Hey, I am on Matrubharti!

ये क्या अजब बात हो गई यारो इश्क़ में,

दिल और रूह में दूरियां के नाते ढूंढे जा रहे,
जमीन और आसमां में नजदीकियां करवाए जा रहे,
दुनिया में इंसान से मिट्टी की खुशबू को अपनाया जा रहा है,
तंग हुवे इश्क़ में खुद से खुदा का हक भी छीन le जा रहे है।
ये जो एक दूजे से बेइंतहां प्यार करने से भी डरे जा रहे है,
गीलासिकवा कर भी शायद एक दूजे को गहरा मशसूस कर रहे है,
सुकून ए जान से जान के दिल को आंसू में सागर जैसे बहाव ला रहे है,
खुशहाली की बार बार तनहाई से खुद से जंग कर अहमियत इश्क़ की बताए जा रहे है।

DEAR ZINDAGI 🤗❣️

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हे कान्हा, एक ही विनती है
किसी ओर के लिए ही की है

उनकी लकीरों में खुशियां मांगी है
परेशानियों से लडने की हिम्मत मांगी है

मुस्कुराहट की लकीर मुकम्मल करनी है
उनकी सारी बलाएं अपने सर लेनी है

समुंदर से भी गहरा प्यार मुझसे करते है
उसी प्यार का कर्ज इसी जनम में चुकाना है।

DEAR ZINDAGI 💞🌹

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बेखबर परिंदा दुनिया से लड़ कर सब छोड़ कर आया,
कहता जमाना जैसे उसे कोई चोट लगा कर नई आया,

दुनिया की बनी बनाई दास्ता से मुकमल कर आया,
जैसे दर्द ए दिल होने का वास्ता फिर गहराई से उभर आया,

उसकी निगाहें में बसे एक एक खयाल में गुम कर आया,
उसकी आंखो में बसे ख्वाब का जलवा गहराई में जाकर फिसल आया,

जवा हो रही उम्मीद की किरणे दिल के सहर में सौर कर आया,
हुस्न की दिल्लगी से दिल का खोने का दौर कहीं मचल आया,

बाते करने पर एक नया सफ़र मेरे जीने में उतर आया,
जब भी याद किया एक राहत का मशवरा सामने आया,

इश्क़ ए दहलीज का प्रस्ताव कहीं दफन ना हो ये आलम घर आया,
तुमसे दूर रह कर खुद से दूर ना हो जाऊ ये ताल्लुक आया,

चाहत एक तरफा का अनोखा पल बिखर आया,
चांद का ये महबूब कहा जलकर राख हो कर आया,

जिंदगी के लम्हे में ये बार बार कहीं सवाल आया,
किताब में फसे जवाब सामने बता कर नया ख्वाब भर आया,

जिक्र उसका लाजवाब लफ़्ज़ों में कर पल बना आया,
सब कुछ कह कर भी आधा बन कर मुकर आया,

इश्क़ तब्बसुम ये जाल में घायल हो अनकहे चर्चे कर आया,
मंजर में उसकी खूबी बसी प्यार का वास्ता में भर आया,

गुनाह कर दिया जैसे ना कह कर ये अनोखी बाते दरबदर कर आया,
उसको ए अहेशश महुब्बत में डाल कर इल्जाम माहौल में ले आया,

DEAR ZINDAGI 💞🌹

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मुकर जाए वो इश्क़ में जज्बात नहीं होंगे,
कश्मकश जिंदगी के गहरे पल भी रहे होगे।

ये हुनहार जिगर ले खड़ा हो गया इस जमेल में,
क्या उसे जुदा करके जिंदा रहने में सफल होंगे..?

DEAR ZINDAGI 💞

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सिकायत का दर्जा मेरे सीने में चुभ रहा है,
काबिल नहीं इश्क़ के दौर के सपने देखने में।

ये हुकूमत की इन गवाही के बंध नजरो के पर्दे में,
यूँ सलामत रहकर पूरा ना हो सके सब्र इम्तिहान में।

जिंदगी के लम्हे में जख्म ले किए जाए खुद से तय करने में,
खुदा की बिछाई हुई जाल उसको पार किया जाए हर सदमे में।

विश्वाश रख जान कर अंजान बन मर मिटा जाए इश्क़ के मामले में,
खुश रखकर अफसाना खुदा के इश्क़ का जूठा बताया जाए जान ए दिल से प्यार करने में।

DEAR ZINDAGI 🤗❣️

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क्या कुछ नहीं हुआ तबाही में खुदा,
वो निश्वार्थ प्यार कर कर के टूट गया,
उसको कमियां देखने में दिक्कत आई।

