Hey, I am on Matrubharti!

गलतफहमी की गुंजाईश नहीं सच्ची मोहब्बत में
जहाँ किरदार हल्का हो कहानी डूब जाती है !

चलो ये दास्तां भी धीरे-धीरे अतीत हुई...

खुश हो न तुम, तुम्हारी ही जीत हुई..

सँवारना छोड़ दिया ख़ुद को,

एक दौर में हम भी कमाल थे !!

जिस्मों की चाहत ने
मोहब्बत के भाव गिरा दिये..

???

उसने कहा था अगर मेरी याद सताये तो रो लेना,

मै तुम्हारे आसुओं से निकलती रहूँगी...

ए मोहब्बत अब मेरी राहका पत्थर बनने की कोशिश न कर
मैं मुसाफिर हूं
मुजको गुजर जाने दे.....

तुम किसीको कितनी भी शिदत से चाहो सिर्फ दर्द ही मिलेगा
ऐ दिल
ये वो दौर है जन्हा हर शक्श खुदगर्ज ही मिलेंगा......

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टूट जाते हैं आइनें और बिखर जाते हैं अक्स
जब पूरी कायनात बन जाता है एक अकेला शख़्स...

कद्र करो तो
लोगों के लिए मुहब्बत सी बोझ लगती है
वक़्त गुजारो तो
वही मुहब्बत सच्ची और सुकून भरी लगती है।