poet and writer follow me instragram id lamho_ki_guzarishey

आँखों के इस बरसात को
आंसू कह मत कर
इसकी तौहीन
ये अरमान हैं दिल के
हक़ीक़त मे तब्दील होने को
हर शाम अपने जोर पर होते हैं
और आखिर में
तोड़ देते हैं
दर्द की हर सीमा
लोगों के सोच का बांध
और उल्फाई हुई नदियों की भांति
डूबों देते हैं
सम्पूर्ण जीवन की विवशता
और बहा ले जाते अपने साथ
दुःख पीड़ा
और असहजता का एक अंश...।।

तृषा...

Read More

गलत लोगों से प्रेम
खुले आसमान के नीचे बनी
एक खूबसूरत पेंटिंग की तरह होती है
जिसे एक ना एक दिन भीग कर
बिगड़नी ही होती है.....।।
Trisha R S... ✍️

Read More

हर कोई झांकता फिरता है, दूसरों के घरों में
अपने गिरेबान में झाकें तो क्या झरोखा पाये....।।
Trisha R S... ✍️

सुबह वाली चाय
ताज़गी के लिए
रात की कॉफ़ी...
नींद उड़ाने के लिए
सब की जगह पर एक तुम्हारी यादें काफ़ी हैं...
Trisha R S... ✍️

Read More

जिसने मेरे नन्हें से क़दम को चलना सिखाया
जिसने बैठा कर कंधे सारा जहां दिखाया
जिसने जीवन का मतलब बताया
जिसने हर परेशानी से हमको बचाया
जिसने अपने हर दर्द को हमसे छुपाया
जिसने मेरी दुनियां को गुलशन सा महकाया...
जिसने फ़रिश्ते की तरह हर ख्वाइस मेरी पूरी कराया...
वो जग में पापा कहलाया..
Trisha R S.. ✍️

Read More

Trisha R S लिखित कहानी "इंतज़ार... की हद्द - 1" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19887882/the-wait-1

आज कल दिल में बहार खिल रहे हैं...
सूखे ही सही तुम्हारे दिये गुलाब किताबों में मिल रहे हैं...
Trisha R S... ✍️

अनुशीर्षक पढ़े..
Trisha R S... ✍️