Hey, I am on Matrubharti!

आई गेली आई गेली अनाथांची माय गेली
मुलांना पोरके करून आज सिंधुताई सपकाळ गेली...

-स्वप्नप्रिया

तुम जा रहें हो जाओ
जाते जाते एक बात सुनकर जाना
दुःख, दर्द, तकलीफ़े जो लाये थे साथ तुम
उन्हें भी अपने साथ लेकर के जाना।

-Swapnpriya

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Ruthe bhi kise ham
jis jis ne Dil dukhaya he
o mere apne hi to he..

-Swapnpriya

तु स्वप्नात येताना आज गुलाब घेऊन ये त्याच्या सुवासाने माझी सकाळ गुलाबी होईल...

-Swapnpriya

शब्द हे जपून वापरा
शब्द तलवारी पेक्षा जास्त धारदार आहे
याचा वार न दिसणारा पण खोलात जाऊन मनाला छिन्न विछिन्न करून..
देणार ते
आयुष्यभर न भरणारा घाव आहे...

~ स्वप्नप्रिया

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ना जाने क्यू वो हमको बदलना चाहते है
हमें तो आदत सी हो चुकी है
अपने आप में खोनेकी....

-Swapnpriya

ज़िंदगी चल रही हैं इस कदर की
हम अपने ही खयालों में ढलते ही जा रहें
क्या बताऊं मैं किसी को अपनी उलझन
जब की हमें पता है
हम किसीके समझ मैं नहीं आने वाले।

-Swapnpriya

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