Best Social Stories stories in hindi read and download free PDF

लाईट हाउस...
by Dr Vinita Rahurikar

लाईट हाउस... पूजा करने के बाद समय काटने के लिए सविता जी एक पत्रिका लेकर बाहर ड्राइंग रूम में आकर सोफे पर बैठ गई। पढ़ने से अधिक अच्छा तरीका ...

महामाया - 3
by Sunil Chaturvedi

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – तीन अखिल ने खिड़की के सामने लगा परदा हटाया और खिड़की खोल दी। ताजी ठंडी हवा का एक झोंका कमरे में प्रवेश कर गया। ...

देह की दहलीज पर - 11
by Kavita Verma

साझा उपन्यास  देह की दहलीज पर  संपादक कविता वर्मा लेखिकाएँ  कविता वर्मा  वंदना वाजपेयी  रीता गुप्ता  वंदना गुप्ता  मानसी वर्मा  कथाकड़ी 11 अब तक आपने पढ़ा :- मुकुल की उपेक्षा से ...

हूफ प्रिंट - 13 - अंतिम भाग
by Ashish Kumar Trivedi

हूफ प्रिंट Chapter 13 चंदर ने अपना जुल्म कबूल कर लिया। अपने बयान में उसने सारी कहानी सुनाई। बचपन से ही चंदर को फिल्मों का बहुत शौक था। अक्सर ...

तस्वीर में अवांछित - 3 - अंतिम भाग
by PANKAJ SUBEER

तस्वीर में अवांछित (कहानी - पंकज सुबीर) (3) लड़की ने जो टीवी पर फिल्म देख रही थी अंदर जाकर कुछ सामान ज़ोर से पटका और फिर किसी खिड़की या ...

निर्मम अंधेरे
by Husn Tabassum nihan
  • 86

निर्मम अंधेरे ‘‘ हे....दीदी, तू हिजड़ी है का ?‘‘ -छुटके ने तपाक से बोला तो डेहरी पर से लहसुन का झाबा उतारती नैय्या भीतर तक सुलग गई। छुटके को ...

पसंद अपनी अपनी - 1
by किशनलाल शर्मा
  • 11

"बिजली घर-बिजली घर---ऑटोवाला ज़ोर ज़ोर से आवाज लगा रहा था।उमेश को देखते ही ऑटो वाले ने पूछा था।"कमलानगर जाना है।""कमलानगर के लिए बिजलीघर से  बस मिलेगी,"ऑटोवाला बोला,"आइये।आपकेे बैठते ही ...

बेटी - भाग-४
by Anil Sainger
  • 15

यह सब उस जमाने तक ठीक था जब औरत घर से बाहर नहीं निकलती थीं | तब वह केवल घर और बच्चों तक ही सीमित थीं | आज वक्त ...

होने से न होने तक - 18
by Sumati Saxena Lal
  • 27

होने से न होने तक 18. कौशल्या दीदी उठ कर खड़ी हो गयी थीं और खाना शुरू कराने के लिए सबकी प्लेटों में परोसने लगी थीं। सब लोग अपनी ...

किसी ने नहीं सुना - 11
by Pradeep Shrivastava
  • 63

किसी ने नहीं सुना -प्रदीप श्रीवास्तव भाग 11 इस बार उसके और ज़्यादा इठला के बोलने ने मुझे एकदम सचेत कर दिया, कि यह उस एरिया में चलती-फिरती गर्म ...

ऐसा हाे तो
by HARIYASH RAI
  • 461

कहानी ऐसा हो तो ......... हरियश राय   बी. ए करने के बाद बैजनाथ  को एक  मैन्‍यूफैक्‍चरिंग   कंपनी में  एकाउंटस का काम  करने का मौका मिला तो उसने इस ...

कागज के टुकड़े
by Archana Anupriya
  • 465

"कागज के टुकड़े" -अर्चना अनुप्रिया सुबह से ही घर में हंगामा था।सारी सोसायटी के लोग महेशनाथ जी के घर के आगे जमा हो रहे थे। कल रात कोई चोर महेशनाथ ...

लाचारी
by Rajesh Kumar
  • 457

समझ में आता है कि किस प्रकार कोई व्यक्ति ना चाहते हुए भी दुनिया की चमक धमक से समझौता करता है उसे पता होता है कि शासन तंत्र के ...

हूफ प्रिंट - 12
by Ashish Kumar Trivedi
  • 495

हूफ प्रिंट Chapter 12 नंदन ने उन्हें बताया कि चंदर इस समय स्टड फार्म में नहीं है। वह अपनी माँ से मिलने गया है। कल दोपहर तक लौट आएगा। ...

रक्षाबंधन के बहाने
by Rita Gupta
  • 487

 रक्षाबंधन पिछले तीन-चार या शायद उस से भी अधिक महीनों से भैया ने मुझे फोन नहीं किया था। गाहे बगाहे मैं जब फोन करती, भैया से बातें हो नहीं पाती। भाभी ...

