Hey, I am on Matrubharti!

सुना है बदनाम करते फिर रहे हो महफिलों में
अगर हम सच बताने लगे तो सोचो क्या होगा

और मशक्कत है अभी चलना बहुत है.
टूटी चप्पल की मरम्मत करना बहुत है

कहां कोई ठिकाना है नजर आता नही
बुझा हुआ चराग़ हूं और जलना बहुत है.....

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लोग जलते रहे मेरी मुस्कान पर
कभी दर्द की अपने नुमाइश ना की

जो जहां मिला अपना लिया
जो नही मिला उसकी ख्वाहिश ना की..!!

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तलाश-ए- यार में उड़ता हुआ गुबार हूँ मैं...
ये रहा जिस्म मेरा और जिस्म से फरार हूँ मैं...

मैं नहीं जानता, तेरे मयकदे के उसूल,
बस इतना ही काफी है,

मैंने पी रखी है और तू खुदा नज़र आता है...

ग़लत बात पर जो "वाह" करते हैं_
वोही लोग हमें "तबाह" करते हैं_

છેડી ગઈ છે સવાર સવાર માં મારા હૈયાં નાં વાજિંત્ર ને
હવે પુરો દિવસ એની યાદો ની ધૂન વાગતી રહશે.

खुद की रूह से रूठ जाता हूं,
हां, कभी कभी मैं टूट जाता हूं।

जानता हूँ की मुश्किलें बड़ी हैं
इश्क़ की राहों में पर मुझे सुकून
आता भी हैं तो उसी की बाहों में!

कुछ लोग सदमे की तरह होते है

जिनसे हम कभी उबर नही पाते .