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" बहुत दिनों से भूल गई थी... चल ए जिन्दगी अब तुजे जिया जाए "

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आ भी जाओ मेरी आँखों के रूबरू अब तुम,
कितना ख़्वाबों में तुझे और तलाशा जाए...

मत ले मेरे सब्र का और इम्तहान,,
बड़ी मुश्किल से दिल को पत्थर बनाया है...

~~तमन्ना~~

यही हालात इब्तिदा से रहे,
लोग हमसे खफा खफा से रहे ...
बेवफा तुम कभी ना थे लेकिन,
ये भी सच है बेवफा से रहे...

~ Javed Akhtar

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मै पा न सकी कभी
इस ख़लिश से छुटकारा,
वो मुझसे जीत भी सकता था
जाने क्यूँ हारा...

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किन लफ़्ज़ो मे इतनी कड़वी, इतनी कसैली बात लिखूं...
शेर की मैं तहज़ीब निभाऊ,
या अपने हालात लिखूं...

बहुत आसान है पहचान उसकी,
अगर दुःखता नहीं तो दिल नही...

नही पहुँचा शकेगा अब चोट तु इसको,
अब मेरा दिल मेरे इख्तियार में हैं...

~~ तमन्ना ~~

छत की कड़ियों से उतरते है मेरे ख़्वाब मगर,
मेरी दिवारों से टकरा कर बिखर जाते हैं...


by : Javed Akhtar

ऐ हवा ज़रा उनसे केह देना
इतना खुश ना हो,
मैंने कलम से दोस्ती कर ली है,
अब तन्हा नही हुं मैं...


~~ तमन्ना ~~

अगर पलक पे है मोती तो ये काफी नहीं,
हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ मैं पिरोने का...

by : Javed Akhtar