कुबेर - 33
by Hansa Deep
  • 502

कुबेर डॉ. हंसा दीप 33 धीमी गति से ही सही ये परेशानियों भरे दिन निकल रहे थे। धीरम के लिए न जाने कितने लोगों की दुआएँ काम आयीं। तक़रीबन ...

हूफ प्रिंट - 11
by Ashish Kumar Trivedi
  • 289

हूफ प्रिंट Chapter 11 अरमान ने जहाँ किसी के होने का शक जताया था वहाँ से ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिसके आधार पर किसी पर शक किया जा ...

बेटी - भाग-३
by Anil Sainger
  • 257

मेरी नौकरी लगे अभी डेढ़ साल ही हुआ था कि मेरी माँ को मेरी शादी का भूत सवार हो गया | मैं जब भी रात के खाने के लिए ...

देह की दहलीज पर - 10
by Kavita Verma
  • (21)
  • 545

साझा उपन्यास  देह की दहलीज पर  संपादक कविता वर्मा लेखिकाएँ  कविता वर्मा  वंदना वाजपेयी  रीता गुप्ता  वंदना गुप्ता  मानसी वर्मा  कथाकड़ी 10 अब तक आपने पढ़ा :-मुकुल की उपेक्षा से ...

तस्वीर में अवांछित - 2
by PANKAJ SUBEER
  • 245

तस्वीर में अवांछित (कहानी - पंकज सुबीर) (2) रंजन उठ कर टीवी चालू करना चाह ही रहा था कि अचानक वही पता नहीं कौन से नाम वाला आ गया ...

उदासियों का वसंत - 2
by Hrishikesh Sulabh
  • 499

उदासियों का वसंत हृषीकेश सुलभ (2) .......पाँच बरस बीत गए टुशी को देखे। गई, तब से एक बार भी नहीं लौटी। अब तो इस साल बाईसवाँ लगेगा उसका। यूनिवर्सिटी ...

मौसम चुनाव का
by sonal singh
  • 323

राजनीति अब काली कोठरी है। सत्ता सुख आज परम सुख माना जा रहा है। राजनीति में शरण लेना हमेशा मुनाफा का ज़रिया है आज का दिन में। राजनीति में ...

होने से न होने तक - 17
by Sumati Saxena Lal
  • 269

होने से न होने तक 17. मानसी जी कभी भी, किसी भी समय मेरे घर आ जातीं है और घंटों हम दोनो की बातें होती रहतीं हैं। कुछ अजब ...

चंपा पहाड़न - 8 - अंतिम भाग
by Pranava Bharti
  • 271

चंपा पहाड़न 8. चंपा अब लगभग पैंतालीस वर्ष की होने को आई थी, उसका यज्ञादि का नित्य कर्म वैसे ही चलता लेकिन गुड्डी के विवाह के पश्चात वह फिर से बंद कोठरी के एकाकीपन से जूझने ...

किसी ने नहीं सुना - 10
by Pradeep Shrivastava
  • (13)
  • 291

किसी ने नहीं सुना -प्रदीप श्रीवास्तव भाग 10 अब मुझे यह सोचकर ही आश्चर्य होता है कि तब मेरे दिमाग में कैसे अपनी पत्नी अपनी नीला को छोड़ने का ...

महामाया - 2
by Sunil Chaturvedi
  • 273

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – दो प्रवचन हॉल के पीछे वाला दरवाजा सीढ़ियों की तरफ खुलता था और सीढ़ियां एक लम्बे गलियारे में जाकर समाप्त होती थी। गलियारे में ...

रस--- प्रवाह
by Neelam Kulshreshtha
  • 308

रस--- प्रवाह नीलम कुलश्रेष्ठ [ नीलम कुलश्रेष्ठ की सरोगेसी पर आधारित `हंस `में प्रकाशित व `उस महल की सरगोशियां में `उनके कहानी संग्रह में संकलित ये कहानी एक दस्तावेज ...

हूफ प्रिंट - 10
by Ashish Kumar Trivedi
  • 321

हूफ प्रिंट Chapter 10 कोर्ट के आदेश पर कत्ल की जगह के आसपास की फिर से कांबिंग की गई। जिस तालाब से लाश मिली थी उसी से अरमान का ...

थप्पड़
by Shobhana Shyam
  • 353

सुबह के साढ़े आठ बजे थे, राकेश का कहीं अता पता नहीं था| सुबह सात बजे शिप्रा ढाई महीने  की बेटी पीकू को तैयार कर मंदिर जाने के लिए ...

कुबेर - 32
by Hansa Deep
  • 282

कुबेर डॉ. हंसा दीप 32 धीरम और ताई जब लैंड हुए तो धीरम की हालत बहुत ख़राब थी। बचने की उम्मीद शायद नहीं थी। यही वजह थी कि जीवन-ज्योत ...