नमस्कार वाचकहो शाळेत असल्यापासून काव्यलेखनाची आवड आहे. मात्र गेल्या 5 वर्षापासून blogs, कथा सुद्धा लिहित आहे. मायबोली, storymirror.com, facebook, instagram, Pratilipi वर लिहित आहे. मराठी,हिन्दी, English,गुजराती भाषेत लिहित आहे. आईने लावलेली वाचनाची आवड, पत्नीची प्रेरणा, मित्रांचे कौतुक आणि वाचकांचा सुयोग्य आशिर्वाद यामुळे पुनश्चा जोमाने Matrubharati वर लिहित आहे. लक्ष असू द्या. आपला नम्र सूर्यांश (suryakant majalkar)

चमकते रहो, खत लिखते रहो।
मोबाईल का क्या भरोसा, आते जाते दोस्तों से मिलते रहो।

साहब जवाब तो दे दो
सबकुछ लुटा दिया है मैंने।
जिस्मसे शरम का पर्दा हटा दिया है मैंने।

प्यार तुम्हारी मर्दानगी पें किया था।
जेब से तो हाथ हटा दिया है मैंने।

तुम चले जावोगे पर
इस बातसे पर्दा उठा दिया है मैंने।

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लोग मरते यहाँ
हिसाब रखें की जवाब रखें।
कहते है कुदरत का ख़ेल है।
कहते है बददुवाओं का असर है।
कोई कहे नसीब का खेल है।

किसकी बातों पे विश्वास करे।
अपने ही करम का सही रखें

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दुआएँ असर करती है।
बशर तु मंदिर न जा।
माँ के चरणों में स्वर्ग बसा। वही तु सेवारत हो जा।

चंद लम्हे उधार दे दो उनसे मिलना है।
काफी वक्त बीता दिलसे बातें किये हुवे।

जरा आईना देखो कैसे चमक रहा है। ये भी तुमको लाजवाब कह रहा है।

शहर दिवाना है तेरी हुस्नका।
हर चौराह पर दिवाने ख़डे है।

बड़ी फुरसत में बैठे हो जनाब ख़याल किसका है।
इत्र की बात चली है।
ये कमाल किसका है।

शायराना अंदाज तेरा मुझको बहोत भाँता है।

तेरे शेर का हर लब्ज मेरे दिल को छू जाता है।

बाप्पा तेरे दरबार में भुले भटके हम आयें है।

अपराध तो अगणित किये हमने, अब माफी माँगने आये है।