Hey, I am on Matrubharti!

#लापरवाह

ए इश्क तू भी क्या याद रखेगा,
तेरे आंखो में भरा सागर छलकेगा,
तेरे नजरो में कैद ख्वाब चूर करेगा,
तेरी ख़ुशी में पली हसी दफनएगा,
उतना लापरवाह बनाया जाएगा,
तेरे वजूद के किस्से सारे आम लिखाएगा।

DEAR ZINDAGI 🙏

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#लापरवाह

शायर ना अंदाज ए इश्क का मौताज़ है!!!
उसके लिखे शब्द को शयाही से निकाल देता है,!!

कितनी किताबी पन्नो में जहर जैसे लब्ज़ उतारता है,!
पर लापरवाह इश्क़ को जहन में याद बनकर सवारता रहता है!!!

DEAR ZINDAGI ❣️

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#लापरवाह

ए सागर तेरा इश्क़ भी कितना अजीब है,!!!
वो दूर बैठी नदियां है उसे पनाह देता है,!!!
और पास बैठे किनारे को मिलने को तरसता रहता है,!

इतना पानी ले कर बैठा है फिर भी प्यासा बना रहता है,!!
इतना लापरवाह बन खुद में दर्द को बुनते रहता है।!!

DEAR ZINDAGI 😔

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#सक्षम

आज ये समा भी कितना हसीन लगता है,
सच्चे वाले लब्जो का बना मशवरा लगता है,
ये कायम बने इश्क़ की आवारगी सा लगता है,
दो जहन से जहा में भूलना कितना अच्छा लगता है,
तेरे मेरे दिल में रिश्तों से जुड़े ख्वाब सा लगता है,
यूंही सदा चले अपनी महॉबात ये सोच कितना अच्छा लगता है,
अंधेरों में उजाले भरे रहे एक कयामत सा लगता है,
यूंही सक्षम बने रहे अपने दौर तो कुदरत का सिलसिला बना है जैसे दो प्यासे जहन से लगता है

DEAR ZINDAGI 🤗

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#अवरोध

कल्पना ओ से बनी एक दुनिया सी है,
अंदर मन में बेबसी बनी जिंदगानी भी है।

लब्जो से निकले घायल हुए अल्फ़ाज़ है,
दुनिया के सामने जजब्तो में संघर्षों की नुमाइश है।

सफ़र के दौरान एक नया दौर भी खड़ा लगता है,
हर एक वक़्त किसी विचारो से जूझता भी रहता है।

संभाले ना संभले दिल का आशियाना भी सा है,
धराशाई हुए मौसम की तरह अश्कों में पानी की बूंदे भी है।

कम्बख़त जान कर अंजान बन हारता रहता भी है,
अंतर आत्मा से जूठा दोहरा कर उसे दूर से प्रतिरोध करता है।

परिस्थितियों से कदम पीछे ले कर इतना विचलित
सा भी है,
जहा स्थिति में इश्क़ के मामले एक जहर की जरूरत सी है।

पाना है बड़ी मुद्दत के बाद उसे और जिंदगी बनना भी है,
और अवरोध है कि कश्मकश जिंदगी को मिलने देता ही नहीं है।

DEAR ZINDAGI 😔🌹

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#अवरोध

जिंदगी जीने से ज्यादा मरने पर तुली है,
कमबख्त इश्क़ के मामले में दुनिया रों रही है,

ए चांद मिलन की बातो का प्रस्ताव सा रख,

टूटना बिखराना कितना अवरोध बने मुहावरे से आए है,
तू सिलसिला प्यार करने का एक कयामत लाने का रख।

DEAR ZINDAGI 🤗

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#अवरोध

ए दिल मन क्यू बार बार हलचल कर रहा है,
शोर शराबे दुनिया के क्यू अंतर्मन में हो रहे है,
उसके पहेली नज़र के सामने पलके भिगो रहा है,

अवरोध जान कर भी होठ को क्यू गुनगुना रहा है,
ए खुदा उसे पा कर भी पा ना सका कभी
फिर भी क्यू ये दिल यादों में खोया रहता है।

DEAR ZINDAGI 🤗

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#अवरोध

जानती है इश्क़ का मतलब ,
ना कोई दौर है अलग होना,
फिर भी हर दम जलाया करती है,
मेरे होने के बावजूद खुद में अवरोध डाला करती है,

सही राह में राही बने से है,
मेरे विश्वाश को बढ़ावा दिया करती है,
मेरे होने ना होने का वजूद मिटा सकती है,

पापा की इज्जत के खातिर मुझे छोड़ सकती है,
बहुत है इश्क़, पर हमसे जता नहीं सकती,
मौन रहकर कास्ट का प्रॉब्लम जताया करती है।

DEAR ZINDAGI 😏

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#संतुलन

हज़रत ए इश्क को महफूज़ रखा गया,
परवाह कर उसे अपने वश में किया गया,
आसमाँ-जमी में कोई फर्क नजर ना आने दिया,
अंधेरों में उजाला होने का वजूद दिलाया गया,
ए जिंदगी उसके जमीर का यू संतुलन बिगाड़ा गया।

DEAR ZINDAGI 💞

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