भावों की ये, अभिव्यक्ति शब्दों के आधार है मेरी कलम ही, मेरे अस्तित्व की पहचान है.

तुम बिन
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तुम बिन काटे कटे नहीं रातें,
तुम बिन सुनी सुनी है ये रातें,
तुम दिल की धड़कन में समाये,
अब तुम बिन जिया कैसे जाये।

तन्हा तन्हा सारा दिन मेरा गुज़रे,
सुने लगते अब ये सारे नजारे,
कुछ भी दिल को कुछ ना भाये,
अब तुम बिन जिया कैसे जायें।

चलती है साँसे तुम्हें देख कर ही
नाम तुम्हारे कर दी ये जिंदगी ही,
इस दिल को तेरी ही याद सताये,
अब तुम बिन जिया कैसे जाये।

Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित

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