तेरी गलियों का सायर अब नहीं रहा

बहोत लोगों ने पूछा ,subhay की





पासवर्ड में लिए उसका नाम ही क्यों मैंने
जबाब दिया की "याद" रखने जैसा कुछ मिला नहीं



-SUBHAY KUMAR KOL Official

Read More

कुछ यादें लेकर आया था, subhay

तेरे सहर से दूर
कुछ कम तो नहीं है, फिर भी सुकून सा है।

-SUBHAY KUMAR KOL Official

मेरे जाने के अफसोस में झुती तारीफ मत कर देना, subhay

क्यों की तेरी तारीफ के काबिल ना होने का दुख जाने के बाद भी रहेगा।

-SUBHAY KUMAR KOL Official

Read More

कह नही पाया दिल की बात मै, subhay

तो क्या किसी का हो जाना जरूरी है क्या।




-SUBHAY KUMAR KOL Official

ये रात तू गुजरती होगी चंद घंटों में, subhay

लेकिन मै तो सुबह होते होते सदियां जी लेता हूं।





-SUBHAY KUMAR KOL Official

कोई जरूरत नहीं तुम्हारे फिक्र की, subhay
तुम्हारे साथ रहकर अकेला रहना सीख गया हुं।













-SUBHAY KUMAR KOL Official

लगता है जिंदगी मजबूरी में जिए जा रहें हैं, subhay

सब अपनी अपनी बात मनबा लेते हैं।






-SUBHAY KUMAR KOL Official

तुझे भनक तक नहीं लगने देता मैं, की तेरे कितना करीब हूं "subhay"

तू दुनिया के करीब मै और मै दुनिया से कितना दूर हूं।

-SUBHAY KUMAR KOL Official

Read More

कुछ तो कहना था ये शहर, subhay
पर वक्त ही नहीं दिया जिम्मेदारियों ने।








-SUBHAY KUMAR KOL Official

मुझे सक हैं की इस झुरमुट बाले पथ पर चल के एक दिन मैं फिर लौटूंगा।




-SUBHAY KUMAR KOL Official