुक कर फूल आगे बढ़ा दिए.विमूढ़ सी नेहा ने फूल ...

इक समंदर मेरे अंदर - 24
by Madhu Arora
  • 96

इक समंदर मेरे अंदर मधु अरोड़ा (24) उसका कितनी चतुराई से ब्रेन वॉश किया गया होगा। उसे उन्मादी बनने को उकसाया गया होगा...ऐसे ही तो इस तरह के घृणित ...

गवाक्ष - 42
by Pranava Bharti
  • 90

गवाक्ष 42== चिकित्सकों ने मंत्री जी को मृत घोषित कर दिया। मंत्री जी के सुपुत्र पहले ही से उपस्थित थे, पिता के न रहने की सूचना जानकर उनकी ऑंखें अश्रु-पूरित ...

आभास
by Ramnarayan Sungariya
  • 186

कहानी--                             आभास                                                    आर. एन. सुनगरया                       आदतानुसार मैंने बाहर से आते ही टेबल पर जेबों का सामान पटकना प्रारम्‍भ किया, तभी ...

मृत संवेदनाएं
by Goodwin Masih
  • 174

मृत संवेदनाएं गुडविन मसीह दो नौकरों के साथ हरीश ने अपनी दादी जी का रूम खोला और नौकरों को सख्त हिदायत देते हुए कहा,‘‘ दो दिन के अन्दर यह ...

इतना बड़ा सच(भाग 2)
by किशनलाल शर्मा
  • 228

वह कुछ चिड़चिड़ी हो गई थी।शायद सास बनते ही औरत में कुछ गुण स्वत् ही आ जाते है।राम बाबू कपड़े बदलते हुए मन ही मन सोच रहे थे।पंकज के ...

30 शेड्स ऑफ बेला - 29
by Jayanti Ranganathan
  • 159

30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Episode 29 by Nalini नलिनी सुब्रमण्यम इस शाम की कब होगी सुबह? दिल्ली की एक खूबसूरत शाम। थोड़ी ...

बात बस इतनी सी थी - 24
by Dr kavita Tyagi
  • (12)
  • 495

बात बस इतनी सी थी 24. पिछले दो वर्षों में माता जी ने मेरी वजह से जितना अकेलापन भोगा था, मैं किसी भी तरह उसकी भरपाई करना चाहता था ...

ज़िन्दगी सतरंग.. - 1
by Sarita Sharma
  • 201

अम्मा की नजरें सामने आती स्कूटी की तरफ़ ही टिकी हुई थी.. कौन है? कौन नहीं ये जानने के लिए अम्मा बेख़ौफ़ होकर सड़क पर स्कूटी के सामने ही ...

रिश्ते बेमानी
by padma sharma
  • 306

रिश्ते बेमानी       कामिनी अपने पति विकास और बच्चे के साथ महाकौशल एक्सप्रेस में झाँसी से जबलपुर की यात्रा पर थी। ट्रेन अपने पूरे वेग से दौड़ ...

दी लॉक डाउन टेल्स :कुछ खट्टी कुछ मीठी - भाग 2 - सपनो का घर
by RISHABH PANDEY
  • 3.8k

विवेक दत्त के दो पुत्र श्याम और राधे थे। विवेक दत्त जी ज्यादा पढे लिखे नही थे लेकिन शिक्षा का महत्व बखूबी समझते थे। इस लिये विवेक दत्त जी ...

लिव इन लॉकडाउन और पड़ोसी आत्मा - 8 - अंतिम भाग
by Jitendra Shivhare
  • 189

लीव इन लॉकडाउन और पड़ोसी आत्मा जितेन्द्र शिवहरे (8) "धरम! ये तुम्हें क्या हो गया है। जागो! ये पापीन हम दोनों को मारकर संसार में हा-हा-कार मचा देगी।" बाबा ...

लहराता चाँद - 11
by Lata Tejeswar renuka
  • 93

लहराता चाँद लता तेजेश्वर 'रेणुका' 11 रम्या के देहान्त के बाद संजय ने अब तक अकेले ही जिंदगी गुजारी है। आस-पड़ोस और दोस्त ने दूसरी शादी करने के लिए ...

उलझन - 14
by Amita Dubey
  • 141

उलझन डॉ. अमिता दुबे चैदह ड्राइवर ने पूरा घटनाक्रम बता डाला। जो बात माॅल के अन्दर रहते हुए भूमि, अंशिका, सौम्या आदि को नहीं पता थी वह बात पार्किंग ...

गूगल बॉय - 18
by Madhukant
  • 189

गूगल बॉय (रक्तदान जागृति का किशोर उपन्यास) मधुकांत खण्ड - 18 सुबह माँ घर में बने बाँके बिहारी जी के मन्दिर में पूजा करके पलटी तो सामने गूगल खड़ा ...

जिंदगी मेरे घर आना - 21
by Rashmi Ravija
  • 672

जिंदगी मेरे घर आना भाग – २१ स्कूल की प्रिंसिपल छाया गुहा को देखकर मम्मी-डैडी एकदम निश्चिन्त हो गए.छाया दी, बहुत स्नेहिल थीं. उन्होंने मम्मी-डैडी को पूरा आश्वासन दिया ...

इक समंदर मेरे अंदर - 23
by Madhu Arora
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इक समंदर मेरे अंदर मधु अरोड़ा (23) उसे छोड़ने से पहले वह भी तो हज़ार बार सोचेगी। सोचेगी ही नहीं, नौकरी छोड़ने के ऑफ्टर इफेक्ट्स भी देखेगी। एक औरत ...

गवाक्ष - 41
by Pranava Bharti
  • 78

गवाक्ष 41== कुछ ही देर में कार मंत्री सत्यप्रिय के बंगले के बाहर जाकर रुकी। मार्ग में कुछ अधिक वार्तालाप नहीं हो सका था। मंत्री जी के बंगले के ...