तेरी गलियों का सायर अब नहीं रहा

जो इंसान मुझे इग्नोर करता रहा और मैं सहता रहा,subhay

और जब मै इग्नोर करने लगा तो वो वेबाफाई का नाम दे गए

-SUBHAY KUMAR KOL Official

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सामने वाले की चाहत कोई और हो गया,subhay
और हम बेमतलब की खोहिसे सजाते रहे।

-SUBHAY KUMAR KOL Official

मेरी खामोशी ही उनको पसंद थी,subhay
तो चुप ना रहता हो क्या करता।

-SUBHAY KUMAR KOL Official

एक तरफा प्यार का एक अलग सुकून है,subhay

की रोज टूट चाहे जाना।

-SUBHAY KUMAR KOL Official

मैंने कहा याद कर रहा हूं तुम्हे,subhay
उन्हों ने कहा क्या मजाक कर रहे हो।






-SUBHAY KUMAR KOL Official

हालात सुधार लूं ,subhay
लेकिन डर लगता है कहीं कोई अपना ना रुठ जाए।

-SUBHAY KUMAR KOL Official

की वो ऋतु है और तीन महीने से ज्यादा रुकती नहीं,subhay
और अब तो टाइम से पहले ही अगई, जो मुझे जो पसंद है को ऋतु कब आए गी।

-SUBHAY KUMAR KOL Official

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की अब लगता है शाम नहीं होती उनके गलियों,subhay
क्यों की उसने बदा किया था, की हर शाम तुमको याद करेंगे।

-SUBHAY KUMAR KOL Official

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