" बहुत दिनों से भूल गई थी... चल ए जिन्दगी अब तुजे जिया जाए "

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लफ्ज़ो की कमी है आजकल,,

दिल की मरम्मत चल रही है...

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चढती थी उस मज़ार पर,
चादरे बेसुमार,,

और बाहर बैठा फकीर
सर्दी से मर गया...!!

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माना कि तुझसे दूरियां
कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है,,

पर तेरे हिस्से का वक्त,
आज भी तन्हा गुजरता है...

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रिश्तो की बगिया में एक रिश्ता,
नीम के पेड़ जैसा भी रखना,,

जो शीख भले कड़वी देता हो पर,
तकलीफ मे मरहम भी बनता है...

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चूपचाप बैठे हैं सपने मेरे,,

लगता है हकीकत ने उन्हें
सबक सिखाया है...

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मेरी मुहोब्बत की ना सही,
मेरे सलीके की तो दाद दे,,

तेरा जिक्र रोज करते है,,
तेरा नाम लिए बगैर...

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सुख मेरा काँच का था,,

ना जाने कितनो को चूभ गया...

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तुजको बेहतर बनाने की कोशिश मे,
तुझे ही नही वक्त दे पा रहे हे हम,,

माफ करना ए जिंदगी,
तुझे ही नही जी पा रहे है हम...

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कहाँ छुपे हो सीने में तुम,
साँसें भारी रेहती है,

हो नींद में,या हो सपनों मे,
क्यूँ पलके भारी रेहती है...

@गुलजार

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सारे रंग तुम अपने रखना,
आँख का रंग तो मेरा हो,,

हो थोड़ी थोड़ी शाम की रंगत,
हल्का हल्का सवेरा हो...

@गुलजार