मैं तारा गुप्ता लखनऊ (उ.प्र.) से‌ मेरी लेखन की मूल विद्या कविता व, गीत एवं कहानी हैं .मेरी रचनाएं अनेक पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं. वर्तमान में मैं सद्ग्रहणी होने के साथ -साथ सहित्यिक गति विधियों के साथ ही सामाजिक गतविधियों में भी संलग्न हूं.

बहते आंसू दिल का दर्द बयां करते हैं,
दर्द बहुत टीसते हैं,
बहते ही अच्छे लगते हैं।।

-Tara Gupta

रात-रात अध खुले नयन
मेरी नींदे हैं, हर लेतीं
सुधियों ने आ किया बसेरा
बाट निहारूँ सुबहो शाम,
तुम कहते हम दूर नही ।।

-Tara Gupta

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सदा कहते थे हम मजबूर हैं।
न चाहते हुए भी हम दूर हैं
चुरा के मेरा दिल
मेरी धडकन
कह रहे हैं बेकसूर हूँ मैं ।।

-Tara Gupta

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हृदयांगन में प्रणय पुष्प की इठलाती सी बेल फली
अधरों पर नाम हठिला तेरा तेरी खुशबू मन में आन बसी।।

-Tara Gupta

कहानी हो तो शब्दों में बयां करके खत्म कर दूं। यह सिलसिला है जिंदगी का चलता रहेगा। कारवां मोहब्बत संग संग तेरे फलता-फूलता रहेगा।

-Tara Gupta

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दोपहरी चुप्पी साधे है
जलन तपन सभी सहती है,
शाम सरोजनी जब ढलती संग मेरी नींद हरती है ।

-Tara Gupta

हर खता मैंने भुला दी
बात तेरी मानकर
अब तो आ भी जाओ
घर में अपने लौट कर

-Tara Gupta

इतनी पीडा दी है मुझको जितनी सागर में गहराई हर पग पर शूल बिखेरे
उन पर चलकर मैंने अपनी राह बनाई

-Tara Gupta

हो गई सारी इच्छा पूरी, नहीं रही है तृष्णा प्यासी। एक तुम्हारे आ जाने से, दूर हो गई गहन उदासी।।

-Tara Gupta

खुशियों के गुलाब मुरझाए बची वेदना शूल।
उजड़ गया सपनों का सावन बही हवा
प्रतिकूल।

-Tara Gupta