मेरी ताउम्र के हिस्से में करिश्में देखे,
टूटकर अंदर से खुद में रों रही है,
जब से बहुत कुछ नजरअंदाज कर आई।

DEAR ZINDAGI 😔

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शुरू हुआ सलीका प्यार करने के लिए,
दर्द उसके खुद के रूह में दफना के लिए,
उसे हर हालात में खुश रखने का किस्सा बनने के लिए,
हिस्से के लिखावट में उसे दोहरा कर जहाँ दिखाने के लिए,

मिलकर भी ना मिला राहबर मुझे सताने के लिए,
गलत राह चुनने के किसी खयाल का लम्हा ना आने के लिए,

चाह ना चाहत का दिल में यूँ बेकरार करने के लिए,
मचल रहा हर कोई कई डायरे से उसको ही पाने के लिए,

मिला हो गर ए महोब्बत का ज्ञान निराला करने के लिए,
सँवार दो उसे सुबह साम रात को उसे जगाने के लिए,

इस तरह तड़पाया करते जिस्म ए रूह की इम्तिहान लिए,
जाया क्यू करते हो अपनी ताकत से यूँ बेकरार करने के लिए,

बेबस नादान बेवजह क्यू सताए जा रहे दिल के राहत के लिए,
लूट रही इज्जत बदनाम कर खुद से नज़रे ना मिलने के लिए,

राहों में फूलो को काटे की तरह टूट रही चिल्लाई जाने के लिए,
कोई देख कर भी नहीं आए उसकी आत्मा को चीख से मरते बचाने के लिए,

किसी और के जज्बात में कैसे हसीन पल का ख्वाब त्याग कर उसे बचाने के लिए,
मुसाफिर बना हूँ तुझे कैसे दिल से जोड़ दूँ नजरिया देख कर में खुद से नज़रे फेरने के लिए।

DEAR ZINDAGI 🤗❣️

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कैद खुशियां में फूलो की तरह कभी महकने के लिए,
न्योछावर कर दिए हर दिल के अरमान पत्थर को पिघलाने के लिए,

उसकी रूह के ताल्लुक से हुआ मशवरा इश्क़ के लिए ,
वो हिसाब से भी बेहिसाबी लफ्ज़ को कभी ना सुनवाई करने के लिए ,

मंजिल खड़ी थी ये जुस्तजू में बेअदब पाने के लिए,
यादों में बनकर ले करवटें इसे जान आे दिल के करार में भरने के लिए,

जिंदगी जीने की उम्मीद बसी उसे कहीं पे आजमा ने के लिए,
फरेबी बन रहे सिलसिला ये कायम का ये जुनून बताने के लिए,

दिल ए दरिया में बसी कहानी थम गई उड़ान भरने के लिए,
सुरूर से महुब्बत के शौख कहीं दफना दिए और वो बंधे रहे उसको भूलने के लिए।

DEAR ZINDAGI 🙏

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उस शक्श से बेहद इश्क़ की फरमाइश कर रहा है,
उनके अल्फ़ाज़ में जाया किए शब्द को चीर रहा है।

महसूस कर के भी उसे रुला कर दर्द को बढ़ा रहा है,
ये अंदरुनी हिस्से में रहे जज्बात को बार बार जला रहा है।

महुब्बत के सिक्वे हजार बने सफ़र ए मंजर के हिस्से में,
किस्से वहीं बने जो इश्क़ में बढ़ाव दे एक दूजे से जोड़ रहा है

ये अहमियत भी कोई नहीं जान सका नरगिस जलन की,
किताबी पन्नो में भी जख्म में कलम और स्याही को आरोप लगा रहा है।

हर दुआ में जिसकी इबादत की उससे सौ दफ़ा दूर ही सही, पर
ये कौनसी बदुआ दे रहा खुदा कागज को उसे हरदम आग लगाकर राख कर रहा है।


DEAR ZINDAGI 💞

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एक आवाज है जो मेरे कानो में गूंज सी रही है,,,!
पिछले जन्मों का कुछ हिस्सा का हिसाब याद कर रही है,,,!

रिश्ता नहीं फिर भी कहीं बाते मेरे सीने से कहती रही है,,,!
रूह से रूह का कैद हुए पंछी को लगता आजाद कर रही है,,,!

हर आरजू में जिसकी ईबादत हुई, वो फिर ख़ुदा तेरा सज़दा कर रही है,,,!
अल्लाह की रहमत बाते वो दूर बैठे बैठे मुझे जान का वास्ता दे रही है,,,!

DEAR ZINDAGI 💞

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