Suryaansh सुर्यांश....writer by heart

काफ़ी जरुरत की चीज़े लाया हू अपने साथ,
तुम्हारा दर्द भी लाया हू अपने साथ।

-Suryakant Majalkar

इन सर्द रातों में नियत बदल रही है,
मेरे दिल और दिमाग़ में कुछ और बात चल रही है।

-Suryakant Majalkar

लो मान लिया हमने लोहा आपके हूनर का,
करे स्वागत इतमिनान से खिदमत में जी हुजूर का।

-Suryakant Majalkar

दुश्मन भी दुआ करते है मेरे जिंदा रहने की,
कहते है मेरे जैसा दुश्मन कहीं और न मिलेगा।

-Suryakant Majalkar

मैंने सर के बल चलना सिख लिया,
बिना बात का शहेनशहा बनना सिख लिया।

-Suryakant Majalkar

वो पुछते रहे क्यु जागते हो रातों को,
सनम हम न सो पाये याद करके तेरी बातों को।

-Suryakant Majalkar

मोहब्बत न कर दी मैंने कोई गुनाह कर दिया,
पहचाननेवाले लोग मुझे मुजरीम समझने लगे है।

-Suryakant Majalkar

शायद तुम भुल गयी हो मुझको,
तेरेबिना सपनोंवाली नींद गहरी होने लगी है।

-Suryakant Majalkar

मैं इन्सान हूँ भगवान नहीं,
मैं इन्सान हूँ शैतान नहीं,
समझो दुनियावालों गुणदोषों में अपना समय व्यर्थ ना करों।

-Suryakant Majalkar

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